Bṛhat Jātaka बृहज्जातक

रचयिता: वराहमिहिर

Varāhamihira’s concise natal classic — 407+ ślokas in 28 chapters, one of the “Big Five” jātaka texts. The complete text in Devanāgarī; English and Hindi meanings are being added chapter by chapter.

पठित संस्करण: Sanskrit: sanskritdocuments.org (Varāhamihira). English tr. reference: N. Chidambaram Iyer (Madras, 1885).

इंजन द्वारा उद्धृत श्लोक (409)

सम्पूर्ण मूल संस्कृत पाठ, अध्याय-दर-अध्याय। अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ श्लोक-दर-श्लोक जोड़े जा रहे हैं; अर्थ पुष्ट होते ही श्लोक के साथ दिखते हैं। देवनागरी नीचे नामित स्रोत से यथावत् है।

स्रोत: Devanāgarī: sanskritdocuments.org (Brihajjātaka, tr. Mizue Sugita / Radu Canahai), verse-for-verse cross-checked against the ITRANS master; sandhi word-spacing follows that source.

1 Rāśi-prabheda — the signs (20)

  1. 1.1 सत्यापित

    Maṅgalācaraṇa — the invocation to Sūrya, the Sun

    संस्कृत

    मूर्तित्वे परिकल्पितः शशभृतो वर्त्मापुनर्जन्मनाम् आत्मेत्यात्मविदां क्रतुश्च यजतां भर्तामरज्योतिषाम् । लोकानां प्रलयोद्भवस्थितिविभुश्चानेकधा यः श्रुतौ वाचं नः स ददात्वनेककिरणस्त्रैलोक्यदीपो रविः ॥ १.१ ॥

    mūrtitve parikalpitaḥ śaśabhṛto vartmāpunarjanmanām ātmetyātmavidāṁ kratuśca yajatāṁ bhartāmarajyotiṣām | lokānāṁ pralayodbhavasthitivibhuścānekadhā yaḥ śrutau vācaṁ naḥ sa dadātvanekakiraṇastrailokyadīpo raviḥ || 1.1 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    The Sun — conceived in form, the path of the moon’s phases, called ‘the Self’ by the knowers of the Self, the very sacrifice of those who offer, the lord of the celestial lights, the master of the worlds’ dissolution, birth and preservation, praised in many ways in the Veda — may that many-rayed Sun, the lamp of the three worlds, grant us [eloquent] speech.

    हिन्दी अर्थ

    सूर्य — जो मूर्त रूप में कल्पित है, चन्द्रमा की कलाओं का मार्ग है, आत्मज्ञानियों द्वारा ‘आत्मा’ कहा जाता है, यज्ञ करने वालों का यज्ञ है, देव-ज्योतियों का स्वामी है, लोकों की उत्पत्ति, स्थिति और प्रलय का प्रभु है, और वेद में अनेक रूपों में स्तुत है — वही अनेक-किरणों वाला, तीनों लोकों का दीपक सूर्य हमें [उत्तम] वाणी प्रदान करे।

    स्रोत: Devanāgarī verbatim per the VidyāSetu Bṛhat Jātaka course (Varāhamihira, maṅgalācaraṇa 1.1); the universally-attested opening invocation. English & Hindi renderings by Vedic Horā.

  2. 1.2 सत्यापित

    The author’s purpose

    संस्कृत

    भूयोभिः पटुबुद्धिभिः पटुधियां होराफलज्ञप्तये शब्दन्यायसमन्वितेषु बहुशः शास्त्रेषु दृष्टेष्वपि । होरातन्त्र महार्णव प्रतरणे भग्नोद्यमानाम् अहं स्वल्पं वृत्त विचित्रम् अर्थ बहुलं शास्त्र प्लवं प्रारभे ॥ २॥

    bhūyobhiḥ paṭubuddhibhiḥ paṭudhiyāṃ horāphalajñaptaye śabdanyāyasamanviteṣu bahuśaḥ śāstreṣu dṛṣṭeṣvapi | horātantramahārṇavaprataraṇe bhagnodyamānām ahaṃ svalpaṃ vṛttavicitramarthabahulaṃ śāstraplavaṃ prārabhe || 2 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    Although the science of horoscopy has been set out again and again, by keen intellects and for keen minds, in many treatises furnished with grammar and reasoning, yet — for those whose effort is broken in crossing the vast ocean of horā-science — I now begin this small raft of a work, varied in its metre and rich in meaning.

    हिन्दी अर्थ

    यद्यपि होराफल के ज्ञान के लिए तीक्ष्ण-बुद्धि वालों द्वारा, तीक्ष्ण मनीषियों के हेतु, व्याकरण और न्याय से युक्त अनेक शास्त्रों में इसे बार-बार प्रतिपादित किया गया है, तथापि होरा-शास्त्र रूपी महासागर को पार करने में जिनका उद्यम भग्न हो जाता है उनके लिए मैं छन्द में विचित्र और अर्थ में बहुल इस छोटे-से शास्त्र-रूपी बेड़े का आरम्भ करता हूँ।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  3. 1.3 सत्यापित

    The word “horā”

    संस्कृत

    होरेत्यहो रात्र विकल्पम् एके वाञ्छन्ति पूर्वापर वर्ण लोपात् । कर्माजितं पूर्व भवे सद् आदि यत् तस्य पङ्क्तिं समभिव्यनक्ति ॥ ३॥

    horetyahorātravikalpam eke vāñchanti pūrvāparavarṇalopāt | karmājitaṃ pūrvabhave sad ādi yattasya paṅktiṃ samabhivyanakti || 3 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    Some derive the word "horā" from "ahorātra" (day-and-night) by dropping its first and last syllables. It [horā, the science] reveals in sequence the good and other fruits earned by action (karma) in a former birth.

    हिन्दी अर्थ

    कुछ विद्वान् ‘अहोरात्र’ (दिन-रात) के प्रथम और अन्तिम अक्षर के लोप से ‘होरा’ शब्द की व्युत्पत्ति मानते हैं। यह [होरा-विद्या] पूर्वजन्म में किए गए कर्म से अर्जित शुभ आदि फलों की शृंखला को क्रमशः प्रकट करती है।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  4. 1.4 सत्यापित

    The limbs of the Kālapuruṣa; synonyms for “sign”

    संस्कृत

    कालाङ्गानि वराङ्गमाननम् उरो हृत् क्रोड वासो भृतो बस्तिर्व्यञ्जनम् ऊरु जानु युगुले जङ्घे ततोऽङ्घ्रि द्वयम् । मेषाश्वि प्रथमा नवऋक्ष चरणाश्चक्र स्थिताराशयो राशि क्षेत्र गृहऋक्ष भानि भवनं चैकार्थ सम्प्रत्ययाः ॥ ४॥

    kālāṅgāni varāṅgamānanamuro hṛtkroḍavāso bhṛto bastirvyañjanamūrujānuyugale jaṅghe tato’ṅghridvayam | meṣāśviprathamā navaṛkṣacaraṇāścakrasthitā rāśayo rāśikṣetragṛhaṛkṣabhāni bhavanaṃ caikārthasampratyayāḥ || 4 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    The limbs of the Time-person (Kālapuruṣa) are the head, the face, the chest, the heart, the belly, the waist, the generative organs, the two thighs, the pair of knees, then the two shanks, and lastly the two feet — [assigned to] the signs beginning with Meṣa (Aśvinī), which stand in the zodiac-wheel as nine quarters of the asterisms each. Rāśi, kṣetra, gṛha, ṛkṣa, bha and bhavana are all synonyms, conveying the one idea "sign".

    हिन्दी अर्थ

    काल-पुरुष के अंग हैं — सिर, मुख, वक्ष, हृदय, उदर, कटि, जननांग, दोनों जंघाएँ, दोनों घुटने, फिर दोनों पिंडलियाँ, और अन्त में दोनों पैर — ये मेष (अश्विनी) से आरम्भ होने वाली राशियाँ हैं, जो चक्र में नक्षत्रों के नौ-नौ चरणों के रूप में स्थित हैं। राशि, क्षेत्र, गृह, ऋक्ष, भ और भवन — ये सब एक ही अर्थ (‘राशि’) के वाचक हैं।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  5. 1.5 सत्यापित

    The forms of the signs

    संस्कृत

    मत्स्यौ घटी नृ मिथुनं स गदं स वीणं चापी नरोऽश्व जघनो मकरो मृगास्यः । तौली स सस्यदहना प्लवगा च कन्या शेषाः स्वनाम सदृशाः स्वचराश्च सर्वे ॥ ५॥

    matsyau ghaṭī nṛmithunaṃ sagadaṃ savīṇaṃ cāpī naro’śvajaghano makaro mṛgāsyaḥ | taulī sasasyadahanā plavagā ca kanyā śeṣāḥ svanāmasadṛśāḥ svacarāśca sarve || 5 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    Pisces is two fishes; Aquarius a pot; Gemini a man and woman holding a mace and a lute; Sagittarius an archer, a man with a horse’s hindquarters; Capricorn deer-faced (a crocodile); Libra a man bearing a balance; Virgo a maiden in a boat holding grain and a lamp. The rest resemble their own names, and every sign moves each in its own manner.

    हिन्दी अर्थ

    मीन दो मछलियाँ हैं; कुम्भ एक घट; मिथुन गदा और वीणा धारण किए एक पुरुष-स्त्री; धनु एक धनुर्धर — अश्व के पिछले भाग वाला पुरुष; मकर मृग-मुख वाला (मगर); तुला तराजू लिए एक पुरुष; कन्या नौका में अन्न और दीप लिए एक कुमारी। शेष राशियाँ अपने नाम के अनुरूप हैं, और सभी अपनी-अपनी गति से चलती हैं।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  6. 1.6 सत्यापित

    Lords of the signs and the navāṁśa

    संस्कृत

    क्षितिज सित ज्ञ चन्द्ररवि सौम्य सितावनिजाः सुर गुरु मन्द सौरि गुरवश्च गृहांशकपः । अज मृग तौलि चन्द्र भवनादि नवांश विधिर्भवन समांशकाधिपतयः स्व गृहात् क्रमशः ॥ ६॥

    kṣitija sita jña candraravi saumya sitāvanijāḥ suragurumandasauriguravaśca gṛhāṃśakapāḥ | ajamṛgataulicandrabhavanādi navāṃśa vidhirbhavana samāṃśakādhipatayaḥ svagṛhāt kramaśaḥ || 6 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    The lords of the signs, in order from Aries, are Mars, Venus, Mercury, the Moon, the Sun, Mercury, Venus, Mars, Jupiter, Saturn, Saturn and Jupiter — these rule the houses and their sub-divisions. The navāṁśa (ninth-part) is reckoned from Aries, Capricorn, Libra and Cancer [for the movable signs, from the sign itself]; the lords of a sign’s equal parts follow in order, beginning from its own sign.

    हिन्दी अर्थ

    मेष से क्रमशः राशियों के स्वामी हैं — मंगल, शुक्र, बुध, चन्द्र, सूर्य, बुध, शुक्र, मंगल, गुरु, शनि, शनि और गुरु — ये भाव तथा उनके अंशों के अधिपति हैं। नवांश की गणना मेष, मकर, तुला और कर्क से होती है [चर राशियों के लिए उसी राशि से]; और किसी राशि के समान अंशों के स्वामी उसी राशि से क्रमशः चलते हैं।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  7. 1.7 सत्यापित

    The triṁśāṁśa (thirtieth-parts); the sign-junctions

    संस्कृत

    कुजरविज गुरु ज्ञ शुक्र भागाः पवन समीरण कौर्पि जूक लेयाः । अयुजि युजि तु भे विपर्ययस्थः शसि भवनालि झषान्तम् ऋक्ष संधिः ॥ ७॥

    kujaravijagurujñaśukrabhāgāḥ pavanasamīraṇakaurpijūkaleyāḥ | ayujiyujitubheviparyayasthaḥ śasibhavanālijhaṣāntam ṛkṣasaṃdhiḥ || 7 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    The triṁśāṁśas (thirtieth-parts) of an odd sign are ruled, in degrees, by Mars, Saturn, Jupiter, Mercury and Venus (5, 5, 8, 7, 5); in an even sign the same order is reversed. The sensitive sign-junction (ṛkṣa-sandhi / gaṇḍānta) falls at the end of Cancer — the Moon’s house — and of Scorpio and Pisces.

    हिन्दी अर्थ

    विषम राशि के त्रिंशांश (तीसवें भाग) क्रमशः मंगल, शनि, गुरु, बुध और शुक्र के अधीन हैं (5, 5, 8, 7, 5 अंश); सम राशि में यही क्रम विपरीत होता है। संवेदनशील ऋक्ष-सन्धि (गण्डान्त) कर्क — चन्द्र के गृह — तथा वृश्चिक और मीन के अन्त में होती है।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  8. 1.8 सत्यापित

    The foreign (yavana) names of the signs

    संस्कृत

    क्रिय तावुरि जितुम कुलीर लेय पाथोन जूक कौर्प्याख्याः । तौक्षिकाकोकेरो हृद् रोगश्चान्त्य भं चेत्थम् ॥ ८॥

    kriyatāvurijitumakulīraleyapāthonajūka-kaurpyākhyāḥ | ...

    अंग्रेज़ी अर्थ

    The signs are known also by the foreign (yavana) names Kriya, Tāvuri, Jituma, Kulīra, Leya, Pāthona, Jūka and Kaurpi [Aries through Scorpio, and so on for the rest].

    हिन्दी अर्थ

    राशियाँ विदेशी (यवन) नामों से भी जानी जाती हैं — क्रिय, तावुरि, जितुम, कुलीर, लेय, पाथोन, जूक और कौर्पि [मेष से वृश्चिक तक, तथा आगे शेष के लिए]।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  9. 1.9 सत्यापित

    The vargas; “horā” as ascendant

    संस्कृत

    द्रेष्काण होरा नव भाग संज्ञास्त्रिंशांशकद्वादश संज्ञिताश्च । क्षेत्रं च यद्यस्य स तस्य वर्गो होरेति लग्नं भवनस्य चार्धम् ॥ ९॥

    dreṣkāṇahorānavabhāgasaṃjñās triṃśāṃśakadvādaśasaṃjñitāśca | kṣetraṃ ca yadyasya sa tasya vargo horeti lagnaṃ bhavanasya cārdham || 9 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    The divisions named drekkāṇa, horā, navāṁśa, triṁśāṁśa and dvādaśāṁśa, together with the sign (kṣetra) itself, make up a [planet’s] varga-group. "Horā" also denotes the ascendant, and is the half of a sign.

    हिन्दी अर्थ

    द्रेष्काण, होरा, नवांश, त्रिंशांश और द्वादशांश नामक विभाग — तथा स्वयं राशि (क्षेत्र) — मिलकर [ग्रह का] वर्ग-समूह बनाते हैं। ‘होरा’ का अर्थ लग्न भी है, और यह राशि का आधा भाग है।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  10. 1.10 सत्यापित

    Signs rising head-first, hind-first, or both

    संस्कृत

    गोऽजाश्वि कर्कि मिथुनाः स मृगा निशाख्याः पृष्ठोदया विमिथुनाः कथितास्तैव । शीर्षोदयादिन बलाश्च भवन्ति शेषा लग्नं समेत्युभयतः पृथुरोम युग्मम् ॥ १०॥

    go’jāśvi karki mithunāḥ samṛgā niśākhyāḥ pṛṣṭhodayā vimithunāḥ kathitāstaiva | śīrṣodayādinabalāśca bhavanti śeṣā lagnaṃ sametyubhayataḥ pṛthuroma yugmam || 10 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    Aries, Taurus, Cancer, Sagittarius and Capricorn are called nocturnal and "hind-rising" (pṛṣṭhodaya); the rest are "head-rising" (śīrṣodaya) and strong by day; Pisces rises both ways (ubhayodaya). Gemini is reckoned a "hairy" (biped) sign.

    हिन्दी अर्थ

    मेष, वृष, कर्क, धनु और मकर रात्रि-संज्ञक तथा ‘पृष्ठोदय’ (पिछले भाग से उदय होने वाली) कही गई हैं; शेष ‘शीर्षोदय’ हैं और दिन में बलवान् होती हैं; मीन ‘उभयोदय’ है (दोनों प्रकार से उदय)। मिथुन को द्विपद (‘पृथुरोम’) राशि माना गया है।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  11. 1.11 सत्यापित

    Male/female, movable/fixed/dual; the horās and drekkāṇas

    संस्कृत

    क्रूरः सौम्यः पुरुष वनिते ते चराग द्वि देहाः प्रागादीशाः क्रिय वृष नृयुक् कर्कटाः स त्रिकोणाः । मार्तण्डेन्द्वोरयुजि समभे चन्द्र भान्वोश्च होरे द्रेष्काणाः स्युः स्व भवन सुत त्रित्रिकोणाधिपानाम् ॥ ११॥

    krūraḥ saumyaḥ puruṣavanite te carāga dvi dehāḥ prāgādīśāḥ kriyavṛṣanṛyukkarkaṭāḥ sa trikoṇāḥ | mārtaṇḍendvorayuji samabhe candra bhānvośca hore dreṣkāṇāḥ syuḥ sva bhavana suta tritrikoṇādhipānām || 11 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    Odd signs are male and cruel, even signs female and gentle; the signs are movable, fixed and dual in turn from Aries, and are lords of the directions beginning with the east. The two horās of a sign belong to the Sun and the Moon — the Sun’s first in an odd sign, the Moon’s first in an even one; the three drekkāṇas are ruled by the lords of the sign itself, of the 5th, and of the 9th from it (the trine lords).

    हिन्दी अर्थ

    विषम राशियाँ पुरुष-संज्ञक व क्रूर हैं, सम राशियाँ स्त्री-संज्ञक व सौम्य; राशियाँ मेष से क्रमशः चर, स्थिर और द्विस्वभाव हैं, तथा पूर्व आदि दिशाओं की स्वामिनी हैं। राशि की दो होराएँ सूर्य और चन्द्र की होती हैं — विषम राशि में प्रथम होरा सूर्य की, सम में चन्द्र की; और तीन द्रेष्काण उसी राशि, पंचम तथा नवम (त्रिकोण) के स्वामियों के अधीन होते हैं।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  12. 1.12 सत्यापित

    An alternative view of the horās and drekkāṇas

    संस्कृत

    के चित् तु होरां प्रथमां भपस्य वाञ्छन्ति लाभाधिपतेर्द्वितीयाम् । द्रेष्काण संज्ञाम् अपि वर्णयन्ति स्वद्वादशैकादशराशिपानाम् ॥ १२॥

    kecit tu horāṃ prathamāṃ bhapasya vāñchanti lābhādhipaterdvitīyām | dreṣkāṇa saṃjñām api varṇayanti svadvādaśaikādaśarāśipānām || 12 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    Some, however, would assign the first horā to the lord of the sign and the second to the lord of the gain-house (11th); and they describe the three drekkāṇas as belonging to the lords of the sign itself, the 12th, and the 11th from it.

    हिन्दी अर्थ

    किन्तु कुछ आचार्य प्रथम होरा को राशि-स्वामी की और द्वितीय को लाभ-स्थान (एकादश) के स्वामी की मानते हैं; और वे तीन द्रेष्काणों को उसी राशि, द्वादश तथा एकादश के स्वामियों के अधीन बताते हैं।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  13. 1.13 सत्यापित

    Exaltation and debilitation of the planets

    संस्कृत

    अज वृषभ मृगाङ्गना कुलीरा झष वणिजा च दिवाकरादि तुङ्गाः । दश शिखि मनु युक् तिथीन्द्रियांशैस्त्रि नवक विंशतिभिश्च ते अस्त नीचाः ॥ १३॥

    ajavṛṣabhamṛgāṅganākulīrājhaṣavaṇijā ca divākarādi tuṅgāḥ | daśa śikhi manu yuk tithi īndriyāṃśais trinavakaviṃśatibhiśca te astanīcāḥ || 13 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    The exaltation signs, for the Sun and the rest in order, are Aries, Taurus, Capricorn, Virgo, Cancer, Pisces and Libra [Sun, Moon, Mars, Mercury, Jupiter, Venus, Saturn], the exact degrees being 10°, 3°, 28°, 15°, 5°, 27° and 20°. The debilitation of each planet lies in the seventh sign from its exaltation, at the same degree.

    हिन्दी अर्थ

    सूर्यादि ग्रहों की उच्च राशियाँ क्रमशः मेष, वृष, मकर, कन्या, कर्क, मीन और तुला हैं [सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि], और उच्चांश क्रमशः 10°, 3°, 28°, 15°, 5°, 27° तथा 20° हैं। प्रत्येक ग्रह की नीच राशि उसकी उच्च राशि से सातवीं राशि में, उन्हीं अंशों पर होती है।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  14. 1.14 सत्यापित

    Vargottama navāṁśa; the mūlatrikoṇa signs

    संस्कृत

    वर्गोत्तमाश्चरगृहादिषु पूर्व मध्य पर्यन्ततः शुभ फला नव भाग संज्ञाः । सिंहो वृष प्रथम षष्ठ हयाङ्ग तौलि कुम्भास्त्रिकोण भवनानि भवन्ति सूर्यात् ॥ १४॥

    vargottamāścaragṛhādiṣu pūrvamadhyaparyantataḥ śubhaphalā navabhāgasaṃjñāḥ | siṃho vṛṣaprathamaṣaṣṭhahayāṅgataulikumbhās trikoṇabhavanāni bhavanti sūryāt || 14 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    The vargottama navāṁśa is the first, the middle, or the last ninth-part in a movable, fixed, or dual sign respectively, and gives auspicious results. The mūlatrikoṇa (root-trine) signs, from the Sun onward, are Leo, Taurus, Aries, Virgo, Sagittarius, Libra and Aquarius.

    हिन्दी अर्थ

    वर्गोत्तम नवांश चर, स्थिर और द्विस्वभाव राशियों में क्रमशः प्रथम, मध्य और अन्तिम नवांश होता है, और शुभ फल देता है। सूर्यादि ग्रहों की मूलत्रिकोण राशियाँ हैं — सिंह, वृष, मेष, कन्या, धनु, तुला और कुम्भ।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  15. 1.15 सत्यापित

    Names of the twelve houses; the upacaya houses

    संस्कृत

    होरादयस्तनु कुटुम्ब सहोत्थ बन्धु पुत्रारि पत्नी मरणानि शुभास्पदायाः । रिःफाख्यम् इत्युपचयान्यरि कर्म लाभदुश्चिक्य संज्ञित गृहाणि न नित्यम् एके ॥ १५॥

    horādayastanukuṭumbasahotthabandhuputrāripatnī-maraṇāni śubhāspadāyāḥ | riḥphākhyam ityupacayānyarikarmalābhaduścikya-saṃjñitagṛhāṇi na nityam eke || 15 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    The twelve houses, beginning with the horā (ascendant), are: the body (1), family and wealth (2), siblings (3), kin and home (4), children (5), enemies (6), spouse (7), death (8), fortune (9), action (10), gains (11), and the 12th, called riḥpha. The "growth" houses (upacaya) are the 3rd, 6th, 10th and 11th — though some do not always count them so.

    हिन्दी अर्थ

    लग्न (होरा) से आरम्भ बारह भाव हैं — तनु/शरीर (1), कुटुम्ब/धन (2), सहज/भाई-बहन (3), बन्धु/गृह (4), पुत्र (5), शत्रु (6), पत्नी/जाया (7), मरण (8), भाग्य (9), कर्म (10), लाभ (11), और द्वादश — जिसे ‘रिःफ’ कहते हैं। उपचय भाव तीसरा, छठा, दसवाँ और ग्यारहवाँ हैं — यद्यपि कुछ आचार्य इन्हें सदैव नहीं गिनते।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  16. 1.16 सत्यापित

    Further names of the houses; the “square” houses

    संस्कृत

    कल्प स्व विक्रम गृह प्रतिभा क्षतानि चित्तोत्थरन्ध्र गुरु मान भव व्ययानि । लग्नाच्चतुर्थ निधने चतुरस्र संज्ञे द्यूनं च सप्तम गृहं दशमऋक्षम् आज्ञा ॥ १६॥

    kalpasvavikramagṛhapratibhākṣatāni cittottharandhragurumānabhavavyayāni | lagnāccaturtha nidhane caturasra saṃjñe dyūnaṃ ca saptama gṛhaṃ daśamaṛkṣam ājñā || 16 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    Further names are given for the houses. The 4th and 8th from the ascendant are called "caturasra" (the square houses); the 7th house is "dyūna" (the descendant); and the 10th house is "ājñā" — the house of command, i.e. of action.

    हिन्दी अर्थ

    भावों के और नाम दिए गए हैं। लग्न से चौथा और आठवाँ भाव ‘चतुरस्र’ (कोणीय भाव) कहलाते हैं; सातवाँ भाव ‘द्यून’ (अस्त) है; और दसवाँ भाव ‘आज्ञा’ — आज्ञा अर्थात् कर्म का स्थान है।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  17. 1.17 सत्यापित

    The angles (kendra); which signs are strong in them

    संस्कृत

    कण्टक केन्द्र चतुष्टय संज्ञाः सप्तम लग्न चतुर्थ ख भानाम् । तेषु यथाभिहितेषु बलाढ्याः कीट नरांबु चराः पशवश्च ॥ १७॥

    kaṇṭakakendracatuṣṭayasaṃjñāḥ saptamalagnacaturthakhabhānām | teṣu yathābhihiteṣu balāḍhyāḥ kīṭa narāṃbu carāḥ paśavaśca || 17 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    The 7th, 1st (lagna), 4th and 10th (kha) houses are termed kaṇṭaka, kendra and catuṣṭaya — the angles. In these, respectively, the insect (Scorpio-type), human, watery and quadruped signs are strong.

    हिन्दी अर्थ

    सातवाँ, प्रथम (लग्न), चौथा और दसवाँ भाव ‘कण्टक / केन्द्र / चतुष्टय’ — अर्थात् कोण-स्थान — कहलाते हैं। इनमें क्रमशः कीट, मनुष्य, जल और चतुष्पद राशियाँ बलवान् होती हैं।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  18. 1.18 सत्यापित

    Succedent and cadent houses; more house-names

    संस्कृत

    केन्द्रात् परं पणफरं परतस्तु सर्व भापोक्लिमं हिबुकम् अम्बु सुखं च वेश्म । जामित्रम् अस्त भवनं त्रिकोणं मेषूरणं दशमम् अत्र च कर्म विद्यात् ॥ १८॥

    kendrāt paraṃ paṇapharaṃ paratastu sarvamāpoklimaṃ hibukam ambusukhaṃ ca veśma | jāmitram asta bhavanaṃ trikoṇaṃ meṣūraṇaṃ daśamam atra ca karma vidyāt || 18 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    The house next after an angle is "paṇaphara" (succedent); the one beyond that is "āpoklima" (cadent). The 4th house is "hibuka" (also ambu, sukha); the 7th is "jāmitra" (the descendant); the 10th is "meṣūraṇa" — and it should be known as the house of action (karma).

    हिन्दी अर्थ

    केन्द्र के ठीक बाद का भाव ‘पणफर’ (आगामी) है; उसके आगे का ‘आपोक्लिम’ (पतित)। चौथा भाव ‘हिबुक’ (तथा अम्बु, सुख) है; सातवाँ ‘जामित्र’ (अस्त); दसवाँ ‘मेषूरण’ — और इसे कर्म का स्थान जानना चाहिए।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  19. 1.19 सत्यापित

    Strength of signs by lord, aspect, and time

    संस्कृत

    होरा स्वामि गुरु ज्ञ वीक्षितयुता नान्यैश्च वीर्योत्कटा केन्द्रस्था द्वि पदादयोऽह्नि निशि च प्राप्ते च संध्याद्वये । पूर्वार्धे विषयादयः कृत गुणा मानं प्रतीपं च तद्दुश्चिक्यं सहजं तपश्च नवमं त्र्याद्यां त्रिकोणं च तत् ॥ १९॥

    horā svāmigurujñavīkṣitayutā nānyaiśca vīryotkaṭā kendrasthā dvipadādayo’hniniśica prāpte ca saṃdhyādvaye | pūrvārdhe viṣayādayaḥ kṛta guṇā mānaṃ pratīpaṃ ca tadduścikyaṃ sahajaṃ tapaśca navamaṃ tryādyāṃ trikoṇaṃ ca tat || 19 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    A sign joined with or aspected by its own lord, Jupiter or Mercury (and not by others) is exceptionally strong. The biped signs are strong when standing in an angle by day, [the others by night,] and both at the two twilights; further rules of half-sign and directional strength are then given. (The verse also names the 3rd house "duścikya"/sahaja and the 9th "tapas"/trikoṇa.)

    हिन्दी अर्थ

    अपने स्वामी, गुरु या बुध से युत अथवा दृष्ट राशि (अन्य ग्रहों से नहीं) अत्यन्त बलवान् होती है। द्विपद राशियाँ दिन में केन्द्र में [तथा अन्य रात्रि में] और दोनों सन्ध्याओं में बलवान् होती हैं; इसके आगे अर्ध-राशि और दिशा-बल के नियम दिए गए हैं। (श्लोक तीसरे भाव को ‘दुश्चिक्य’/सहज और नवम को ‘तप’/त्रिकोण भी कहता है।)

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  20. 1.20 सत्यापित

    The colours of the signs; the veśi

    संस्कृत

    रक्तः श्वेतः शुक तनु निभः पाटलो धूम्र पांडुश्चित्रः कृष्णः कनक सदृशः पिङ्गलः कर्बुरश्च । बभ्रुः स्वच्छः प्रथम भवनाद्येषु वर्णाः प्लवत्वं स्वाम्याशाख्यं दिन करयुताद् भाद् द्वितीयं च वेशिः ॥ २०॥

    raktaḥ śvetaḥ śuka tanu nibhaḥ pāṭalo dhūmra pāṃḍuścitraḥ kṛṣṇaḥ kanaka sadṛśaḥ piṅgalaḥ karburaśca | babhruḥ svacchaḥ prathama bhavanādyeṣu varṇāḥ plavatvaṃ svāmyāśākhyaṃ dina karayutād bhād dvitīyaṃ ca veśiḥ || 20 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    The colours of the signs, from Aries onward, are: red, white, parrot-green, pale-pink, smoky-grey, pale, variegated, black, golden, tawny, speckled, and brown/clear. The sign’s direction follows its lord; and the sign next after the one the Sun occupies is called "veśi".

    हिन्दी अर्थ

    मेष से आरम्भ राशियों के वर्ण हैं — लाल, श्वेत, शुक-हरित, पाटल (हल्का गुलाबी), धूम्र, पाण्डु, चित्र-विचित्र, कृष्ण, स्वर्ण-सदृश, पिंगल, कर्बुर, और बभ्रु/स्वच्छ। राशि की दिशा उसके स्वामी के अनुसार होती है; और सूर्य जिस राशि में हो उससे अगली राशि ‘वेशि’ कहलाती है।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

2 Grahas — the planets and their natures (21)

  1. 2.1 सत्यापित

    What the planets signify (kārakatva)

    संस्कृत

    कालात्मादिन कृन् मनस्तुहिनगुः सत्त्वं कुजो ज्ञो वचो जीवो ज्ञान सुखे सितश्च मदनो दुःखं दिनेशात्मजः । राजानौ रवि शीतगू क्षित सुतो नेता कुमारो बुधः सूरिर्दानव पूजितश्च सचिवौ प्रेष्यः सहस्रांशुजः ॥ १॥

    kālātmādinakṛn manastuhinaguḥ satvaṃ kujo jño vaco jīvo jñānasukhe sitaśca madano duḥkhaṃ dineśātmajaḥ | rājānau raviśītagū kṣitasuto netā kumāro budhaḥ sūrirdānava pūjitaśca sacivau preṣyaḥ sahasrāṃśujaḥ || 1 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    The Sun signifies the soul; the Moon the mind; Mars strength; Mercury speech; Jupiter knowledge and happiness; Venus desire; and Saturn (the Sun’s son) sorrow. The Sun and Moon are the two royal planets; Mars is the army-commander; Mercury the heir-apparent; Jupiter and Venus (preceptors of the gods and of the demons) the two ministers; and Saturn the servant.

    हिन्दी अर्थ

    सूर्य आत्मा का, चन्द्र मन का, मंगल बल का, बुध वाणी का, गुरु ज्ञान और सुख का, शुक्र काम का, और शनि (सूर्य-पुत्र) दुःख का कारक है। सूर्य और चन्द्र दो राजा हैं; मंगल सेनापति; बुध युवराज; गुरु और शुक्र (देव-गुरु और दानव-गुरु) दो मन्त्री; और शनि सेवक है।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  2. 2.2 सत्यापित

    Synonyms of the planets (Sun–Saturn)

    संस्कृत

    हेलिः सूर्यश्चन्द्रमाः शीतरश्मिर्हेम्नो विज् ज्ञो बोधनश्चेन्दु पुत्रः । आरो वक्रः क्रूरदृक् चावनेयः कोणो मन्दः सूर्य पुत्रोऽसितश्च ॥ २॥

    heliḥ sūryaścandramāḥ śītaraśmirhemno vij jño bodhanaścendu putraḥ | āro vakraḥ krūradṛk cāvaneyaḥ koṇo mandaḥ sūrya putro’sitaśca || 2 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    Synonyms: the Sun is Heli, Sūrya; the Moon Candramas, Śītaraśmi; Mercury Jña, Bodhana, Induputra; Mars Āra, Vakra, Krūradṛś, Avaneya; Saturn Koṇa, Manda, Sūryaputra, Asita.

    हिन्दी अर्थ

    पर्याय: सूर्य — हेलि, सूर्य; चन्द्र — चन्द्रमा, शीतरश्मि; बुध — ज्ञ, बोधन, इन्दुपुत्र; मंगल — आर, वक्र, क्रूरदृक्, अवनेय; शनि — कोण, मन्द, सूर्यपुत्र, असित।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  3. 2.3 सत्यापित

    Synonyms (Jupiter, Venus, Rāhu, Ketu)

    संस्कृत

    जीवोऽङ्गिराः सुर गुरुर्वचसां पतीज्यः शुक्रो भृगुर्भृगुसुतः सितास्फुजिच्च । राहुस्तमोऽगुरसुरश्च शिखीति केतुः पर्यायम् अन्यम् उपलभ्य वदेच्च लोकात् ॥ ३॥

    jīvo’ṅgirāḥ sura gururvacasāṃpatījyaḥ śukro bhṛgurbhṛgusutaḥ sitāsphujicca | rāhustamo’gurasuraśca śikhīti ketuḥ paryāyam anyam upalabhya vadecca lokāt || 3 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    Jupiter is Jīva, Aṅgiras, Suraguru, Vācaspati, Ijya; Venus is Śukra, Bhṛgu, Bhṛgusuta, Sita, Asphujit; Rāhu is Tamas, the sunless one, the demon; Ketu is Śikhin. Other synonyms one may learn from common usage.

    हिन्दी अर्थ

    गुरु — जीव, अंगिरा, सुरगुरु, वाचस्पति, इज्य; शुक्र — शुक्र, भृगु, भृगुसुत, सित, अस्फुजित्; राहु — तमस्, अगु, असुर; केतु — शिखी। अन्य पर्याय लोक-व्यवहार से जान लेने चाहिए।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  4. 2.4 सत्यापित

    Complexions of the planets

    संस्कृत

    रक्त श्यामो भास्करो गौरेन्दुर्नात्युच्चाङ्गो रक्त गौरश्च वक्रः । दूर्वा श्यामो ज्ञो गुरुर्गौर गात्रः श्यामः शुक्रो भास्करिः कृष्णदेहः ॥ ४॥

    rakta śyāmo bhāskaro gaurendurnātyuccāṅgo rakta gauraśca vakraḥ | dūrvā śyāmo jño gururgauragātraḥ śyāmaḥ śukro bhāskariḥ kṛṣṇadehaḥ || 4 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    Complexions: the Sun is dark-red; the Moon fair; Mars red and not very tall; Mercury green like dūrvā grass; Jupiter fair-bodied; Venus dark; and Saturn (the Sun’s son) black-bodied.

    हिन्दी अर्थ

    वर्ण: सूर्य गहरा लाल; चन्द्र गौर (श्वेत); मंगल लाल और अधिक ऊँचा नहीं; बुध दूर्वा-सा हरा; गुरु गौर-शरीर; शुक्र श्याम; और शनि (सूर्य-पुत्र) कृष्ण-देह।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  5. 2.5 सत्यापित

    Presiding deities; the natural malefics

    संस्कृत

    वर्णास्ताम्र सितातिरक्त हरित व्यापीत चित्रासिता । बहून्यम्ब्वग्निज केशवेन्द्र शचिकाः सूर्यादि नाथाः क्रमात् । प्रागाद्यारवि शुक्र लोहित तमः सौरेन्दु वित् सूरयः क्षीणेन्द्वर्क मही सुतार्क तनयाः पापा बुधस्तैर्युतः ॥ ५॥

    varṇāstāmra sitātirakta harita vyāpīta citrāsitā | vahnyambvagnijakeśavendraśacikāḥ sūryādināthāḥ kramāt | prāgādyāraviśukralohitatamaḥsaurenduvitsūrayaḥ kṣīṇendvarkamahīsutārkatanayāḥ pāpā budhastairyutaḥ || 5 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    The colours (in another reckoning) are copper, white, deep-red, green, yellow, variegated and black. The presiding deities of the Sun and the rest are, in order, Agni, the Waters, the fire-born Skanda, Viṣṇu (Keśava), Indra, Śacī and Brahmā. The natural malefics are the Sun, Mars, Saturn and the waning Moon; Mercury too becomes malefic when joined with malefics.

    हिन्दी अर्थ

    अन्य गणना में वर्ण — ताम्र, श्वेत, अति-लाल, हरित, पीत, चित्र और कृष्ण। सूर्यादि के अधिष्ठातृ देवता क्रमशः — अग्नि, जल (वरुण), अग्निज स्कन्द, विष्णु (केशव), इन्द्र, शची और ब्रह्मा। स्वाभाविक पापग्रह — सूर्य, मंगल, शनि और क्षीण चन्द्र; तथा पापग्रहों से युत होने पर बुध भी पाप हो जाता है।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  6. 2.6 सत्यापित

    Gender of the planets; lords of the elements

    संस्कृत

    बुध सूर्य सुतौ नपुंसकाखौ शशि शुक्रौ युवती नराश्च शेषाः । शिखिभू ख पयो मरुद् गणानां वशिनो भूमि सुतादयः क्रमेण ॥ ६॥

    budhasūryasutaunapuṃsakākhau śaśiśukrau yuvatī narāśca śeṣāḥ | śikhibhūkhapayomarudgaṇānāṃ vaśino bhūmi sutādayaḥ krameṇa || 6 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    Mercury and Saturn are neuter; the Moon and Venus female; the rest male. Mars, Mercury, Jupiter, Venus and Saturn govern, respectively, fire, earth, ether, water and air.

    हिन्दी अर्थ

    बुध और शनि नपुंसक हैं; चन्द्र और शुक्र स्त्री; शेष पुरुष। मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि क्रमशः अग्नि, पृथ्वी, आकाश, जल और वायु के स्वामी हैं।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  7. 2.7 सत्यापित

    Caste (varṇa) and quality (guṇa) of the planets

    संस्कृत

    विप्रादितः शुक्र गुरू कुजार्कौ शशी बुधश्चेत्यसितान्त्यजानाम् । चन्द्रार्क जीवा ज्ञ सितौ कुजार्की यथा क्रमं सत्त्वरजस्तमांसि ॥ ७॥

    viprāditaḥ śukragurū kujārkau śaśī budhaścetyasitāntyajānām | candrārka jīvā jña sitau kujārkī yathā kramaṃ satvarajastamāṃsi || 7 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    By caste: Venus and Jupiter are Brahmins; Mars and the Sun Kṣatriyas; the Moon a Vaiśya; Mercury a Śūdra; and Saturn of the lowest class. By quality: the Moon, Sun and Jupiter are sāttvika; Mercury and Venus rājasika; Mars and Saturn tāmasika.

    हिन्दी अर्थ

    वर्ण से: शुक्र और गुरु ब्राह्मण; मंगल और सूर्य क्षत्रिय; चन्द्र वैश्य; बुध शूद्र; और शनि अन्त्यज। गुण से: चन्द्र, सूर्य और गुरु सात्त्विक; बुध और शुक्र राजसिक; मंगल और शनि तामसिक।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  8. 2.8 सत्यापित

    The Sun and the Moon described

    संस्कृत

    मधु पिङ्गलदृक् चतुरस्र तनुः पित्त प्रकृतिः सविताल्प कचः । तनु वृत्त तनुर्बहु वात कफः प्राज्ञश्च शशी मृदु वाक् शुभदृक् ॥ ८॥

    madhu piṅgaladṛk caturasra tanuḥ pitta prakṛtiḥ savitālpa kacaḥ | tanu vṛtta tanurbahu vāta kaphaḥ prājñaśca śaśī mṛdu vāk śubhadṛk || 8 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    The Sun has honey-brown eyes, a well-knit (square) frame, a bilious constitution and scanty hair. The Moon is of a thin, round body, of a windy-and-phlegmatic constitution, wise, soft in speech and pleasant to behold.

    हिन्दी अर्थ

    सूर्य के नेत्र मधु-सदृश भूरे, शरीर सुगठित (चतुरस्र), प्रकृति पित्त-प्रधान और केश अल्प होते हैं। चन्द्र पतले, गोल शरीर वाला, वात-कफ प्रकृति का, बुद्धिमान्, मृदुभाषी और देखने में सुखद है।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  9. 2.9 सत्यापित

    Mars and Mercury described

    संस्कृत

    क्रूरदृक् तरुण मूर्तिरुदारः पैत्तिकः सुचपलः कृश मध्यः । श्लिष्टवाक् सतत हास्यरुचिर्ज्ञः पित्त मारुत कफ प्रकृतिश्च ॥ ९॥

    krūradṛk taruṇamūrtirudāraḥ paittikaḥ sucapalaḥ kṛśamadhyaḥ | śliṣṭavāk satatahāsyarucirjñaḥ pittamārutakaphaprakṛtiśca || 9 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    Mars is fierce-eyed, of youthful form, generous, bilious, very fickle and slender-waisted. Mercury has coherent (or punning) speech, is fond of constant jesting, and is of a mixed (bile-wind-phlegm) constitution.

    हिन्दी अर्थ

    मंगल क्रूर-दृष्टि, युवा-रूप, उदार, पित्त-प्रकृति, अत्यन्त चंचल और कृश-कटि वाला है। बुध श्लिष्ट (संगत या द्व्यर्थक) वाणी वाला, सदा हास्य-प्रिय, और पित्त-वात-कफ (मिश्र) प्रकृति का है।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  10. 2.10 सत्यापित

    Jupiter and Venus described

    संस्कृत

    बृहत् तनुः पिङ्गल मूर्धजेक्षणो बृहस्पतिः श्रेष्ठ मतिः कफात्मकः । भृगुः सुखी कान्त वपुः सुलोचनः कफानिलात्मासित वक्र मूर्धजः ॥ १०॥

    bṛhattanuḥ piṅgala mūrdhajekṣaṇo bṛhaspatiḥ śreṣṭha matiḥ kaphātmakaḥ | bhṛguḥ sukhī kānta vapuḥ sulocanaḥ kaphānilātmāsita vakra mūrdhajaḥ || 10 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    Jupiter is large-bodied, with tawny hair and eyes, of excellent intellect and phlegmatic. Venus is happy, of charming form and fine eyes, of a phlegmatic-and-windy constitution, with light-coloured, curly hair.

    हिन्दी अर्थ

    गुरु विशाल-शरीर, पिंगल केश और नेत्रों वाला, श्रेष्ठ बुद्धि का, और कफ-प्रकृति का है। शुक्र सुखी, मनोहर देह और सुन्दर नेत्रों वाला, कफ-वात प्रकृति का, तथा श्वेत घुँघराले केशों वाला है।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  11. 2.11 सत्यापित

    Saturn described; the bodily constituents (dhātus)

    संस्कृत

    मन्दोऽलसः कपिलदृक् कृशदीर्घ गात्रः स्थूलद्विजः परुषरोम कचोऽनिलात्मा । स्नाय्वस्थ्यसृक् त्वग् अथ शुक्र वसे च मज्जा मन्दार्क चन्द्र बुध शुक्र सुरेज्य भौमाः ॥ ११॥

    mando’lasaḥ kapiladṛk kṛśadīrgha gātraḥ sthūladvijaḥ paruṣaroma kaco’nilātmā | snāyvasthyasṛk tvag atha śukra vase ca majjā mandārka candra budha śukra surejya bhaumāḥ || 11 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    Saturn is lazy, brown-eyed, of a thin, tall frame, with large teeth, coarse body-hair and a windy constitution. The bodily constituents (dhātus) — muscle/nerve, bone, blood, skin, semen and marrow — are governed respectively by Saturn, the Sun, the Moon, Mercury, Venus and Jupiter (with Mars).

    हिन्दी अर्थ

    शनि आलसी, कपिल (भूरे) नेत्रों वाला, कृश-दीर्घ शरीर, स्थूल दाँत, कठोर रोम और वात-प्रकृति का है। धातुएँ — स्नायु, अस्थि, रक्त, त्वचा, शुक्र और मज्जा — क्रमशः शनि, सूर्य, चन्द्र, बुध, शुक्र और गुरु (तथा मंगल) के अधीन हैं।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  12. 2.12 सत्यापित

    Places, objects, metals and seasons of the planets

    संस्कृत

    देवाम्ब्वग्नि विहार कोश शयन क्षित्युत्करेशाः क्रमात् । वस्त्रं स्थूलम् अभुक्तम् अग्निक हतं मध्यं दृढं स्फाटितम् । ताम्रं स्यान् मणि हेमयुक्ति रजतान्यर्काच्च मुक्तायसी । द्रेष्काणैः शिशिरादयः शशु रुच ज्ञ ग्वादिषूद्यत्सु वा ॥ १२॥

    devāmbvagnivihārakośaśayanakṣityutkareśāḥ kramāt | vastraṃ sthūlam abhuktam agnikahataṃ madhyaṃ dṛḍhaṃ sphāṭitam | tāmraṃ syān maṇihemayuktirajatānyarkācca muktāyasī | dreṣkāṇaiḥ śiśirādayaḥ śaśurucajñagvādiṣūdyatsuvā || 12 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    The Sun governs temples; the Moon watery places; Mars fire; Mercury sport and play; Jupiter the treasury; Venus the bedchamber; and Saturn refuse-heaps. The verse further assigns kinds of cloth, the metals (copper, gems-and-gold, silver, pearl, iron), and the seasons reckoned by drekkāṇa.

    हिन्दी अर्थ

    सूर्य देवालय का, चन्द्र जल-स्थान का, मंगल अग्नि का, बुध क्रीड़ा-स्थल का, गुरु कोष का, शुक्र शयन-कक्ष का, और शनि कूड़ा-स्थान का स्वामी है। श्लोक आगे वस्त्रों के प्रकार, धातुओं (ताम्र, मणि-स्वर्ण, रजत, मुक्ता, लोह) और द्रेष्काण द्वारा ऋतुओं का भी निर्धारण करता है।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  13. 2.13 सत्यापित

    The aspects (dṛṣṭi) of the planets

    संस्कृत

    त्रि दश त्रिकोण चतुरस्र सप्तमान्यवलोकयन्ति चरणाभिवृद्धितः । रविजामरेज्यरुधिराः परे च ये क्रमशो भवन्ति किल वीक्षणे अधिकाः ॥ १३॥

    tridaśatrikoṇacaturasrasaptamānyavalokayanti caraṇābhivṛddhitaḥ | ravijāmarejyarudhirāḥ pare ca ye kramaśo bhavanti kila vīkṣaṇe adhikāḥ || 13 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    Every planet aspects the 3rd and 10th, the trine (5th and 9th), the square (4th and 8th) and the 7th houses from itself, the gaze strengthening by quarters. Saturn aspects the 3rd and 10th, Jupiter the 5th and 9th, and Mars the 4th and 8th with special (full) force.

    हिन्दी अर्थ

    प्रत्येक ग्रह अपने से तीसरे-दसवें, त्रिकोण (पंचम-नवम), चतुरस्र (चतुर्थ-अष्टम) और सातवें भाव को देखता है, और यह दृष्टि चरणों (¼, ½, ¾, पूर्ण) से बढ़ती है। शनि तीसरे-दसवें को, गुरु पंचम-नवम को, और मंगल चतुर्थ-अष्टम को विशेष (पूर्ण) दृष्टि से देखते हैं।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  14. 2.14 सत्यापित

    Time-units and tastes of the planets

    संस्कृत

    अयन क्षण वासरऋतवो मासोऽर्धं च समाश्च भास्करात् । कटुक लवण तिक्त मिश्रिता मधुराम्लौ च कषायेत्यपि ॥ १४॥

    ayanakṣaṇavāsaraṛtavo māso’rdhaṃ ca samāśca bhāskarāt | kaṭuka lavaṇa tikta miśritā madhurāmlau ca kaṣāyetyapi || 14 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    From the Sun onward the planets signify periods of time: the half-year, the moment, the day, the season, the month, the fortnight and the year. Their tastes are: the Sun pungent, the Moon salty, Mars bitter, Mercury mixed, Jupiter sweet, Venus sour and Saturn astringent.

    हिन्दी अर्थ

    सूर्य से आरम्भ ग्रह काल-मानों के कारक हैं: अयन, क्षण, दिन, ऋतु, मास, पक्ष और वर्ष। रस: सूर्य कटु, चन्द्र लवण, मंगल तिक्त, बुध मिश्रित, गुरु मधुर, शुक्र अम्ल और शनि कषाय।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  15. 2.15 सत्यापित

    How natural friendship is reckoned

    संस्कृत

    जीवो जीव बुधौ सितेन्दु तनयौ व्यर्का विभौमाः क्रमाद् वीन्द्वर्का विकुजेन्द्विनाश्च सुहृदः केषां चिद् एवं मतम् । सत्योक्ते सुहृदस्त्रिकोण भवनात् स्वात् स्वान्त्यधी धर्मपाः स्वोच्चायुः सुखपाः स्वलक्षण विधेर्नान्यैर्विरोधाद् इति ॥ १५॥

    jīvo jīvabudhau sitendutanayau vyarkā vibhaumāḥ kramād vīndvarkā vikujendvināśca suhṛdaḥ keṣāṃcid evaṃ matam | satyokte suhṛdastrikoṇabhavanāt svāt svāntyadhīdharmapāḥ svoccāyuḥsukhapāḥ svalakṣaṇa vidhernānyairvirodhād iti || 15 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    The natural friends of a planet are the lords of the 2nd, 4th, 5th, 8th, 9th and 12th signs from its own mūlatrikoṇa, together with the lord of its exaltation sign; the remaining planets are its enemies. (Some also give an alternative list of friendships.)

    हिन्दी अर्थ

    किसी ग्रह के स्वाभाविक मित्र वे हैं जो उसकी मूलत्रिकोण राशि से दूसरे, चौथे, पाँचवें, आठवें, नवें और बारहवें भाव के स्वामी हों, तथा उसकी उच्च राशि का स्वामी; शेष ग्रह शत्रु हैं। (कुछ आचार्य मित्रता की भिन्न सूची भी देते हैं।)

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  16. 2.16 सत्यापित

    Natural friendships of the Sun, Moon, Mars and Mercury

    संस्कृत

    शत्रू मन्द सितौ समश्च शशिजो मित्राणि शेषारवेस् तीक्ष्णांशुर्हिमरश्मिजश्च सुहृदौ शेषाः समाः शीतगोः । जीवेन्दूष्ण कराः कुजस्य सुहृदो ज्ञोऽरिः सितार्की समौ मित्रे सूर्य सितौ बुधस्य हिमगुः शत्रुः समाश्चापरे ॥ १६॥

    śatrū manda sitau samaśca śaśijo mitrāṇi śeṣāraves-tīkṣṇāṃśurhimaraśmijaśca suhṛdau śeṣāḥ samāḥ śītagoḥ | jīvendūṣṇa karāḥ kujasya suhṛdo jño’riḥ sitārkī samau mitre sūrya sitau budhasya himaguḥ śatruḥ samāścāpare || 16 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    The Sun: Saturn and Venus are enemies, Mercury neutral, the rest friends. The Moon: the Sun and Mercury are friends, the rest neutral. Mars: Jupiter, the Moon and the Sun are friends, Mercury an enemy, Venus and Saturn neutral. Mercury: the Sun and Venus are friends, the Moon an enemy, the rest neutral.

    हिन्दी अर्थ

    सूर्य के: शनि और शुक्र शत्रु, बुध सम, शेष मित्र। चन्द्र के: सूर्य और बुध मित्र, शेष सम। मंगल के: गुरु, चन्द्र और सूर्य मित्र, बुध शत्रु, शुक्र और शनि सम। बुध के: सूर्य और शुक्र मित्र, चन्द्र शत्रु, शेष सम।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  17. 2.17 सत्यापित

    Natural friendships of Jupiter, Venus and Saturn

    संस्कृत

    सूरः सौम्य सितावरी रवि सुतो मध्योऽपरे त्वन्यथा सौम्यार्की सुहृदौ समौ कुज गुरू शुक्रस्य शेषावरी । शुक्रजौ सुहृदौ समः सुर गुरुः सौरस्य चान्ये अरयो ये प्रोक्ताः स्व त्रिकोण भादिषु पुनस्ते अमी मया कीर्तिताः ॥ १७॥

    sūreḥ saumyasitāvarī ravisuto madhyo’pare tvanyathā saumyārkī suhṛdau samau kujagurū śukrasya śeṣāvarī | śukrajñau suhṛdau samaḥ suraguruḥ saurasya cānye arayo ye proktāḥ svatrikoṇabhādiṣu punaste amī mayā kīrtitāḥ || 17 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    Jupiter: Mercury and Venus are enemies, Saturn neutral, the rest friends. Venus: Mercury and Saturn are friends, Mars and Jupiter neutral, the Sun and Moon enemies. Saturn: Venus and Mercury are friends, Jupiter neutral, the rest enemies. These are the natural friendships, reckoned from the mūlatrikoṇa as stated.

    हिन्दी अर्थ

    गुरु के: बुध और शुक्र शत्रु, शनि सम, शेष मित्र। शुक्र के: बुध और शनि मित्र, मंगल और गुरु सम, सूर्य और चन्द्र शत्रु। शनि के: शुक्र और बुध मित्र, गुरु सम, शेष शत्रु। ये स्वाभाविक मैत्री हैं, जो मूलत्रिकोण से कही गई हैं।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  18. 2.18 सत्यापित

    Temporary friendship; the fivefold scale

    संस्कृत

    अन्योन्यस्यधन व्ययाय सहज व्यापार बन्धु स्थितास्तत् काले सुहृदः स्व तुङ्ग भवने अप्येके अरयस्त्वन्यथा । द्व्येकानुक्त भपान् सुहृत् समरिपून् संचिन्त्य नैसर्गिकांस्तत् काले च पुनस्तु तान् अधिसुहृन् मित्रादिभिः कल्पयेत् ॥ १८॥

    anyonyasyadhanavyayāyasahajavyāpārabandhu-sthitāstat kāle suhṛdaḥ svatuṅgabhavane apyeke arayastvanyathā | dvyekānuktabhapān suhṛtsamaripūn saṃcintyanaisargikāṃstat kāle ca punastu tān adhisuhṛn mitrādibhiḥ kalpayet || 18 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    Planets standing in the 2nd, 12th, 11th, 3rd, 10th or 4th from each other are temporary (tātkālika) friends at that time; those elsewhere are temporary enemies. Combining the natural and the temporary relations yields the fivefold scale — great friend, friend, neutral, enemy and great enemy.

    हिन्दी अर्थ

    जो ग्रह परस्पर दूसरे, बारहवें, ग्यारहवें, तीसरे, दसवें या चौथे भाव में स्थित हों, वे उस समय (तात्कालिक) मित्र होते हैं; अन्यत्र शत्रु। स्वाभाविक और तात्कालिक सम्बन्धों को मिलाकर पाँच-भेद बनते हैं — अधिमित्र, मित्र, सम, शत्रु और अधिशत्रु।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  19. 2.19 सत्यापित

    Positional strength; directional strength (dig-bala)

    संस्कृत

    स्वोच्च सुहृत् स्व त्रिकोण नवांशैः स्थान बलं स्व गृहोपगतैश्च । दिक्षु बुधाङ्गिरसौ रवि भौमौ सूर्य सुतः सित शीत करौ च ॥ १९॥

    svoccasuhṛtsvatrikoṇanavāṃśaiḥ sthānabalaṃ svagṛhopagataiśca | dikṣu budhāṅgirasau ravibhaumau sūryasutaḥ sitaśītakarau ca || 19 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    A planet gains positional strength in its exaltation, a friend’s sign, its own trine, its own navāṁśa and its own house. For directional strength: Mercury and Jupiter are strong in the east (ascendant); the Sun and Mars in the south (10th); Saturn in the west (7th); and Venus and the Moon in the north (4th).

    हिन्दी अर्थ

    ग्रह अपनी उच्च राशि, मित्र-राशि, अपने त्रिकोण, अपने नवांश और अपने गृह में स्थान-बल पाता है। दिग्बल: बुध और गुरु पूर्व (लग्न) में; सूर्य और मंगल दक्षिण (दशम) में; शनि पश्चिम (सप्तम) में; शुक्र और चन्द्र उत्तर (चतुर्थ) में बलवान् होते हैं।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  20. 2.20 सत्यापित

    Motional strength (ceṣṭā-bala)

    संस्कृत

    उदग् अयने रवि शीत मयूखौ वक्र समागमगाः परिशेषाः । विपुल करा युधि चोत्तर संस्थाश्चेष्टित वीर्ययुता परिकल्प्याः ॥ २०॥

    udag ayane ravi śīta mayūkhau vakra samāgamagāḥ pariśeṣāḥ | vipula karā yudhi cottara saṃsthāśceṣṭita vīryayutā parikalpyāḥ || 20 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    The Sun and the Moon have motional strength in the northern course (uttarāyaṇa); the other planets when retrograde or in conjunction with the Moon. In a planetary war, the planet that is bright, large-rayed and to the north is reckoned to possess motional (ceṣṭā) strength.

    हिन्दी अर्थ

    सूर्य और चन्द्र उत्तरायण में चेष्टा-बल पाते हैं; शेष ग्रह वक्री होने पर या चन्द्र से युति में। ग्रह-युद्ध में जो ग्रह उज्ज्वल, विशाल-किरण और उत्तर की ओर हो, उसे चेष्टा-बल-युक्त माना जाता है।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  21. 2.21 सत्यापित

    Temporal strength (kāla-bala)

    संस्कृत

    निशि शशि कुज सौराः सर्वदा ज्ञोऽह्नि चान्ये । बहुल सित गताः स्युः क्रूर सौम्याः क्रमेण । द्व्ययनदिवस होरा मासपैः काल वीर्यं शरु बु गु शु च साद्या वृद्धितो वीर्यवन्तः ॥ २१॥

    niśi śaśikujasaurāḥ sarvadā jño’hni cānye | bahulasitagatāḥ syuḥ krūrasaumyāḥ krameṇa | dvyayanadivasahorāmāsapaiḥ kāla vīryaṃ śaru bu gu śu ca sādyā vṛddhito vīryavantaḥ || 21 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    The Moon, Mars and Saturn are strong by night; Mercury both day and night; the rest by day. Malefics are strong in the dark fortnight, benefics in the bright. Planets also gain temporal strength as lords of the current half-year, day, horā and month; and among them Saturn, Mars, Mercury, Jupiter and Venus are of increasing strength in that order.

    हिन्दी अर्थ

    चन्द्र, मंगल और शनि रात्रि में बलवान्; बुध दिन-रात दोनों में; शेष दिन में। पापग्रह कृष्ण पक्ष में, शुभग्रह शुक्ल पक्ष में बलवान्। ग्रह अपने अयन, दिन, होरा और मास के स्वामी होने पर काल-बल पाते हैं; इनमें शनि, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र इसी क्रम में उत्तरोत्तर बलवान् होते हैं।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

3 Viyoni-janma — non-human births (8)

  1. 3.1 सत्यापित

    When a non-human (viyoni) birth is indicated

    संस्कृत

    क्रूर ग्रहैः सुबलिभिर्विबलैश्च सौम्यैः क्लीबे चतुष्टय गते तदवेक्षणाद् वा । चन्द्रोपग द्वि रस भाग स मानरूपं सत्त्वं वदेद् यदि भवेत् स वियोनि संज्ञः ॥ १॥

    krūragrahaiḥ subalibhirvibalaiśca saumyaiḥ klībe catuṣṭayagate tadavekṣaṇād vā | candropaga dvi rasa bhāga sa mānarūpaṃ satvaṃ vaded yadi bhavet sa viyoni saṃjñaḥ || 1 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    When strong malefics and weak benefics occupy (or aspect) a neuter sign standing in an angle, and the Moon is suitably placed, the being born may be of non-human form; such a nativity is termed viyoni — a birth in a non-human womb.

    हिन्दी अर्थ

    जब बलवान् पापग्रह और निर्बल शुभग्रह किसी नपुंसक राशि में केन्द्रस्थ हों (अथवा उसे देखें), और चन्द्र उपयुक्त स्थान में हो, तो जन्म लेने वाला प्राणी अमानवीय रूप का हो सकता है; ऐसे जन्म को ‘वियोनि’ (अमानव-योनि में जन्म) कहते हैं।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  2. 3.2 सत्यापित

    A further indication of non-human birth

    संस्कृत

    पापा बलिनः स्व भागगाः पारक्ये विबलाश्च शोभनाः । लग्नं च वियोनि संज्ञकं दृष्ट्वात्रापि वियोनिम् आदिशेत् ॥ २॥

    pāpā balinaḥ sva bhāgagāḥ pārakye vibalāśca śobhanāḥ | lagnaṃ ca viyoni saṃjñakaṃ dṛṣṭvātrāpi viyonim ādiśet || 2 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    If the malefics are strong and in their own divisions while the benefics are weak and in others’ divisions, and the ascendant is a “non-human” sign, here too one should predict a birth in a non-human womb.

    हिन्दी अर्थ

    यदि पापग्रह बलवान् और अपने नवांश में हों, शुभग्रह निर्बल और अन्य के नवांश में हों, और लग्न ‘वियोनि’ राशि हो, तो यहाँ भी अमानव-योनि में जन्म कहना चाहिए।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  3. 3.3 सत्यापित

    The limbs of a quadruped, assigned to the signs

    संस्कृत

    क्रियः शिरो वक्र गले वृषोऽन्ये पादांशकं पृष्ठम् उरोऽथ पार्श्वे । कुक्षिस्त्वपानाङ्घ्र्याथ मेढ्र मुष्कौ स्फिक् पुच्छम् इत्याह चतुष्पदाङ्गे ॥ ३॥

    kriyaḥ śiro vakragale vṛṣo’nye pādāṃśakaṃ pṛṣṭham uro’tha pārśve | kukṣistvapānāṅghryātha meḍhramuṣkau sphik puccham ityāha catuṣpadāṅge || 3 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    For a quadruped, the parts of the body are assigned to the signs thus: Aries the head, Taurus the neck, and the others in turn the feet, the back, the chest, the sides, the belly, the anus and feet, the generative organs, the buttocks and the tail — so the limbs of a four-footed creature are described.

    हिन्दी अर्थ

    चतुष्पद प्राणी के अंग राशियों को इस प्रकार सौंपे जाते हैं: मेष सिर, वृष गर्दन, और शेष क्रमशः पैर, पीठ, वक्ष, पार्श्व, उदर, गुदा व पैर, जननांग, नितम्ब और पूँछ — इस प्रकार चतुष्पद के अंग कहे जाते हैं।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  4. 3.4 सत्यापित

    Colours, numbers and marks of the creature

    संस्कृत

    लग्नांशकाद् ग्रहयोगेक्षणाद् वा वर्णान् वदेद् बलयुक्ता द्वि योनौ । दृष्ट्या स मानान् प्रवदेत् स्व संख्ययारेखां वदेत् स्मर संस्थैश्च पृष्ठे ॥ ४॥

    lagnāṃśakād grahayogekṣaṇād vā varṇān vaded balayuktādviyonau | dṛṣṭyā sa mānān pravadet sva saṃkhyayārekhāṃ vadet smara saṃsthaiśca pṛṣṭhe || 4 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    In a non-human birth, describe the creature’s colours from the strong navāṁśa of the ascendant and from the conjunctions and aspects of planets; from the aspecting planets tell the number of like beings, and by their count the streaks or marks; planets in the seventh indicate marks upon the back.

    हिन्दी अर्थ

    अमानव जन्म में, बलवान् लग्न-नवांश तथा ग्रहों की युति-दृष्टि से प्राणी के वर्ण बताने चाहिए; देखने वाले ग्रहों से समान प्राणियों की संख्या, और उनकी गिनती से रेखाओं/चिह्नों की संख्या; तथा सप्तम-स्थ ग्रहों से पीठ पर के चिह्न बताने चाहिए।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  5. 3.5 सत्यापित

    Birds — of land and water

    संस्कृत

    खगे दृकाणे बलसंयुतेन वा ग्रहेणयुक्ते चरभांशकोदये । बुधांशके वा विहगाः स्थलांबुजाः शनैश्चरेन्द्वीक्षणयोग संभवाः ॥ ५॥

    khage dṛkāṇe balasaṃyutena vā graheṇayukte carabhāṃśakodaye | budhāṃśake vā vihagāḥ sthalāṃbujāḥ śanaiścarendvīkṣaṇayoga saṃbhavāḥ || 5 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    When a “bird” drekkāṇa rises joined with a strong planet, or the navāṁśa of a movable sign or of Mercury ascends, the creature is a bird — of the land or of the water — arising through the aspect or conjunction of Saturn and the Moon.

    हिन्दी अर्थ

    जब कोई ‘पक्षी’ द्रेष्काण बलवान् ग्रह से युत उदय हो, अथवा चर राशि का या बुध का नवांश उदय हो, तो प्राणी पक्षी होता है — थल या जल का — जो शनि और चन्द्र की दृष्टि या युति से उत्पन्न होता है।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  6. 3.6 सत्यापित

    Trees — of land and water

    संस्कृत

    होरेन्दु सूरि रविभिर्विबलैस्तरुणां तोये स्थले तरु भवांश कृतः प्रभेदः । लग्नाद् ग्रहः स्थल जलऋक्ष पतिस्तु यावांस्तावन्तैव तरवः स्थल तोय जाताः ॥ ६॥

    horendusūriravibhirvibalaistarūṇāṃ toye sthale tarubhavāṃśakṛtaḥ prabhedaḥ | lagnād grahaḥ sthalajalaṛkṣapatistu yāvāṃstāvantaiva taravaḥ sthala toya jātāḥ || 6 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    When the horā-lord, the Moon, Jupiter and the Sun are weak, the birth is as a tree; whether it grows on land or in water is decided by the navāṁśa. As many planets as relate to the lord of a land- or water-sign from the ascendant, so many trees are produced on land or in the water.

    हिन्दी अर्थ

    जब होरा-स्वामी, चन्द्र, गुरु और सूर्य निर्बल हों, तो जन्म वृक्ष के रूप में होता है; वह थल का है या जल का, यह नवांश से निश्चित होता है। लग्न से थल या जल राशि के स्वामी से जितने ग्रह सम्बन्धित हों, उतने ही वृक्ष थल या जल में उत्पन्न होते हैं।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  7. 3.7 सत्यापित

    Which planet produces which kind of tree

    संस्कृत

    अन्तः साराञ् जनयति रविर्दुर्भगान् सूर्य सूनुः क्षीरोपेतांस्तुहिन किरणः कण्टकाढ्यांश्च भौमः । वाग् ईश ज्ञौ स फल विफलान् पुष्प वृक्षांश्च शुक्रः स्निग्धान् इन्दुः कटुक विटपान् भूमि पुत्रश्च भूयः ॥ ७॥

    antaḥ sārāñ janayati ravirdurbhagān sūrya sūnuḥ kṣīropetāṃstuhina kiraṇaḥ kaṇṭakāḍhyāṃśca bhaumaḥ | vāg īśa jñau sa phala viphalān puṣpa vṛkṣāṃśca śukraḥ snigdhān induḥ kaṭuka viṭapān bhūmi putraśca bhūyaḥ || 7 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    The Sun produces trees with hard, pithy cores; Saturn barren or ill-favoured ones; the Moon milky (sap-bearing) ones; Mars thorny ones; Jupiter and Mercury fruit-bearing and fruitless ones; Venus flowering trees; the Moon glossy ones; and Mars, again, pungent-shrubbed plants.

    हिन्दी अर्थ

    सूर्य कठोर सार वाले वृक्ष उत्पन्न करता है; शनि बंजर या हीन; चन्द्र दूधिया (क्षीरयुक्त); मंगल काँटेदार; गुरु और बुध फलदार तथा निष्फल; शुक्र पुष्प-वृक्ष; चन्द्र चिकने; और मंगल पुनः तीक्ष्ण (कटु) झाड़ीदार पौधे।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

  8. 3.8 सत्यापित

    Quality of the tree; how many arise

    संस्कृत

    शुभो शुभऋक्षे रुचिरं कुभूमिजं करोति वृक्षं विपरीतम् अन्यथा परांशके यावति विच्युतः स्वकाद् भवन्ति तुल्यास्तरवस्तथा विधाः ॥ ८॥

    śubho’śubhaṛkṣe ruciraṃ kubhūmijaṃ karoti vṛkṣaṃ viparītam anyathā parāṃśake yāvati vicyutaḥ svakād bhavanti tulyāstaravastathā vidhāḥ || 8 ||

    अंग्रेज़ी अर्थ

    A benefic in an inauspicious sign makes a lovely tree even on poor soil; a malefic the reverse. By however many divisions a planet has strayed from its own into another’s navāṁśa, so many similar trees of that kind arise.

    हिन्दी अर्थ

    अशुभ राशि में शुभग्रह हीन भूमि पर भी सुन्दर वृक्ष उत्पन्न करता है; पापग्रह इसके विपरीत। ग्रह अपने नवांश से दूसरे के नवांश में जितने अंश गया हो, उतने ही उसी प्रकार के समान वृक्ष उत्पन्न होते हैं।

    स्रोत: Sanskrit (Devanāgarī): sanskritdocuments.org (Varāhamihira), cross-checked against the ITRANS master and, in IAST, against wisdomlib (M. D. Neely ed.). English & Hindi meanings by Vedic Horā — for review.

4 Niṣeka & janma — conception and birth (48)

  1. 4.1 संस्कृत

    संस्कृत

    कुजेन्दु हेतुः प्रतिमासम् आर्तवं गते तु पीडऋक्षम् अनुष्णदिधितौ । अतोऽन्यथास्थे शुभ पुंग्रहेक्षिते नरेण संयोगम् उपैति कामिनी ॥ १॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  2. 4.2 संस्कृत

    संस्कृत

    यथास्तराशिर्मिथुनं समेति तथैव वाच्यो मिथुन प्रयोगः । असद् ग्रहालोकित संयुते अस्ते सरोषेष्टैः स विलास हासः ॥ २॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  3. 4.3 संस्कृत

    संस्कृत

    रवीन्दु शुक्रावनिजैः स्वभागगैर्गुरौ त्रिकोणोदय संस्थितेऽपि वा । भवत्यपत्यं हि विबीजिनाम् इमे करा हिमांशोर्विदृशाम् इवाफलाः ॥ ३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  4. 4.4 संस्कृत

    संस्कृत

    दिवाकरेन्द्वोः स्मरगौ कुजार्कजौ गद प्रदा पुङ्गलयोषितोस्तदा । व्यय स्वगौ मृत्युकरौ युतौ तथा तदेकदृष्ट्या मरणाय कल्पितौ ॥ ४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  5. 4.5 संस्कृत

    संस्कृत

    दिवार्क शुक्रौ पितृ मातृ संज्ञितौ शनैश्चरेन्दू निशि तद्विपर्ययात् । पितृव्य मातृ स्वसृ संज्ञितौ च तावथौजयुग्मऋक्ष गतौ तयोः शुभौ ॥ ५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  6. 4.6 संस्कृत

    संस्कृत

    अभिलषद्बिरुदयऋक्षम् असद्भिर्मरणम् एति शुभदृष्टिम् अयाते । उदयराशि सहिते च यमे स्त्री विगलितोडु पति भू सुतदृष्टे ॥ ६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  7. 4.7 संस्कृत

    संस्कृत

    पापद्वय मध्य संस्थितौ लग्नेन्दू न च सौम्य वीक्षितौ । युगपत् पृथग् एव वा वदेन् नारी गर्भयुता विपद्यते ॥ ७॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  8. 4.8 संस्कृत

    संस्कृत

    क्रूरे शशिनश्चतुर्थगे लग्नाद् वा निधनाश्रिते कुजे । बन्ध्वन्त्यगयोः क्षीणेन्दौ निधनाय पूर्ववत् ॥ ८॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  9. 4.9 संस्कृत

    संस्कृत

    उदयास्तगयोः कुजार्कयोर्निधनं शस्त्र कृतं वदेत् तथा । मासाधिपतौ निपीडिते तत् काले स्रवणं समादिशेत् ॥ ९॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  10. 4.10 संस्कृत

    संस्कृत

    शशाङ्क लग्नोपगतैः शुभ ग्रहैस्त्रिकोण जायार्थ सुखास्पद स्थितैः । तृतीय लाभऋक्ष गतैश्च पापकैः सुखी तु गर्भो रविणा निरीक्षितः ॥ १०॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  11. 4.11 संस्कृत

    संस्कृत

    ओजऋक्षे पुरुषांशकेषु बलिभिर्लग्नार्क गुर्विन्दुभिः पुंजन्म प्रवदेत् समांशक गतैर्युग्मेषु तैर्योषितः । गुर्वर्कौ विषमे नरं शशि सितौ वक्रश्च युग्मे स्त्रियम् । द्व्यङ्गस्थ बुध वीक्षणाच्च यमलौ कुर्वन्ति पक्षे स्वके ॥ ११॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  12. 4.12 संस्कृत

    संस्कृत

    विहाय लग्नं विषमऋक्ष संस्थः सौरोऽपि पुंजन्म करो विलग्नात् । प्रोक्त ग्रहाणाम् अवलोक्य वीर्यं वाच्यः प्रसूतौ पुरुषोऽङ्गना वा ॥ १२॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  13. 4.13 संस्कृत

    संस्कृत

    अन्योन्यं यदि पश्यतः शशि रवी यद्यर्कि सौम्यावपि वक्रो वा समगं दिनेशम् असमे चन्द्रोदयौ चेत् स्थितौ । युग्मौजऋक्ष गतावपीन्दु शशिजौ भूम्यात्मजेनेक्षितौ पुम्भावे सित लग्न शीत किरणाः षट् क्लीबयोगाः स्मृताः ॥ १३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  14. 4.14 संस्कृत

    संस्कृत

    युग्मे चन्द्र सितौ तथौज भवने स्युर्ज्ञार जीवोदया लग्नेन्दू नृ निरीक्षितौ च समगौ युग्मेषु वा प्राणिनः । कुर्युर्ते मिथुनं ग्रहोदय गतान् द्व्यङ्गांशकान् पश्यति स्वांशे ज्ञे त्रितयं ज्ञगांशक वशाद् युग्मं त्वमिश्रैः समम् ॥ १४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  15. 4.15 संस्कृत

    संस्कृत

    धनुर्धरस्यान्त्यगते विलग्ने ग्रहैस्तदंशोपगतैर्बलिष्ठैः । ज्ञेनार्किणा वीर्ययुतेनदृष्टैः सन्ति प्रभूतापि कोश संस्थाः ॥ १५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  16. 4.16 संस्कृत

    संस्कृत

    कलल घनाङ्कुरास्थि चर्माङ्गज चेतनताः सित कुज जीव सूर्य चन्द्रार्कि बुधाः परतः । उदयप चन्द्र सूर्य नाथाः क्रमशो गदिता भवन्ति शुभाशुभं च मासाधिपतेः सदृशम् ॥ १६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  17. 4.17 संस्कृत

    संस्कृत

    त्रिकोणगे ज्ञे विबलैस्तथा परैर्मुखाङ्घ्रि हस्तैर्द्विगुणस्तदा भवेत् । अवाग् गवीन्दावशुभैर्भ संधिगैः शुभेक्षितश्चेत् कुरुते गिरं चिरात् ॥ १७॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  18. 4.18 संस्कृत

    संस्कृत

    सौम्यऋक्षांशे रविजरुधिरौ चेत् स दन्तोऽत्र जातः कुब्जः स्वऋक्षे शशिनि तनुगे मन्द माहेयदृष्टे । पङ्गुर्मीने यम शशि कुजैर्वीक्षिते लग्न संस्थे संधौ पापे शशिनि च जडः स्यान् न चेत् सौम्यदृष्टः ॥ १८॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  19. 4.19 संस्कृत

    संस्कृत

    सौर शशाङ्कदिवा करदृष्टे वामनको मकरान्त्य विलग्ने । धी नवमोदयगैश्च दृकाणैः पापयुतैरभुजाङ्घ्रि शिराः स्यात् ॥ १९॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  20. 4.20 संस्कृत

    संस्कृत

    रवि शशि युते सिंहे लग्ने कुजार्कि निरीक्षिते नयनरहितः सौम्यासौम्यैः स बुद्बुद लोचनः । व्यय गृह गतश्चन्द्रो वामं हिनस्त्यपरं रविर्न शुभ गदिता योगा याप्या भवन्ति शुभेक्षिताः ॥ २०॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  21. 4.21 संस्कृत

    संस्कृत

    तत् कालम् इन्दु सहितो द्वि रसांशको यस्तत् तुल्यराशि सहिते पुरतः शशाङ्के । यावान् उदेति दिनरात्रि स मान भागस्तावद् गते दिन निशोः प्रवदन्ति जन्म ॥ २१॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  22. 4.22 संस्कृत

    संस्कृत

    उदयति मृदु भांशे सप्तमस्थे च मन्दे यदि भवति निषेकः सूतिरब्द त्रयेण । शशिनि तु विधिरेष द्वादशे अब्दे प्रकुर्यान् निगदितम् इह चिन्त्यं सूति काले अपि युक्त्या ॥ २२॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  23. 4.1 संस्कृत

    संस्कृत

    पंचमोऽध्याय जन्मविधि पितुर्जातः परोक्षस्य लग्नम् इन्दावपश्यति । विदेशस्थस्य चर भे मध्याद् भ्रष्टे दिवा करे ॥ १॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  24. 4.2 संस्कृत

    संस्कृत

    उदयस्थेऽपि वा मन्दे कुजे वास्तं समागते स्थिते वान्तः क्षपा नाथे शशाङ्क सुत शुक्रयोः ॥ २॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  25. 4.3 संस्कृत

    संस्कृत

    शशाङ्के पाप लग्ने वा वृश्चिकेश त्रि भागगे । शुभैः स्वाय स्थितैर्जातः सर्पस्तद्वेष्टितोऽपि वा ॥ ३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  26. 4.4 संस्कृत

    संस्कृत

    चतुष्पाद गते भानौ शेषैर्वीर्य समन्वितैः । द्वि तनुस्थैश्च यमलौ भवतः कोश वेष्टितौ ॥ ४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  27. 4.5 संस्कृत

    संस्कृत

    छागे सिंहे वृषे लग्ने तत्स्थे सौरे अथ वा कुजे । राश्यंश सदृशे गात्रे जायते नाल वेष्टितः ॥ ५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  28. 4.6 संस्कृत

    संस्कृत

    न लग्नम् इन्दुं च गुरुर्निरीक्षते न वा शशाङ्कं रविणा समागतम् । स पापकोऽर्केणयुतोऽथ वा शशी परेण जातं प्रवदन्ति निश्चयात् ॥ ६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  29. 4.7 संस्कृत

    संस्कृत

    क्रूरऋक्ष गतावशोभनौ सूर्याद् द्यून नवात्मज स्थितौ । बद्धस्तु पिता विदेशगः स्वे वा राशि वशाद् अथो पथि ॥ ७॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  30. 4.8 संस्कृत

    संस्कृत

    पूर्णे शशिनि स्वराशिगे सौम्ये लग्न गते शुभे सुखे । लग्ने जलजे अस्तगे अपि वा चन्द्रो पोत गता प्रसूयते ॥ ८॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  31. 4.9 संस्कृत

    संस्कृत

    आप्योदयम् आप्यगः शशी सम्पूर्णः समवेक्षते अथ वा । मेषूरण बन्धु लग्नगः स्यात् सूतिः सलिले न संशयः ॥ ९॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  32. 4.10 संस्कृत

    संस्कृत

    उदयोडुपयोर्व्यय स्थिते गुप्त्यां पाप निरीक्षिते यमे । अलि कर्कि युते विलग्नगे सौरे शीत करेक्षिते वटे ॥ १०॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  33. 4.11 संस्कृत

    संस्कृत

    मन्दे अब्ज गते विलग्नगे बुध सूर्येन्दु निरीक्षिते क्रमात् । क्रीडा भवने सुरालये सोखर भूमिषु च प्रसूयते ॥ ११॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  34. 4.12 संस्कृत

    संस्कृत

    नृ लग्नगं प्रेक्ष्य कुजः श्मशाने रम्ये सितेन्दू गुरुरग्निहोत्रे । रविर्नरेन्द्रामरगो कुलेषु शिल्पालये ज्ञः प्रसवं करोति ॥ १२॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  35. 4.13 संस्कृत

    संस्कृत

    राश्यंश स मान गोचरे मार्गे जन्म चरे स्थिरे गृहे । स्वऋक्षांश गते स्व मन्दिरे बलयोगात् फलम् अंशकऋक्षयोः ॥ १३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  36. 4.14 संस्कृत

    संस्कृत

    आरार्कजयोस्त्रिकोणगे चन्द्रे अस्ते च विसृज्यते अंबया । दृष्टे अमरराज मन्त्रिणा दीर्घायुः सुख भाक् च स स्मृतः ॥ १४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  37. 4.15 संस्कृत

    संस्कृत

    पापेक्षिते तुहिनगावुदये कुजे अस्ते त्यक्तो विनश्यति कुजार्कजयोस्तथाये । सौम्ये अपि पश्यति तथा विध हस्तम् एति सौम्येतरेषु पर हस्त गतोऽप्यनायुः ॥ १५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  38. 4.16 संस्कृत

    संस्कृत

    पितृमातृगृहेषु तद्बलात् तरु शालादिषु नीचगैः शुभः । यदि नैक गतैस्तु वीक्षितौ लग्नेन्दू विजने प्रसूयते ॥ १६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  39. 4.17 संस्कृत

    संस्कृत

    मन्दऋक्षांशे शशिनि हिबुके मन्ददृष्टे अब्जगे वा । तद् युक्ते वा तमसि शयने नीच संस्थैश्च भूमौ । यद् वद् राशिर्व्रजति हरिजं गर्भ मोक्षस्तु तद्वत् पापैश्चन्द्रात् स्मर सुख गतैः क्लेशम् आहुर्जनन्याः ॥ १७॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  40. 4.18 संस्कृत

    संस्कृत

    स्नेहः शशाङ्काद् उदयाच्च वर्तिर्दीपोऽर्कयुक्तऋक्ष वशाच्चराद्यः । द्वारं च तद्वास्तुनि केन्द्र संस्थैर्ज्ञेयं ग्रहैः वीर्य समन्वितैर्वा ॥ १८॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  41. 4.19 संस्कृत

    संस्कृत

    जीर्णं संस्कृतम् अर्कजे क्षिति सुते दग्धं नवं शीतगौ काष्ठाढ्यं न दृढं रवौ शशि सुते तन् नैक शिल्प्युद्भवम् रम्यम् । चित्रयुतं नवं च भृगुजे जीवे दृढं मन्दिरं चक्रस्थैश्च यथोपदेशरचनां सामन्त पूर्वां वदेत् ॥ १९॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  42. 4.20 संस्कृत

    संस्कृत

    मेष कुलीर तुलालि गटैः प्रागुत्तरतो गुरु सौम्य गृहेषु । पश्चिमतश्च वृषेण निवासो दक्षिण भाग करौ मृग सिंहौ ॥ २०॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  43. 4.21 संस्कृत

    संस्कृत

    प्राच्यादि गृहे क्रियादयो द्वौ द्वौ कोण गता द्वि मूर्तयः । शय्यास्वपि वास्तु वद् वदेत् पादैः षट् त्रि नवान्त्य संस्थितैः ॥ २१॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  44. 4.22 संस्कृत

    संस्कृत

    चन्द्र लग्नान्तर गतैर्ग्रहैः स्युरुपसूतिकाः । बहिरन्तर चक्राद् अर्धे दृश्याद्ऱ्श्ये अन्यथा परैः ॥ २२॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  45. 4.23 संस्कृत

    संस्कृत

    लग्न नवांशप तुल्य तनुः स्याद् वीर्ययुत ग्रह तुल्य वपुर्वा । चन्द्र समेत नवांशप वर्णः कादि विलग्न विभक्त भ गात्रः ॥ २३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  46. 4.24 संस्कृत

    संस्कृत

    कं दृक् श्रोत्र नसा कपोल हनवो वक्त्रं च होरादयस्ते कण्ठांसक बाहु पार्श्व हृदय क्रोडानि नाभिस्ततः । बस्तिः शिश्न गुदे ततश्च वृषणावूरू ततो जानुनी । जङ्घाङ्घ्रीत्युभयत्र वामम् उदितैर्द्रेष्काण भागैस्त्रिधा ॥ २४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  47. 4.25 संस्कृत

    संस्कृत

    तस्मिन् पापयुतं व्रणे शुभयुते दृष्टे च लक्ष्मादिशेत् स्वऋक्षांशे स्थिर संयुतेषु सहजः स्याद् अन्यथाङ्गतुकः । मन्देश्मानिलजोऽग्नि शास्त्र विषजो भौमे बुधे भू भवः सूर्ये काष्ठ चतुष्पदेन हिमगौ श ृङ्ग्यब्जजोऽन्यैः शुभम् ॥ २५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  48. 4.26 संस्कृत

    संस्कृत

    समनुपतिता यस्मिन् भागे त्रयः स बुधा ग्रहा भवति नियमात् तस्यावाप्तिः शुभेष्वशुभेषु वा । व्रण कृद् अशुभः षष्ठे देहे तनोर्भ समाश्रिते तिलकम् अशकृद् दृष्टः सौम्यैर्युतश्च स लक्ष्मवान् ॥ २६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

5 Ariṣṭa — early dangers (12)

  1. 5.1 संस्कृत

    संस्कृत

    संध्यायां हिम दीधिति होरा पापैर्भान्त गतैर्निधनाय । रत्येकं शशि पाप समेतैः केन्द्रैर्वा स विनाशम् उपैते ॥ १॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  2. 5.2 संस्कृत

    संस्कृत

    चक्रस्य पूर्वापर भागगेषु क्रूरेषु सौम्येषु च कीट लग्ने । क्षिप्रं विनाशं समुपैति जातः पपैर्विलग्नास्तमयाभितश्च ॥ २॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  3. 5.3 संस्कृत

    संस्कृत

    पापावुदयास्त गतौ क्रूरेणयुतश्च शशी । दृष्टश्च शुभैर्न यदा मृत्युश्च भवेद् अचिरात् ॥ ३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  4. 5.4 संस्कृत

    संस्कृत

    क्षीणे हिमगौ व्ययगौ पापैरुदयाष्टमगैः । केन्द्रेषु शुभाश्च न चेत् क्षिप्रं निधनं प्रवदेत् ॥ ४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  5. 5.5 संस्कृत

    संस्कृत

    क्रूरेण संयुतः शशी स्मरान्त्य मृत्यु लग्नगः । कण्टकाद् बहिः शुभैरवीक्षितश्च मृत्युदः ॥ ५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  6. 5.6 संस्कृत

    संस्कृत

    शशिन्यरि विनाशगे निधनम् आशु पापेक्षिते शुभैरथ समाष्टकदलम् अतश्च मिश्रैः स्थितिः । असद्भिरवलोकिते बलिभिरत्र मासं शुभे कलत्र सहिते च पाप विजिते विलग्नाधिपे ॥ ६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  7. 5.7 संस्कृत

    संस्कृत

    लग्ने क्षीणे शशिनि निधनं रन्ध्र केन्द्रेषु पापैः पापान्तस्थे निधन हिबुक द्यून संस्थे च चन्द्रे एवं लग्ने भवति मदन च्छिद्र संस्थैश्च पापैर्मात्रा सार्द्धं यदि न च शुभैर्वीक्षितः शक्ति भ्ऱ्द्भिः ॥ ७॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  8. 5.8 संस्कृत

    संस्कृत

    राश्यन्तगे सद्भिरवीक्ष्यमाणे चन्द्रे त्रिकोणोपगतैश्च पापैः । प्राणैः प्रयात्याशु शिशुर्वियोगम् अस्ते च पापैस्तुहिनांशु लग्ने ॥ ८॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  9. 5.9 संस्कृत

    संस्कृत

    अशुभ सहिते ग्रस्ते चन्द्रे कुजे निधनाश्रिते जननि सुतयोर्मृत्युर्लग्ने रवौ तु स शस्त्रजः । उदयति रवौ शीतांशौ वा त्रिकोण विनाशगैर्निधनम् अशुभैर्वीर्योपेतैः शुभैर्न युतेक्षिते ॥ ९॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  10. 5.10 संस्कृत

    संस्कृत

    असितरवि शशाङ्क भूमिजैर्व्यय नवमोदय नैधनाश्रितैः । भवति मरणम् आशु देहिनां यदि बलिना गुरुणा न वीक्षिताः ॥ १०॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  11. 5.11 संस्कृत

    संस्कृत

    सुत मदन नवान्त्य लग्नरन्ध्रेष्वशुभयुतो मरणाय शीतरश्मिः । भृगुसुत शशिपुत्र देवपूज्यैर्यदि बलिभिर्न युतोऽवलोकितो वा ॥ ११॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  12. 5.12 संस्कृत

    संस्कृत

    योगे स्थानं गतवति बलिनश्चन्द्रे स्वं वा तनु गृहम् अथ वा । पापैर्दृष्टे बलवति मरणं वर्षस्यान्तः किल मुनि गदितम् ॥ १२॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

6 Ariṣṭa-bhaṅga — their cancellation (14)

  1. 6.1 संस्कृत

    संस्कृत

    मय यवन मणित्थ शक्ति पूर्वैर्दिवस करादिषु वत्सराः प्रदिष्टाः । नव तिथि विषयाश्वि भूतरुद्रदश सहिता दशभिः स्व तुङ्ग भेषु ॥ १॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  2. 6.2 संस्कृत

    संस्कृत

    नीचे अतोऽर्धं ह्रसति हि ततश्चान्तरस्थे अनुपातो होरा त्वंश प्रतिमम् अपरे राशि तुल्यं वदन्ति । हित्वा वक्रं रिपु ग्रह गतैर्हीयते स्व त्रि भागः सूर्योच्छिन्नद्युतिषु च दलं प्रोजिह्य शुक्रार्क पुत्रौ ॥ २॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  3. 6.3 संस्कृत

    संस्कृत

    सर्वार्ध त्रि चरण पञ्च षष्ट भागाः क्षीयन्ते व्यय भवनाद् असत्सु वामम् । सत्स्वर्धं ह्रसति तथाइकराशिगानाम् एकांशं हरति बली तथाह सत्यः ॥ ३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  4. 6.4 संस्कृत

    संस्कृत

    सार्धोदितोदित नवांश हतात् समस्ताद् भागोऽष्टयुक्त शत संख्यम् उपैतो नाशम् । क्रूरे विलग्न सहिते विधिना त्वनेन सौम्येक्षिते दलम् अतः प्रलयं प्रयाति ॥ ४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  5. 6.5 संस्कृत

    संस्कृत

    समा षष्टिर्द्विघ्ना मनुज करिणां पज़्च च निशा हयानां द्वात्रिंशत् खर करभयोः पञ्चक कृतिः । विरूपा साप्यायुर्वृष महिषयोर्द्वादश शुनां स्मृतं छागादीनां दशक सहिताः षट् च परम ॥ ५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  6. 6.6 संस्कृत

    संस्कृत

    अनिमिष परमांशके विलग्ने शशि तनये गवि पज़्च वर्ग लिप्ते । भवति हि परमायुषः प्रमाणं यदि सकलः सहिताः स्व तुङ्ग भेषु ॥ ६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  7. 6.7 संस्कृत

    संस्कृत

    आयुर्दायं विष्णु गुप्तोऽपि चैवं देव स्वामी सिद्धसेनश्च चक्रे । दोषश्चैषां जायते अष्टावरिष्टं हित्वा नायुर्विंशतेः स्याद् अधस्तात् ॥ ७॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  8. 6.8 संस्कृत

    संस्कृत

    यस्मिन् योगे पूर्णम् आयुः प्रदिष्टं तस्मिन् प्रोक्तं चक्र वर्तित्वम् अन्यैः प्रत्यक्षोऽयं दोषः परोऽपि जीवत्यायुः पूर्णम् अर्थैर्विनापि ॥ ८॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  9. 6.9 संस्कृत

    संस्कृत

    स्वमतेन किलाह जीव शर्मा ग्रहदायं परमायुसः स्वरांशम् । ग्रह भुक्त नवांशराशि तुल्यं बहु साम्यं समुपैति सत्य वाक्यम् ॥ ९॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  10. 6.10 संस्कृत

    संस्कृत

    सत्योक्ते ग्रहम् इष्टं लिप्ती कृत्वा शतद्वयेनाप्तम् । मण्डल भाग विशुद्धे अब्दाः स्युः शेषात् तु मासाद्याः ॥ १०॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  11. 6.11 संस्कृत

    संस्कृत

    स्व तुङ्ग वक्रोपगतैस्त्रिसंगुणं द्विरुत्तम स्वांशक भ त्रिभ्हागगैः । इयान् विशेषस्तु भदत्त भाषिते स मानम् अन्यत् प्रथमे अप्युदीरितम् ॥ ११॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  12. 6.12 संस्कृत

    संस्कृत

    किं त्वत्र भांश प्रतिमं ददाति वीर्यान्विताराशि समं च होरा । क्रूरोदये च उपचयः स नात्र कार्यं च नाब्दैः प्रथमोपदिष्टैः ॥ १२॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  13. 6.13 संस्कृत

    संस्कृत

    सत्योपदेशो वरम् अत्र किन्तु कुर्वन्त्ययोग्यं बहु वर्गणाभिः । आचार्यकत्वं च बहु घ्नतायाम् एकं तु यद् भूरि तदेव कार्यम् ॥ १३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  14. 6.14 संस्कृत

    संस्कृत

    गुरु शशि सहिते कुलीर लग्ने शशि तनये भृगुजे च केन्द्रयाते । भवरिपु सहजोपगैश्च शेषैरमितम् इहायुरनुक्रमाद् विना स्यात् ॥ १४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

7 Āyurdāya — length of life (23)

  1. 7.1 संस्कृत

    संस्कृत

    उदयरवि शशाङ्क प्राणि केन्द्रादि संस्थाः । प्रथम वयसि मध्ये अन्त्ये च दद्युः फलानि । न हि न फल विपाकः केन्द्र संस्थाद्य भावे भवति हि फल पक्तिः पूर्वम् आपोक्लिमे अपि ॥ १॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  2. 7.2 संस्कृत

    संस्कृत

    आयुः कृतं येन हि यत् तदेव कल्प्या दश सा प्रबलस्य पूर्वाम् । साम्ये बहूनां बहु वर्षदस्य तेषां च साम्ये प्रथमोदितस्य ॥ २॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  3. 7.3 संस्कृत

    संस्कृत

    एकऋक्षगोऽर्धम् अपहृत्य ददाति तु स्वं त्र्यंशं त्रिकोण गृहगः स्मरगः स्वरांशम् । पादं फलस्य चतुरस्र गतः स होरस्त्वेवं परस्पर गताः परिपाचयन्ति ॥ ३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  4. 7.4 संस्कृत

    संस्कृत

    स्थानान्यथाइतानि स वर्णयित्वा सर्वाण्यधश्छेद विवर्जितानि । दशाब्द पिण्डे गुणका यथांशं छेदस्तदैक्येन दशाप्रभेदः ॥ ४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  5. 7.5 संस्कृत

    संस्कृत

    सम्यग् बलिनः स्व तुङ्ग भागे सम्पूर्णा बल वर्जितस्यरिक्ता । नीचांश गतस्य शत्रु भागे ज्ञेयानिष्ट फलादशा प्रसूतौ ॥ ५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  6. 7.6 संस्कृत

    संस्कृत

    भ्रष्टस्य तुङ्गाद् अवरोहि संज्ञा मध्या भवेत् सा सुहृद् उच्च भागे । अरोहिणी निम्न परिच्युतस्य नीचारि भांशेष्वधमा भवे सा ॥ ६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  7. 7.7 संस्कृत

    संस्कृत

    नीचारि भांशे समवस्थितस्य शस्ते गृहे गृहे मिश्र फला प्रदिष्टा । संज्ञानुरूपाणि फलान्यथैषां दशासु वक्ष्यामि यथोपयोगम् ॥ ७॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  8. 7.8 संस्कृत

    संस्कृत

    उभये अधम मध्य पूजिताद्रेष्काणैश्चर भेषु च उत्क्रमात् । अशुभेष्ट समाः स्थिरे क्रमाद् धोरायाः परिकल्पितादशा ॥ ८॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  9. 7.9 संस्कृत

    संस्कृत

    एकं द्वौ नव विंशतिर्धृति कृती पञ्चाशद् एषां क्रमाच्चन्द्रारेन्दुज शुक्र जीवदिनक्रिद् दैवा करिणां समाः । स्वैः स्वैः पुष्ट फलानि सर्ग जनितैः पक्तिर्दशायाः क्रमाद् अन्ते लग्नदशा शुभेति यवना नेच्छन्ति केचित् तथा ॥ ९॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  10. 7.10 संस्कृत

    संस्कृत

    पाक स्वामिनि लग्नगे सुहृदि वा वर्गे अस्य सौम्ये अपि वा प्रारब्धा शुभदादशा त्रिदश षड् लाभेषु वा पाकपे । मित्रोच्चोपचयस्त्रिकोण मदने पाकेश्वरस्य स्थितश्चन्द्रः सत् फल बोधनानि कुरुते पापानि चातोऽन्यथा ॥ १०॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  11. 7.11 संस्कृत

    संस्कृत

    प्रारब्धा हिमगौ दशा स्व गृहगे मानार्थ सौख्यावहा कौजे दूषयति स्त्रियं बुध गृहे विद्या सुहृद् वित्तदा । दुर्गारण्य पथालये कृषि करी सिंहे सितऋक्षे अन्नदा कुस्त्रीदा मृग कुम्भयोर्गुरु गृहे मानार्थ सौख्यावहा ॥ ११॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  12. 7.12 संस्कृत

    संस्कृत

    सौर्यां स्वन् नखदन्त चर्म कनक क्रौर्याध्व भूपाहवैस्तक्ष्ण्यं दैर्यम् अजस्रम् उद्यमरतिः ख्यातिः प्रतापोन्नतिः । भार्य पुत्रधनारि शस्त्र हुतभुग् भूपोद्भवा व्यापद स्त्यागी पापरतिः स्व भृत्य कलहो हृत् क्रोड पीडामयाः ॥ १२॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  13. 7.13 संस्कृत

    संस्कृत

    इन्दोः प्राप्यदशां फलानि लभते मन्त्रद्विजात्युद्भवनीक्षु क्षीर विकार वस्त्र कुसुम क्रीडा तिलान्न श्रमैः । निद्रालस्य मृदु द्विजामररतिः स्त्री जन्म मेधाविता कीर्त्यर्थोपचक्षयौ च बलिभिर्वैरं स्व पक्षेण च ॥ १३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  14. 7.14 संस्कृत

    संस्कृत

    भौमस्यारि विमर्द भूप सहज क्षित्याविकाजैर्धनं प्रद्वेषः सुत मित्रदार सहजैर्विद्वद् गुरु द्वेष्टृता । तृष्णासृग् ज्वर पित्त भङ्ग जनितारोगाः पर स्त्री कृताः प्रीतिः पापरतैरधर्म निरतिः पारुष्य तैक्ष्ण्यानि च ॥ १४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  15. 7.15 संस्कृत

    संस्कृत

    बौध्यां दौत्य सुहृद् गुरु द्विजधनं विद्वत् प्रशंसा यशो युक्ति द्रव्य सुवर्ण वेसर मही सौभाग्य सौख्याप्तयः । हास्योपासन कौशलं मति चयो धर्म क्रिया सिद्धयः पारुष्यं श्रम बन्ध मानस शुचः पीडा च धातु त्रयात् ॥ १५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  16. 7.16 संस्कृत

    संस्कृत

    जैव्यां मान गुणोदयो मति चयः कान्तिः प्रतापोन्नतिर्माहात्म्योद्यम मन्त्र नीति नृ पति स्वाध्याय मन्त्रैर्धनम् । हेमाश्वात्मज कुञ्जराम्बर चयः प्रीतिश्च सद् भूमिपैः । सूक्ष्म्योह गहनाश्रमः श्रवणरुग् वैरं विधर्माश्रितैः ॥ १६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  17. 7.17 संस्कृत

    संस्कृत

    शौक्यां गीतरतिः प्रमोद सुरभि द्रव्यान्न पानाम्बर स्त्री रत्न द्युति मन्मथोपकरण ज्ञानेष्ट मित्रागमाः । कौशल्यं क्रय विक्रये कृषि निधि प्राप्तिर्धनस्यागमो । वृन्दोर्वीश निषादधर्मरहितैर्वैरं शुचः स्नेहतः ॥ १७॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  18. 7.18 संस्कृत

    संस्कृत

    सौरीं प्राप्य खरोष्ट्र पक्षि महिषी वृद्धाङ्गनावाप्तयः । श्रेणी ग्राम पुरधि कार जनिता पूजा कुधान्यागमः । श्लेष्मेर्ष्यानिल कोप मोह मलिन व्यापत्ति तन्द्राश्रमान् । भृत्यापत्य कलत्र भर्त्सनम् अपि प्राप्नोति च व्यङ्गयताम् ॥ १८॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  19. 7.19 संस्कृत

    संस्कृत

    दशासु शस्तासु शुभानि कुर्वन्त्यनिष्ट संज्ञा स्व शुभानि चैवम् । मिश्रासु निश्राणि दशा फलानि होरा फलं लग्न पतेः स मानम् ॥ १९॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  20. 7.20 संस्कृत

    संस्कृत

    संज्ञाध्याये यस्य यद् रव्य मुक्तं कर्माजीवो यश्च यस्योपदिष्टः । भाव स्थानालोक योगोद्भवं च तत् तत् सर्वं तस्य योज्यं दशायाम् ॥ २०॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  21. 7.21 संस्कृत

    संस्कृत

    छायां महाभूत कृतां च सर्वे अभिव्यञ्जयन्ति स्वदशाम् अवाप्य । क्वम्ब्वग्नि वाय्वम्बरजान् गुणांश्च नासास्य दृक् त्वक् छ्रवणानुमेयात् ॥ २१॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  22. 7.22 संस्कृत

    संस्कृत

    शुभ फलददशाया तादृग् एवान्तरात्मा बहु जनयति पुंसां सख्यम् अर्थागमं च कथित फल विपाकैस्तर्कयेद् वर्तमानां परिणमति फलाप्तिः स्वप्न चिन्ता स्व वीर्जैः ॥ २२॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  23. 7.23 संस्कृत

    संस्कृत

    एक ग्रहस्य सदृशे फलयोर्विरोधे नाशं वदेद् यद् अधिकं परिपच्यते तत् । नान्यो ग्रहः सदृशम् अन्य फलं हिनस्ति स्वां स्वां दशाम् उपगताः स फल प्रदा स्युः ॥ २३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

8 Daśā — the periods (8)

  1. 8.1 संस्कृत

    संस्कृत

    स्वाद् अर्कः प्रथमाय बन्धु निधन द्व्याज्ञा तपो द्यूनगो वक्रात् स्वाद् इव तद्वद् एवरविजाच्छुक्रात् स्मरान्त्यारिषु । जीवाद् धर्म सुताय शत्रुषु दश त्र्यायारिगः शीतगोरेष्वेवान्त्य तपः सुतेषु च बुधाल् लग्नात् स बन्ध्वन्त्यगः ॥ १॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  2. 8.2 संस्कृत

    संस्कृत

    लग्नात् षट् त्रि दशायगः स धन धी धर्मेषु चाराच्छशी स्वात् सास्तादिषु साष्ट सप्तसु रवेः षट् त्र्याय धीस्थो यमात् । धी त्र्यायाष्टम कण्टकेषु शशिजाज् जीवाद् व्ययायाष्टगः केन्द्रस्थश्च सितात् तु धर्म सुखधी त्र्यायास्पदानङ्गगः ॥ २॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  3. 8.3 संस्कृत

    संस्कृत

    वक्रस्तूपचयेष्विनात् स तनयेष्वाद्याधिकेषूदयाच् । चन्द्राद् दिग् विफलेषु केन्द्र निधन प्राप्त्यर्थगः स्वाच्छुभः । धर्मायाष्टम केन्द्रगोऽर्क तनयाज् ज्ञात् षट् त्रि धी लाभगः । शुक्रात् षड् व्यय लाभ म्ऱ्त्युषु गुरोः कर्मान्यलाभारिषु ॥ ३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  4. 8.4 संस्कृत

    संस्कृत

    द्व्याद्यायाष्ट तपः सुखेषु भृगुजात् स त्र्यात्मजेष्विन्दुजः साज्ञास्तेषु यमारयोर्व्ययरिपु प्राप्त्यष्टगो वाक् पतेः । धर्मायारि सुत व्ययेषु सवितुः स्वात् साद्य कर्म त्रिगः षट् स्वायाष्ट सुखास्पदेषु हिमगोः साद्येषु लग्नाच्छुभः ॥ ४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  5. 8.5 संस्कृत

    संस्कृत

    दिक् स्वाद्याष्टमदाय बन्धुषु कुजात् स्वात् त्रिकेष्वङ्गिराः सूर्यात् सत्रि नवेषु धी स्व नवदिग् लाभारिगो भार्गवात् । जायायरथ नवात्मजेषु हिमगोर्मन्दात् त्रि षड् धी व्यये दिग् धी षट् स्व सुखाय पूर्व नवगो ज्ञात् स स्मरश्च उदयात् ॥ ५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  6. 8.6 संस्कृत

    संस्कृत

    लग्नाद् आ सुत लाभरन्ध्र नवगः सान्त्यः शशाङ्कात् सितः स्वात् साज्ञेषु सुख त्रि धी नवदश च्छिद्राप्तिगः सूर्यजात् । रन्ध्राय व्यगो रवेर्नवदश प्राप्त्यष्टधीस्थो गुरोर्ज्ञाद् धी त्र्याय नवारिगस्त्रि नव षट् पुत्रायसान्त्यः कुजात् ॥ ६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  7. 8.7 संस्कृत

    संस्कृत

    मन्द स्वात् त्रि सुताय शत्रुषु शुभः साज्ञान्त्यगो भूमिजात् केन्द्रायाष्टधनेष्विनाद् उपचयेष्वाद्ये सुखे च उदयात् । धर्मायारि दशान्त्य मृत्युषु बुधाच्चन्द्रात् त्री षड् लाभगः षष्ठायान्त्य गतः सितास्सुर गुरोः प्राप्त्यन्त्यधी शत्रुषु ॥ ७॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  8. 8.8 संस्कृत

    संस्कृत

    इति निगदितम् इष्टं नेष्टम् अन्यद् विशेषाद् अधिक फल विपाकं जन्म भात् तत्रदद्युः । उपचय गृह मित्र स्वोच्चगैः पुष्टम् इष्टं अवपचय गृह नीचारातिगैर्नेष्ट सम्पत् ॥ ८॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

9 Aṣṭakavarga — the eightfold strength (4)

  1. 9.1 संस्कृत

    संस्कृत

    अर्थाप्तिः पितृ पितृ पत्नि शत्रु मित्र भ्रातृ स्त्री मृतक जनाद् दिवाकराद्यैः । होरेन्द्वोर्दशम गतैर्विकल्पनीया भेन्द्वर्कास्पद पतिगांश नाथ वृत्त्या ॥ १॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  2. 9.2 संस्कृत

    संस्कृत

    अर्कांशे तृण कनकार्ण भेषजाद्यैश्चन्द्रांशे कृषि जलजाङ्गनाश्रयाच्च । धात्वग्नि प्रहरण साहसैः कुजांशे सौम्यांशे लिपि गणितादि काव्य शिल्पैः ॥ २॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  3. 9.3 संस्कृत

    संस्कृत

    जीवांशे द्विज विबुधाकरादि धर्मैः काव्यांशे मणि रजतादि गो महिष्यैः । सौरांशे श्रम वध भार नीच शिल्पैः कर्मेशाध्युषित नवांश कर्म सिद्धिः ॥ ३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  4. 9.4 संस्कृत

    संस्कृत

    मित्रारि स्व गृह गतैर्ग्रहैस्ततोऽर्थं तुङ्गस्थे बलिनि च भास्करे स्व वीर्यात् । आयस्थैरुदयधनाश्रितैश्च सौम्यैः संचिन्त्यं बल सहितैरनेकधा स्वम् ॥ ४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

10 Karma-jīva — livelihood (20)

  1. 10.1 संस्कृत

    संस्कृत

    प्राहुर्यवनाः स्व तुङ्गगैः क्रूरैः क्रूर मतिर्महीपतिः । क्रूरैस्तु न जीव शर्मणः पक्षे क्षित्यधिपः प्रजायते ॥ १॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  2. 10.2 संस्कृत

    संस्कृत

    वक्रार्कजार्क गुरुभिः सकलैस्त्रिभिश्च स्वोच्चेषु षोडश नृपाः कथितैकलग्ने । द्व्येकाश्रितेषु च तथाइकतमे विलग्ने स्व क्षेत्रगे शशिनि षोडश भूमिपाः स्युः ॥ २॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  3. 10.3 संस्कृत

    संस्कृत

    वर्गोत्तम गते लग्ने चन्द्रे वा चन्द्र वर्जितः । चतुराद्यैर्ग्रहैर्दृष्टे नृपा द्वाविंशतिः स्मृताः ॥ ३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  4. 10.4 संस्कृत

    संस्कृत

    यमे कुम्भे अर्के अजे गवि शशिनि तैरेव तनुगैर्नृ युक्तिं सहालिस्थैः शशिज गुरु वक्रैर्नृ पतयः । यमेन्दू तुङ्गे अङ्गे सवितृ शशिजौ षष्ठ भवने तुलाजेन्दु क्षेत्रैः स सित कुज जीवैश्च नरपौ ॥ ४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  5. 10.5 संस्कृत

    संस्कृत

    कुजे तुङ्गे अर्केन्द्वोर्धनुषि यम लग्ने च कुपतिः पतिर्भूमेश्चान्यः क्षिति सुत विलग्ने स शशिनि । स चन्द्रे सौरे अस्ते सुर पति गुरौ चाप धरगे स्व तुङ्गस्थे भानावुदयम् उपयाते क्षिति पतिः ॥ ५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  6. 10.6 संस्कृत

    संस्कृत

    वृषे सेन्दौ लग्ने सवितृ गुरु तीक्ष्णांशु तनयैः सुहृज् जाया खस्थैर्भवति नियमान् मानव पतिः । मृगे मन्दे लग्ने सहजरिपु धर्म व्यय गतैः शशाङ्काद्यैः ख्यातः पृथु गुणयशाः पुङ्गल पतिः ॥ ६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  7. 10.7 संस्कृत

    संस्कृत

    हये सेन्दौ जीवे मृग मुख गते भूमि तनये स्व तुङ्गस्थौ लग्ने भृगुज शशिजावत्र नृ पती । सुतस्थौ वक्रार्की गुरु शशि सिताश्चापि हिबुके बुधे कन्या लग्ने भवति हि नृपोऽन्योऽपि गुणवान् ॥ ७॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  8. 10.8 संस्कृत

    संस्कृत

    झषे सेन्दौ लग्ने घट मृग मृगेन्द्रेषु सहितैर्यमारार्कैर्योऽभूत् स खलु मनुजः शास्ति वसुधाम् । अजे सारे मूर्तौ शशि गृह गते चामर गुरौ । सुरेज्ये वा लग्ने धरणि पतिरन्योऽपि गुणवान् ॥ ८॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  9. 10.9 संस्कृत

    संस्कृत

    कर्किणि लग्ने तत्स्थे जीवे चन्द्र सित ज्ञैराय प्राप्तैः । मेष गते अर्के जातं विद्याद् विक्रमयुक्तं पृथ्वी नाथम् ॥ ९॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  10. 10.10 संस्कृत

    संस्कृत

    मृग मुखे अर्क तनयस्तनु संस्थः क्रिय कुलीर हरयोऽधिपयुक्ताः । मिथुन तौलि सहितौ बुध शुक्रौ यदि तदा पृथु यशाः पृथिवीशः ॥ १०॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  11. 10.11 संस्कृत

    संस्कृत

    स्वोच्च संस्थे बुधे लग्ने भृगौ मेषूरणाश्रिते । स जीवे अस्ते निशा नाथे राजा मन्दारयोः सुते ॥ ११॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  12. 10.12 संस्कृत

    संस्कृत

    अपि खल कुल जाता मानवाराज्य भाजः किम् उत नृप कुलोत्थाः प्रोक्त भू पालयोगैः । नृ पति कुल समुत्थाः पार्थिवा वक्ष्यमाणैर्भवति नृ पति तुल्यस्तेष्वभू पाल पुत्रः ॥ १२॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  13. 10.13 संस्कृत

    संस्कृत

    उच्च स्व त्रिकोणगैर्बलस्थैस्त्र्याद्यैर्भू पति वंशजा नरेन्द्राः । पञ्चादिभिरन्य वंश जाता हीनैर्वित्तयुता न भूमि पालाः ॥ १३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  14. 10.14 संस्कृत

    संस्कृत

    लेखास्थे अर्के अजेन्दौ लग्ने भौमे स्वोच्चे कुम्भे मन्दे । चाप प्राप्ते जीवे राज्ञः पुत्रं विन्द्यात् पृथ्वी नाथम् ॥ १४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  15. 10.15 संस्कृत

    संस्कृत

    स्वऋक्षे शुक्रे पातालस्थे धर्म स्थानं प्राप्ते चन्द्रे । दुश्चिक्याङ्ग प्राप्ति प्राप्तैः शेषैर्जातः स्वामी भूमेः ॥ १५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  16. 10.16 संस्कृत

    संस्कृत

    सौम्ये वीर्ययुते तनु युक्ते वीर्याढ्ये च शुभे शुभयाते । धर्मार्थोपचयेष्ववशेषैर्धर्मात्मा नृपजः पृथिवीशः ॥ १६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  17. 10.17 संस्कृत

    संस्कृत

    वृषोदये मूर्ति धनारि लाभगैः शशाङ्क जीवार्क सुतापरैर्नृपः । सुखे गुरौ खे शशि तीक्ष्ण दीधिती यमोदये लाभ गतैर्नृपोऽपरैः ॥ १७॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  18. 10.18 संस्कृत

    संस्कृत

    मेषूरणाय तनुगाः शशि मन्द जीवा ज्ञारौ धने सितरवी हिबुके नरेन्द्रम् । वक्रासितौ शशि सुरेज्य सितार्क सौम्या होरा सुखास्त शुभ खाप्ति गताः प्रजेशम् ॥ १८॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  19. 10.19 संस्कृत

    संस्कृत

    कर्म लग्नयुत पाकदशायां राज्य लब्धिरथ वा प्रबलस्य । शत्रु नीच गृहयातदशायां च्छिद्र संश्रयदशा परिकल्प्या ॥ १९॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  20. 10.20 संस्कृत

    संस्कृत

    गुरु सित बुध लग्ने सप्तमस्थे अर्क पुत्रे वियति दिवस नाथे भोगिनां जन्म विन्द्यात् । शुभ बलयुत केन्द्रैः क्रूर संस्थैश्च पापैर्व्रजति शबरदस्यु स्वामिताम् अर्थ भाक् च ॥ २०॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

11 Rāja-yoga — the yogas of eminence (19)

  1. 11.1 संस्कृत

    संस्कृत

    नव दिग् वसवस्त्रिकाग्नि वेदैर्गुणिता द्वि त्रि चतुर्विकल्पजाः स्युः । यवनैस्त्रि गुणा हि षट् शती सा कथिता विस्तरतोऽग्र तत् समाः स्युः ॥ १॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  2. 11.2 संस्कृत

    संस्कृत

    रज्जुर्मुशलं नलश्चराद्यैः सत्यश्चाश्रयजाञ्ज गादयोगान् । केन्द्रैः सद् असद् युतैर्दलाख्यौ स्रक् सर्पौ कथितौ पराशरेण ॥ २॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  3. 11.3 संस्कृत

    संस्कृत

    योगा व्रजन्त्याश्रयजाः समत्वं यवाब्ज वज्राण्डज गोलकाद्यैः । केन्द्रोपगैः प्रोक्त फलौ दलाख्यावित्याहुरन्ये न पृथक् फलौ तौ ॥ ३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  4. 11.4 संस्कृत

    संस्कृत

    आसन्न केन्द्र भवन द्वयगैर्गदाख्यस्तन्वस्तगेषु शकटं विहगः ख बन्ध्वोः । श ृङ्गाटकं नवम पञ्चम लग्न संस्थैर्लग्नान्यगैर्हलम् इति प्रवदन्ति तज् ज्ञाः ॥ ४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  5. 11.5 संस्कृत

    संस्कृत

    शकटाण्डज वच्छुभाशुबैर्वज्रं तद्विपरीतगैर्यवः । कमलं तु विमिश्र संस्थितैर्वापि तद्यदि केन्द्र बाह्यतः ॥ ५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  6. 11.6 संस्कृत

    संस्कृत

    पूर्व शास्त्रानुसारेण मया वज्रादयः कृताः । चौतुर्थे भवने सूर्याज् ज्ञ सितौ भवतः कथम् ॥ ६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  7. 11.7 संस्कृत

    संस्कृत

    कण्टकादि प्रव्ऱ्त्तैस्तु चतुर्गृह गतैर्ग्रहैः । यूपेषु शक्ति दण्डाख्या होराद्यैः कण्टकैः क्रमात् ॥ ७॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  8. 11.8 संस्कृत

    संस्कृत

    नौ कूट च्छत्र चापानि तद्वत् सप्तऋक्ष संस्थितैः । अर्ध चन्द्रस्तु नावाद्यैः प्रोक्तस्त्वन्यऋक्ष संस्थितैः ॥ ८॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  9. 11.9 संस्कृत

    संस्कृत

    एकान्तर गतैरर्थात् समुद्रः षड् गृहाश्रितैः । विलग्नादि स्थितैश्चक्रम् इत्याकृतिज संग्रहः ॥ ९॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  10. 11.10 संस्कृत

    संस्कृत

    संख्या योगाः स्युः सप्त सप्तऋक्ष संस्थिरेकापायाद् वल्लकी दामिनी च पाशः केदारः शूलयोगो युगं च गोलश्चान्यान् पूर्वम् उक्तान् विहाय ॥ १०॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  11. 11.11 संस्कृत

    संस्कृत

    ईर्ष्युर्विदेश निरतोऽध्वरुचिश्चरज्ज्वां मानी धनी च मुशले बहु कृत्य सक्तः । व्यङ्गः स्थिराढ्य निपुणो नलजः स्रग् उत्थो भोगान्वितो भुज गजो बहु दुःख भाक् स्यात् ॥ ११॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  12. 11.12 संस्कृत

    संस्कृत

    आश्रयोक्तास्तु विफला भवन्त्यन्यैर्विमिश्रिताः । मिश्रा यैस्ते फलं दद्युरमिश्राः स्व फल प्रदाः ॥ १२॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  13. 11.13 संस्कृत

    संस्कृत

    यज्वर्थ भाक् सततम् अर्थरुचिर्गदायां तद्वृत्ति भुक् शकटजः सरुजः कुदारः । दूतोऽटनः कलह कृद् विहगे प्रदिष्टः श ृङ्गाटके चिर सुखी कृषिकृद् धलाक्ष्ये ॥ १३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  14. 11.14 संस्कृत

    संस्कृत

    वज्रे अन्त्य पूर्व सुखिनः सुभगोऽतिशूरो वीर्यान्वितोऽप्यथयवे सुखितो वयोऽन्तः । विख्यात कीर्त्यमित सौख्य गुणश्च पद्मे वाप्यां तनु स्थिर सुखो निधि कृन् न दाता ॥ १४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  15. 11.15 संस्कृत

    संस्कृत

    त्यागात्मवान् क्रतु वरैर्यजते च यूपे हिंस्रोऽथ गुप्त्यधिकृतः शरकृच्छराख्ये । नीचोऽलसः सुखधनैर्वियुतश्च शक्तौ दण्डे प्रियैर्विरहितः पुरुषान्त्य वृत्तिः ॥ १५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  16. 11.16 संस्कृत

    संस्कृत

    कीर्त्या युतश्चल सुखः कृपणश्च नौजः कूटे अनृत प्लवन बन्धनपश्च जातः । छत्रोद्भवः स्व जन सौख्य करोऽन्त्य सौख्यः शूरश्च कार्मुक भवः प्रथमान्त्य सौख्यः ॥ १६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  17. 11.17 संस्कृत

    संस्कृत

    अर्धेन्दुजः सुभग कान्त वपुः प्रधानस्तोयालये नर पति प्रतिमस्तु भोगी । चक्रे नरेन्द्र मुकुट द्युति रञ्जिताङ्घ्रिर्वीणोद्भवश्च निपुणः प्रिय गीत नृत्यः ॥ १७॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  18. 11.18 संस्कृत

    संस्कृत

    दातान्य कार्य निरतः पशुपश्च दाम्नि पाशे धनार्जन विशील स भृत्य बन्धुः । केदारजः कृषि करः सुबहूपयोष्यः शूरः क्षतो धनरुचिर्विधनश्च शूले ॥ १८॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  19. 11.19 संस्कृत

    संस्कृत

    धन विरहितः पाखण्डी वा युगे त्वथ गोलके विधन मलिनो ज्ञानोपेतः कुशिल्प्यलसोऽटनः । इति निगदिता योगाः सार्द्धं फलैरिह नाभसा नियत फलदाश्चिन्त्या ह्येते समस्तदशास्वपि ॥ १९॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

12 Nābhasa-yoga — the shape yogas (9)

  1. 12.1 संस्कृत

    Nābhasa yoga

    संस्कृत

    अधम सम वरिष्ठान्यर्क केन्द्रादि संस्थे शशिनि विनय वित्त ज्ञानधी नैपुणानि । अहनि निशि च चन्द्रे स्वे अधिमित्रांशके वा सुर गुरु सितदृष्टे वित्तवान् स्यात् सुखी च ॥ १॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  2. 12.2 संस्कृत

    Nābhasa yoga

    संस्कृत

    सौम्यैः स्मरारि निधनेष्वधियोगेन्दोस्तस्मिंश्चमूप सचिव क्षिति पाल जन्म । सम्पन्न सौख्य विभवा हत शत्रवश्च दीर्घायुषो विगतरोग भयाश्च जाताः ॥ २॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  3. 12.3 संस्कृत

    Nābhasa yoga

    संस्कृत

    हित्वार्कं सुनफानफादुरुधुराः स्वान्त्योभयस्थैर्ग्रहैः शीतांशोः कथितोऽन्यथा तु बहुभिः केमद्रुमोऽन्यैस्त्वसौ । केन्द्रे शीतकरेऽथ वा ग्रहयुते केमद्रुमो नेष्यते केचित् केन्द्र नवांशकेषु च वदन्त्युक्तिः प्रसिद्धा न ते ॥ ३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  4. 12.4 संस्कृत

    Nābhasa yoga

    संस्कृत

    त्रिंशत् सरूपाः सुनफानफाख्याः षष्टित्रयं दौरुधुरे प्रभेदाः । इच्छा विकल्पैः क्रमशोऽभिनीय नीते निव्ऱ्त्तिः पुनरन्य नीतिः ॥ ४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  5. 12.5 संस्कृत

    Nābhasa yoga

    संस्कृत

    स्वयम् अधिगत वित्तः पार्थिवस्तत् समो वा भवति हि सुनफायां धी धन ख्यातिमांश्च । प्रभुर गद शरीरः शीलवान् ख्यात कीर्तिर्विषय सुख सुवेषो निर्व्ऱ्तश्चानफायाम् ॥ ५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  6. 12.6 संस्कृत

    Nābhasa yoga

    संस्कृत

    उत्पन्न भोग सुख भुग् धन वाहनाढ्यस्त्यागान्वितो दुरुधुरा प्रभवः सुभृत्यः । केमद्रुमे मलिनदुःखित नीच निःस्वाः प्रेष्याः खलाश्च नृपतेरपि वंश जाताः ॥ ६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  7. 12.7 संस्कृत

    संस्कृत

    उत्साह शौर्यधन साहस वान् महीजः सौम्यः पटुः सुवचनो निपुणः कलासु । जीवोऽर्थधर्म सुख भाङ् नृप पूजितश्च कामी भृगुर्बहु धनो विषयोपभोक्ता ॥ ७॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  8. 12.8 संस्कृत

    संस्कृत

    पर विभव परिच्छदोपभोक्तारवि तनयो बहु कार्यकृद् गणेशः । अशुभ कृद् उडुपोऽह्नि दृश्य मूर्तिर्गलित तनुश्च शुभोऽन्यथान्यद् ऊह्यम् ॥ ८॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  9. 12.9 संस्कृत

    Nābhasa yoga

    संस्कृत

    लग्नाद् अतीव वसुमान् वसुमाञ् छशाङ्कात् सौम्य ग्रहैरुपचयोपगतैः समस्तैः । द्वाभ्यां समोऽल्प वसुमांश्च तदूनतायाम् अन्येष्वसत्स्वपि फलेष्विदम् उत्कटेन ॥ ९॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

13 Candra-yoga — the lunar yogas (5)

  1. 13.1 संस्कृत

    संस्कृत

    तिग्मांशुर्जनयत्युषेश सहितो यन्त्राश्म कारं नरं भौमेनाघरतं बुधेन निपुणं धी कीर्ति सौख्यान्वितम् । क्रूरं वाक् पतिनान्य कार्य निरतं शुक्रेणरङ्गायुधैर्लब्धस्वं रविजेनधातु कुशलं भाण्ड प्रकारेषु वा ॥ १॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  2. 13.2 संस्कृत

    संस्कृत

    कूट स्त्र्यासव कुम्भ पण्यम् अशिवं मातुः स वक्रः शशी स ज्ञः प्रश्रित वाक्यम् अर्थ निपुणं सौभाग्य कीर्त्यान्वितम् । विक्रान्तं कुल मुख्यम् अस्थिर मतिं वित्तेश्वरं साङ्गिरा वस्त्राणां स सितः क्रियादि कुशलं सार्किः पुनर्भू सुतम् ॥ २॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  3. 13.3 संस्कृत

    संस्कृत

    मूलादि स्नेह कूटैर्व्यवहरति वणिग् बाहु योद्धा स सौम्ये पुर्यध्यक्षः स जीवे भवति नर पतिः प्राप्त वित्तो द्विजो वा । गोपो मल्लोऽथदक्षः परयुवति रतो द्यूत कृत् सासुरेज्ये दुःखार्तोऽसत्य संधः स सवितृ तनये भूमिजे निन्दितश्च ॥ ३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  4. 13.4 संस्कृत

    संस्कृत

    सौम्ये रङ्ग चरो बृहस्पति युते गीत प्रियो नृत्यविद् वाग्मी भू गणपः सितेन मृदुना माया पटुर्लङ्घकः । सद् विद्यो धनदारवान् बहु गुणः शुक्रेणयुक्ते गुरौ ज्ञेयः श्मश्रु करोऽसितेन घटकृज् जातोऽन्नकारोऽपि वा ॥ ४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  5. 13.5 संस्कृत

    संस्कृत

    असित सित समागमे अल्प चक्षुर्युवति समाश्रय सम्प्रवृद्ध वित्तः । भवति च लिपि पुस्तक चित्र वेत्ता कथित फलैः परतो विकल्पनीयाः ॥ ५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

14 Dvigraha-yoga — two-planet yogas (4)

  1. 14.1 संस्कृत

    संस्कृत

    एकस्थैश्चतुरादिभिर्बलयुतैर्जाताः पृथग् वीर्यगैः शाक्या जीविक भिक्षु वृद्ध चरका निर्ग्रन्थ वन्याशनाः । माहेय ज्ञ गुरु क्षपा कर सित प्राभाकरीनैः क्रमात् प्रव्रज्या बलिभिः समा परजितैस्तत् स्वामिभिः प्रच्युतिः ॥ १॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  2. 14.2 संस्कृत

    संस्कृत

    रवि कुप्त करैरदीक्षिता बलिभिस्तद्गत भक्तयो नराः । अभियाचित मात्रदीक्षिता निहतैरन्य निरीक्षितैरपि ॥ २॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  3. 14.3 संस्कृत

    संस्कृत

    जन्मेशोऽन्यैर्यद्यदृष्टोऽर्क पुत्रं पश्यत्यार्किर्जन्मपं वा बलोनम् । दीक्षां प्राप्नोत्यार्कि दृक् काण संस्थे भौमार्क्यंशे सौरदृष्टे च चन्द्रे ॥ ३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  4. 14.4 संस्कृत

    संस्कृत

    सुर गुरु शशि होरा स्वार्के दृष्टासु धर्मे गुरुरथ नृपतीनां योगजस्तीर्थ कृत् स्यात् । नवम भवन संस्थे मन्दगे अन्यैर्दृष्टे भवति नरपयोगे दीक्षितः पार्थिवेन्द्रः ॥ ४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

15 Pravrajyā — renunciation (14)

  1. 15.1 संस्कृत

    संस्कृत

    प्रिय भूषणः सुरूपः सुभगो दक्षोऽश्विनीषु मतिमांश्च । कृत निश्चय सत्यारुग् दक्षः सुखितश्च भरणीषु ॥ १॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  2. 15.2 संस्कृत

    संस्कृत

    बहु भुक् परदाररतस्तेजस्वी कृत्तिकासु विख्यातः । रोहिण्यां सत्य शुचिः प्रियंवदः स्थिर मतिः सुरूपश्च ॥ २॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  3. 15.3 संस्कृत

    संस्कृत

    चपलश्चतुरो भीरुः पटुरुत्साही धनी मृगे भोगी । शठ गर्वितः कृतघ्नो हिंस्रः पापश्चरौद्रऋक्षे ॥ ३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  4. 15.4 संस्कृत

    संस्कृत

    दान्तः सुखी सुशीलो दुर्मेधारोग भाक् पिपासुश्च । अल्पेन च संतुष्टः पुनर्वसौ जायते मनुजः ॥ ४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  5. 15.5 संस्कृत

    संस्कृत

    शान्तात्मा सुभगः पण्डितो धनी धर्म संसृतः पुष्ये । शठः सर्व भक्ष पापः कृतघ्नधूर्तश्च भौजङ्गे ॥ ५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  6. 15.6 संस्कृत

    संस्कृत

    बहु भृत्यधनो भोगी सुर पितृ भक्तो महोद्यमः पित्र्ये । प्रिय वाग् दाताद्युतिमान् अटनो नृप सेवको भाग्ये ॥ ६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  7. 15.7 संस्कृत

    संस्कृत

    सुभगो विद्याप्तधनो भोगी सुखभाक् द्वितीय फाल्गुन्याम् । उत्साही धृष्टः पानपो घृणी तस्करो हस्ते ॥ ७॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  8. 15.8 संस्कृत

    संस्कृत

    चित्राम्बर माल्यधरः सुलोचनाङ्गश्च भवति चित्रायाम् । दान्तो वणिक् कृपालुः प्रिय वाग् धर्माश्रितः स्वातौ ॥ ८॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  9. 15.9 संस्कृत

    संस्कृत

    ईर्ष्युर्लुब्धो द्युतिमान् वचन पटुः कलह कृद् विशाखासु । आढ्यो विदेश वासी क्षुधालुरटनोऽनुराधासु ॥ ९॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  10. 15.10 संस्कृत

    संस्कृत

    ज्येष्ठासु न बहु मित्रः संतुष्टो धर्म कृत् प्रचुर कोपः । मूले मानी धनवान् सुखी न हिंस्रः स्थिरो भोगी ॥ १०॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  11. 15.11 संस्कृत

    संस्कृत

    इष्टानन्द कलत्रो मानी दृढ सौह्ऱ्दश्च जलदैवे । वैश्वे विनीतधार्मिक बहु मित्र कृतज्ञ सुभगश्च ॥ ११॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  12. 15.12 संस्कृत

    संस्कृत

    श्रीमाञ् छ्रवणे श्रुतवान् उदारदारो धनान्वितः ख्यातः । दाताढ्यः शूरो गीत प्रियो धनिष्ठासु धन लुब्धः ॥ १२॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  13. 15.13 संस्कृत

    संस्कृत

    स्फुट वाग् व्यसनी रिपुहा साहसिकः शतभिषजि दुर्ग्राह्यः । भाद्रपदासु द्वि गनः स्त्री जितधनी पटुरदाता च ॥ १३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  14. 15.14 संस्कृत

    संस्कृत

    वक्ता सुखी प्रजावान् जित शत्रुर्धार्मिको द्वितीयासु । सम्पूर्णाङ्गः सुभगः शूरः शुचिरर्थवान् पौष्णे ॥ १४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

16 Aniṣṭa — misfortunes (13)

  1. 16.1 संस्कृत

    संस्कृत

    वृत्ताताम्रदृग् उष्ण शाक लघु भुक् क्षिप्र प्रसादोऽटनः कामी दुर्बल जानुरस्थिरधनः शूरोऽङ्गना वल्लभः । सेवाज्ञः कनखी व्रणाङ्कित शिरा मानी सहोत्थाग्रजः शक्त्या पाणि तले अङ्कितोऽतिचपलस्तोये अतिभीरुः क्रिये ॥ १॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  2. 16.2 संस्कृत

    संस्कृत

    कान्तः खेल गतिः पृथु ऊरु वदनः पृष्ठास्य पार्श्वाङ्कितस्त्यागी क्लेश सहः प्रभुः ककुदवान् कन्या प्रजः श्लेष्मलः पूर्वैर्बन्धु धनात्मजैर्विरहितः सौभाग्ययुक्तः क्षमी दीप्ताग्निः प्रमदा प्रियः स्थिर सुहृन् मध्यान्त्य सौख्यो गवि ॥ २॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  3. 16.3 संस्कृत

    संस्कृत

    स्त्री लोलः सुरतोपचार कुशलस्ताम्रेक्षणः शास्त्रविद् दूतः कुञ्चित मूर्धजः पटु मतिर्हास्येङ्गितद्यूतवित् । चार्वङ्गः प्रिय वाक् प्रभ क्षणरुचिर्गीत प्रियो नृत्यवित् क्लीबैर्याति रतिं समुन्नत नसश्चन्द्रे तृतीयऋक्षगे ॥ ३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  4. 16.4 संस्कृत

    संस्कृत

    आवक्रद्रुतगः समुन्नत कटिः स्त्री निर्ज्जितः सत् सुहृद् दैवज्ञः प्रचुरालय क्षयधनैः संयुज्यते चन्द्रवत् । ह्रस्वः पीन गलः समेति च वंश साम्ना सुहृद् वत्सलस्तोयोद्यानरतः स्व वेश्म सहिते जातः शशाङ्के नरः ॥ ४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  5. 16.5 संस्कृत

    संस्कृत

    तीक्ष्णः स्थूल हनुर्विशाल वदनः पिङ्गेक्षणोऽल्पात्मजः स्त्री द्वेषी प्रिय मांस कानन नगः कुप्यत्यकार्ये चिरम् । क्षुत् तृणोदरदन्त मानसरुजा सम्पीडितस्त्यागवान् विक्रान्तः स्थिरधीः सुगर्वित मना मातुर्विधेयोऽर्क भे ॥ ५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  6. 16.6 संस्कृत

    संस्कृत

    व्रीडा मन्थर चारु वीक्षण गतिः स्रस्तांस बाहुः सुखी श्लक्ष्णः सत्यरतः कलासु निपुणः शास्त्रार्थविद् धार्मिकः । मेधावी सुरत प्रियः पर गृहैर्वित्तैश्च संयुज्यते कन्यायां परदेशगः प्रिय वचाः कन्या प्रजोऽल्पात्मजः ॥ ६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  7. 16.7 संस्कृत

    संस्कृत

    देव ब्राह्मण साधु पूजनरतः प्राज्ञः शुचिः स्त्री जितः प्रांशुश्च उन्नत नासिकः कृश चलद् गात्रोऽटनोऽर्थान्वितः हीनाङ्गः क्रय विक्रयेषु कुशलो देवद्वि नामा सरुक् बन्धूनाम् उपकार कृद् विरुषितस्त्यक्तस्तु तैः सप्तमे ॥ ७॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  8. 16.8 संस्कृत

    संस्कृत

    पृथुल नयन वक्षा वृत्त जङ्घोरु जानुर्जनक गुरु वियुक्तः शैशवे व्याधितश्च । नर पति कुल पूज्यः पिङ्गलः क्रूर चेष्टो झष कुलिश खगाङ्कश्छन्न पापोऽलिजातः ॥ ८॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  9. 16.9 संस्कृत

    संस्कृत

    व्यादिर्घास्य शिरो धरः पितृ धनस्त्यागी कविर्वीर्यवान् वक्ता स्थूलरद श्रवोऽधर नसः कर्मोद्यतः शिल्पवित् । कुब्जांशः कुनखी समांसल भुजः प्रागल्भवान् धर्मविद् बन्धु द्विट् न बलात् समैति च वंश साम्नैक साध्योऽश्वजः ॥ ९॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  10. 16.10 संस्कृत

    संस्कृत

    नित्यं लालयति स्वदार तनयान् धर्मध्वजोऽधः कृशः स्वक्षः क्षाम कटिर्गृहीत वचनः सौभाग्ययुक्तोऽलसः । शीतालुर्मनुजोऽटनश्च मकरे सत्त्वाधिकः काव्य कृल् लुब्धोऽगम्य जराङ्गनासु निरतः सन्त्यक्त लज्जोऽघृणः ॥ १०॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  11. 16.11 संस्कृत

    संस्कृत

    करभ गलः शिरालुः खर लोमशदीर्घ तनुः पृथु चरणोरु पृष्ठ जघनास्य कटिर्जरठः । पर वनितार्थ पाप निरतः क्षय वृद्धि युतः प्रिय कुसुमानुलेपन सुहृद् घटजोऽध्व सहः ॥ ११॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  12. 16.12 संस्कृत

    संस्कृत

    जल परधन भोक्तादार वासोऽनुरक्तः समरुचिर शरीरस्तुङ्ग नासो बृहत्कः । अभिभवति स पत्नान् स्त्री जितश्चारु द्ऱ्ष्टिर्द्युति निधि धन भोगी पण्डितश्चान्त्यराशौ ॥ १२॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  13. 16.13 संस्कृत

    संस्कृत

    बलवति राशौ तदधिपतौ च स्व बलयुतः स्याद् यदि तुहिनांशुः । कथित कलानाम् अविकलदाता शशिवद् अतोऽन्येत्यनुपरिचिन्त्याः ॥ १३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

17 Strī-jātaka — the horoscopy of women (20)

  1. 17.1 संस्कृत

    संस्कृत

    प्रथितश्चतुरोऽटनोऽल्प वित्तः क्रियगे त्वायुध भृद् वितुङ्ग भागे । गवि वस्त्र सुगन्ध पण्य जीवी वनिताद् विट् कुशलश्च गो यवाद्ये ॥ १॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  2. 17.2 संस्कृत

    संस्कृत

    विद्या ज्योतिष वित्तवान् मिथुनगे भानौ कुलीरे स्थिते तीक्ष्णोऽस्वः पर कार्य कृच्छ्रम पथ क्लेशैश्च संयुज्यते । सिंहस्थे वन शैल गो कुलरतिर्वीर्यान्वितोऽज्ञः पुमान् कन्यास्थे लिपि लेख्य काव्य गणित ज्ञानान्वितः स्त्री वपुः ॥ २॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  3. 17.3 संस्कृत

    संस्कृत

    जातस्तौलिनि सौण्डिकोऽध्वनि रतो हैरण्यको नीच कृत् क्रूरः साहसिको विशार्जितधनः शस्त्रान्तगोऽलि स्थिते । सत् पूज्यो धनवान् धनुर्धर गते तीक्ष्णो भिषक् कारुको नीचोऽज्ञः कुवणिङ् मृगे अल्पधनवांल् लब्धोऽन्य भाग्यैर्रतः ॥ ३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  4. 17.4 संस्कृत

    संस्कृत

    नीचो घटे तनय भाग्य परिच्च्युतोऽस्व स्तोयोत्थ पण्य विभवो बनिताद् ऋतोऽन्त्ये । नक्षत्र मानव तनु प्रतिमे विभागे लक्ष्मादिशेत् तुहिनरश्मि दिनेशयुक्ते ॥ ४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  5. 17.5 संस्कृत

    संस्कृत

    नर पति सत् कृतोऽटनश्चमूप वणिक् सधनः क्षत तनुश्चौर भूरि विषयांश्च कुजः स्व गृहे । युवति जितान् सुहृत्सु विषमान् परदाररतान् कुहक सुवेष भीरु पौर्षान् सित भे जनयेत् ॥ ५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  6. 17.6 संस्कृत

    संस्कृत

    बौधे असहस्तनयवान् विसुहृत् कृतज्ञो गान्धर्वयुद्ध कुशलः कृपणोऽभयोऽर्थी । चान्द्रे अर्थवान् सलिलयान समर्जित स्वः प्राज्ञश्च भूमि तनये विकलः खलश्च ॥ ६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  7. 17.7 संस्कृत

    संस्कृत

    निःस्वः क्लेश सहो वनान्तर चरः सिंहे अल्पदारात्मजो जैवे नैकरिपुर्नरेन्द्र सचिवः ख्यातोऽभयाल्पात्मजः । दुःखार्तो विधनोऽटनोऽनृतरतस्तीक्ष्णश्च कुम्भ स्थिते भौमे भूरि धनात्मजो मृग गते भूपोऽथ वा तत् समः ॥ ७॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  8. 17.8 संस्कृत

    संस्कृत

    द्यूतऋण पानरत नास्तिक चौर निःस्वाः कुस्त्रीक कूटकृद् असत्यरताः कुजऋक्षे । आचार्य भूरि सुतदारधनार्जनेष्टाः शौक्रे वदान्यगुरु भक्ति रताश्च सौम्ये ॥ ८॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  9. 17.9 संस्कृत

    संस्कृत

    विकत्थनः शास्त्र कला विदग्धः प्रियंवदः सौख्यरतस्तृतीये । जलार्जित स्वः स्व जनस्य शत्रुः शशाङ्कजे शीत करऋक्षयुक्ते ॥ ९॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  10. 17.10 संस्कृत

    संस्कृत

    स्त्री द्वेष्यो विधन सुखात्मजोऽटनोऽज्ञः स्त्री लोलः स्व परिभवोऽर्कराशिगे ज्ञे । त्यागी ज्ञः प्रचुर गुणः सुखी क्षमावान् युक्ति ज्ञो विगत भयश्च षष्ठराशौ ॥ १०॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  11. 17.11 संस्कृत

    संस्कृत

    पर कर्म कृद् अस्व शिल्प बुद्धी ऋणवान् विष्टि करो बुधे अर्कजऋक्षे । नृप सत्कृत पण्डिताप्त वाक्यो नवमे अन्त्ये जित सेवकान्त्य शिल्पः ॥ ११॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  12. 17.12 संस्कृत

    संस्कृत

    सेना निर्बहु वित्तदार तनयो दाता सुभृत्यः क्षमी तेजो दार गुणान्वितः सुर गुरौ ख्यातः पुमान् कौज भे । कल्पाङ्गः सधनार्थ मित्र तनयस्त्यागी प्रियः शौक्र भे बौधे भूरि परिच्छदात्मज सुहृत् साचिव्ययुक्तः सुखी ॥ १२॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  13. 17.13 संस्कृत

    संस्कृत

    चान्द्रे रत्न सुत स्वदार विभव प्रज्ञा सुखैरन्वितः सिंहे स्याद् बल नायकः सुर गुरौ प्रोक्तं च यच्चन्र भे । स्वऋक्षे माण्डलिको नरेन्द्र सचिवः सेनापतिर्वाधनी कुम्भे कर्कटवत् फलानि मकरे नीचोऽल्प वित्तोऽसुखी ॥ १३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  14. 17.14 संस्कृत

    संस्कृत

    परयुवति रतस्तदर्थ वादैर्हृत विभवः कुल पांसनः कुजऋक्षे । स्व बल मति धनो नरेन्द्र पूज्यः स्व जन विभुः प्रथितोऽभयः सिते स्वे ॥ १४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  15. 17.15 संस्कृत

    संस्कृत

    नृप कृत्य करोऽर्थवान् कलाविन् मिथुने षष्ठ गते अतिनीच कर्मा रविजऋक्ष गते अमरारि पूज्ये सुभगः स्त्री विजितो रतः कुनार्य्याम् ॥ १५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  16. 17.16 संस्कृत

    संस्कृत

    द्वि भार्योऽर्थी भीरुः प्रबल मद शोकश्च शशि भे हरौ योषाप्तार्थः प्रवरयुवतिर्मन्द तनयः । गुणैः पूज्यः स स्वस्तुरग सहिते दानव गुरौ झषे विद्वान् आढ्यो नृप जनित पूजोऽतिसुभगः ॥ १६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  17. 17.17 संस्कृत

    संस्कृत

    मूर्खोऽटनः कपटवान् विसुहृद् यमे अजे कीटे तु बन्ध वध भाक् चपलोऽघृणश्च । निह्रीर्सुखार्थ तनयः स्खलितश्च लेख्ये रक्षा पतिर्भवति मुख्य पतिश्च बौधे ॥ १७॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  18. 17.18 संस्कृत

    संस्कृत

    वर्ज्य स्त्रीष्टो न बहु विभवो भूरि भार्यो वृषस्थे ख्यातः स्वोच्चे गण पुर बल ग्राम पूज्योऽर्थवांश्च । कर्किण्यस्वो विकलदशनो मातृ हीनोऽसुतोऽज्ञः सिंहे अनार्यो बिसुख तनयो विष्टि कृत् सूर्य पुत्रे ॥ १८॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  19. 17.19 संस्कृत

    संस्कृत

    स्वन्तः प्रत्ययितो नरेन्द्र भवने सत् पुत्र जायाधनो जीव क्षेत्र गते अर्कजे पुर बल ग्रामाग्र नेताथ वा । अन्य स्त्री धन संवृतः पुर बल ग्रामाग्रणीर्मन्ददृक् स्व क्षेत्रे मलिनः स्थिरार्थ विभवो भोक्ता च जातः पुमान् ॥ १९॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  20. 17.20 संस्कृत

    संस्कृत

    शिशिर कर समागमेक्षणानां सदृश फलं प्रवदन्ति लग्न जातम् । फलम् अधिकम् इदं यद् अत्र भावाद् भवन भ नाथ गुणैर्विचिन्तनीयम् ॥ २०॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

18 Niryāṇa — the manner of death (9)

  1. 18.1 संस्कृत

    संस्कृत

    चन्द्रे भूप बुधौ नृपोपम गुणी स्तेनोऽधनश्चाजगे निःस्वः स्तेन नृ मान्य भूपधनिनः प्रेष्यः कुजाद्यैर्गवि । नृस्थे अयो व्यवहारि पार्थिव बुधाभिस्तन्तु वायोऽधनो स्वऋक्षे योद्धृ कवि ज्ञ भूमि पतयोऽयो जीवि दृग् रोगिणौ ॥ १॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  2. 18.2 संस्कृत

    संस्कृत

    ज्योतिर्ज्ञाढ्य नरेन्द्र नापित नृ पक्ष्मेशा बुधाद्यैर्हरौ तद्वद् भूप चमूप नैपुणयुताः षष्ठे अशुभैः स्त्र्याश्रयः । जूके भूप सुवर्ण कार वणिजः शेषेक्षिते नैकृती कीटे युग्म पिता नतश्चरजको व्यङ्गोऽधनो भूपतिः ॥ २॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  3. 18.3 संस्कृत

    संस्कृत

    ज्ञात्युर्वीश जनाश्रयश्च तुरगे पापैः सद् अम्भः शठश्चात्युर्वीश नरेन्द्र पण्डितधनी द्रव्योन भूपो मृगे । भूपो भूप समोऽन्यदार निरतः शेषैश्च कुम्भ स्थिते हास्यज्ञो नृपतिर्बुधश्च झषगे पापश्च पापेक्षिते ॥ ३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  4. 18.4 संस्कृत

    संस्कृत

    होरेशऋक्षदलाश्रितैः शुभ करो दृष्टः शशी तद्गतस्त्र्यंशे तत् पतिभिः सुहृद् भवनगैर्वा वीक्षितः शस्यते । यत् प्रोक्तं प्रति राशि वीक्षण फलं तद्द्वादशांशे स्मृतं सूर्योद्यैरवलोकिते अपि शशिनि ज्ञेयं नवांशेष्वतः ॥ ४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  5. 18.5 संस्कृत

    संस्कृत

    आरक्षिको वधरुछिः कुशलो नियुद्धे भूपोऽर्थवान् कलह कृत् क्षितिजांश संस्थे । मूर्खोऽन्यदार निरतः सुकविः सितांशे सत् काव्य कृत् सुख परोऽन्य कलत्रगश्च ॥ ५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  6. 18.6 संस्कृत

    संस्कृत

    बौधे हि रङ्ग चर चौर कवीन्द्र मन्त्री गेय ज्ञ शिल्प निपुणः शशिनि स्थिते अंशे । स्वांशे अल्प गात्रधन लुब्ध तपस्वि मुख्यः स्त्रीपोऽप्यकृत्य निरतश्च निरीक्ष्यमाणम् ॥ ६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  7. 18.7 संस्कृत

    संस्कृत

    स क्रोधो नर पति संमतो निधीशः सिंहांशे प्रभुर सुतोऽतिहिंस्र कर्मा । जीवांशे प्रथित बलो रणोपदेष्टा हास्य ज्ञः सचिव विकाम वृद्ध शीलः ॥ ७॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  8. 18.8 संस्कृत

    संस्कृत

    अल्पापत्यो दुःखितः सत्यपि स्वे मानासक्तः कर्मणि स्वे अनुरक्तः । दुष्ट स्त्रीष्तः कृपणश्चार्कि भागे चन्द्रे भानौ तद्वद् इन्द्वादि दृष्टे ॥ ८॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  9. 18.9 संस्कृत

    संस्कृत

    वर्गोत्तम स्व परगेषु शुभं यद् उक्तं तत् पुष्ट मध्य लघुता शुभम् उत्क्रमेण । वीर्यान्वितोऽंशक पतिर्निरुणद्धि पूर्वं राशी क्षणस्य फलम् अंश फलं ददाति ॥ ९॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

19 Naṣṭa-jātaka — recovering a lost horoscope (11)

  1. 19.1 संस्कृत

    संस्कृत

    शूरः स्तब्धो विकल नयनो निर्घृणोऽर्के तनुस्थे मेषे स स्वस्तिमिर नयनः सिंह संस्थे निशाधः । नीचे अन्धोऽस्वः शशि गृह गते बुद्बुदाक्षः पतङ्गे भूरि द्रव्यो नृप हृतधनो वक्ररोगी द्वितीये ॥ १॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  2. 19.2 संस्कृत

    संस्कृत

    मति विक्रमांस्तृतीयगे अर्के विसुखः पीडित मानशश्चतुर्थे । असुतो धन वर्जितस्त्रिकोणे बलवाञ् छत्रु जितश्च शत्रु याते ॥ २॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  3. 19.3 संस्कृत

    संस्कृत

    स्त्रीभिर्गतः परिभवं मदगे पतङ्गे स्वल्पात्मजो निधनगे विकलेक्षणश्च । धर्मे सुतार्थ सुख भाक् सुख शौर्य भाक् खे लाभे प्रभूतधनवान् पतितस्तु रिःफे ॥ ३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  4. 19.4 संस्कृत

    संस्कृत

    मूकोन्मत्त जडान्ध हीन बधिर प्रेष्याः शशाङ्कोदये स्वऋक्षजोच्च गते धनी बहु सुतः स स्वः कुटुम्बी धने । हिंस्रो भ्रातृ गते सुखे स तनये तत् प्रोक्त भावान्वितो नैकारिर्मृदु काय वह्नि मदनस्तीक्ष्णोऽलसश्चारिगे ॥ ४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  5. 19.5 संस्कृत

    संस्कृत

    ईर्षुस्तीव्र मदो मदे बहु मतिर्व्याध्यर्दितश्चाष्टमे सौभाग्यात्मज मित्र बन्धु धन भाग् धर्म स्थिते शीतगौ । निष्पत्तिं समुपैति धर्मधनधी शौर्यैर्युतः कर्मगे क्यातो भाव गुणान्वितो भव गते क्षुद्रोऽङ्ग हीनो व्यये ॥ ५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  6. 19.6 संस्कृत

    संस्कृत

    लग्ने कुजे क्षत तनुर्धनगे कद् अन्नो धर्मे अघवान् दिन कर प्रतिमोऽन्य संस्थः । विद्वान् धनी प्रखल पण्डित मन्त्र्यशत्रुर्धर्मज्ञ विश्रुत गुणः परतोऽर्कवज् ज्ञे ॥ ६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  7. 19.7 संस्कृत

    संस्कृत

    विद्वान् सुवाक्यः कृपणः सुखी च धी मान शत्रुः पितृतोऽधिकश्च । नीचस्तपस्वी सधनः स लाभः खलश्च जीवे क्रमशो विलग्नात् ॥ ७॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  8. 19.8 संस्कृत

    संस्कृत

    स्मर निपुणः सुखितश्च विलग्ने प्रिय कलहोऽस्त गते सुरतेप्सुः । तनय गते सुखितो भृगु पुत्रे गुरु वदतोऽन्य गृहे सधनोऽन्त्ये ॥ ८॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  9. 19.9 संस्कृत

    संस्कृत

    अदृष्टार्थो रोगी मदन वशगोऽत्यन्त मलिनः शिशुत्वे पीडार्तः सवितृ सुत लग्नेत्यलस वाक् । गुरु स्वऋक्षोच्चस्थे नृ पति सदृशो ग्राम पुरपः सुविद्वांश्चार्वङ्गो दिन कर समोऽन्यत्र कथितः ॥ ९॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  10. 19.10 संस्कृत

    संस्कृत

    सुहृद् अरि परकीय स्वऋक्ष तुङ्ग स्थितानां फलम् अनुपरिचिन्त्यं लग्नदेहादि भावैः । समुपचय विपत्ती सौम्य पापेषु सत्यः कथयति विपरीतं रिःफ षष्ठाष्ट भेषु ॥ १०॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  11. 19.11 संस्कृत

    संस्कृत

    उच्च त्रिकोण स्व सुह्ऱ्च्छत्रु नीच गृहार्कगैः । शुभं सम्पूर्ण पादोनदल पादाल्प निष्फलम् ॥ ११॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

20 Draikkāṇa — the decanates (10)

  1. 20.1 संस्कृत

    संस्कृत

    कुल सम कुल मुख्य बन्धु पूज्याधनि सुखि भोगि नृपाः स्व भैक वृद्ध्या । पर विभव सुहृत् स्व बन्धु पोष्या गणप बलेश नृपाश्च मित्र भेषु ॥ १॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  2. 20.2 संस्कृत

    संस्कृत

    जनयति नृपम् एकोऽप्युच्चगो नित्रदृष्टः प्रचुरधन समेतं मित्रयोगाच्च सिद्धम् । विधन विसुख मूढ व्याधितो बन्ध तप्तो वधदुरित समेतः शत्रु नीचऋक्षगेषु ॥ २॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  3. 20.3 संस्कृत

    संस्कृत

    न कुम्भ लग्नं शुभम् आह सत्यो न भाग भेदाद् यवना वदन्ति । कस्यांश भेदो न तथास्ति राशेरतिप्रसङ्गस्त्विति विष्णु गुप्तः ॥ ३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  4. 20.4 संस्कृत

    संस्कृत

    यातेष्वसत् स्व सम भेषु दिनेश होरां ख्यातो महोद्यम बलार्थयुतोऽतितेजाः । चान्द्रीं शुभेषु युजि मार्दव कान्ति सौख्य सौभाग्यधी मधुर वाक्ययुतः प्रजातः ॥ ४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  5. 20.5 संस्कृत

    संस्कृत

    तास्वेव होरा स्व परऋक्षगेषु ज्ञेया नराः पूर्व गणेषु मध्याः । व्यत्यस्त होरा भवन स्थितेषु मर्त्या भवन्त्युक्त गुणैर्विहीनाः ॥ ५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  6. 20.6 संस्कृत

    संस्कृत

    कल्याणरूप गुणम् आत्म सुह्ऱ्द् दृकोणे चन्द्रोऽन्यगस्तदधिनाथ गुणं करोति । व्यालोद्ययायुध चतुश्चरणाण्डजेषु तीक्ष्णोऽतिहिंस्र गुरु तल्परतोऽटनश्च ॥ ६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  7. 20.7 संस्कृत

    संस्कृत

    स्तेनो भोक्ता पण्डिताढ्यो नरेन्द्रः क्लीबः शूरो विष्टिकृद् दास वृत्तिः । पापो हिंस्रोऽभीश्च वर्गोत्तमांशेष्वेषाम् ईषाराशिवद् द्वादशांशैः ॥ ७॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  8. 20.8 संस्कृत

    संस्कृत

    जायान्वितो बल विभूषण सत्त्वयुक्तोस्तेजोऽतिसाहसयुतश्च कुजे स्व भागे । रोगी मृत स्वयुवतिर्विषमोऽन्यदारो दुःखी परिच्छदयुतो मलिनोऽर्क पुत्रे ॥ ८॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  9. 20.9 संस्कृत

    संस्कृत

    स्वांशे गुरौ धनयशः सुख बुद्धि युक्तास्तेजस्वि पूज्य निरुग् उद्यम भोगवन्तः । मेधा कलाक पट काव्य विवाद शिल्प शास्त्रार्थ साहसयुताः शशिजे अतिमान्याः ॥ ९॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  10. 20.10 संस्कृत

    संस्कृत

    स्वे त्रिंशांशे बहु सुत सुखारोग्य भाग्यार्थरूपः शुक्रे तीक्ष्णः सुललित वपुः सुप्रकीर्णेन्द्रियश्च । शूर स्तब्धौ विषम वधकौ सद् गुणाढ्यौ सुखिजौ चार्वङ्गे अष्टौ रवि शशि युतेष्वार पूर्वांशकेषु ॥ १०॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

21 Various results (6)

  1. 21.1 संस्कृत

    संस्कृत

    स्वऋक्ष तुङ्ग मूल त्रिकोणगाः कण्टकेषु यावन्ताश्रिताः । सर्वैव ते अन्योन्य कारकाः कर्मगस्तु तेषां विशेषतः ॥ १॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  2. 21.2 संस्कृत

    संस्कृत

    कर्कटोदय गते यथोडुपे स्वोच्चगाः कुजयमार्क सूरयः । कारका निगदिताः परस्परं लग्नगस्य सकलोऽम्बराम्बुगः ॥ २॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  3. 21.3 संस्कृत

    संस्कृत

    स्व त्रिकोणोच्चगो हेतुरन्योन्यं यदि चर्मगः । सुहृत् तद्गुण सम्पन्नः कारकश्चापि स स्मृतः ॥ ३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  4. 21.4 संस्कृत

    संस्कृत

    शुभं वर्गोत्तमे जन्म वेशि स्थाने च सद् गृहे । अशून्येषु च केन्द्रेषु कारकाख्य ग्रहेषु च ॥ ४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  5. 21.5 संस्कृत

    संस्कृत

    मध्ये वयसः सुख प्रदाः केन्द्रस्था गुरु जन्म लग्नपाः । पृष्ठोभयकोदयऋक्षगास्त्वन्ते अन्तः प्रथमेषु पाकदाः ॥ ५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  6. 21.6 संस्कृत

    संस्कृत

    दिन कररुधिरौ प्रवेष काले गुरु भृगुजौ भवनस्य मध्ययातौ । रवि सुत शशिनौ विनिर्गमस्थौ शशि तनयः फलदस्तु सर्व कालम् ॥ ६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

22 Rāśi-śīla — the temperament of the signs (17)

  1. 22.1 संस्कृत

    संस्कृत

    लग्नात् पुत्र कलत्र भे शुभ पति प्राप्ते अथ वालोकिते चन्द्राद् वा यदि सम्पद् अस्ति हि तयोर्ज्ञेयोऽन्यथा संभवः । पाथोनोदयगे रवौ रवि सुतो मीन स्थितो दारहा पुत्र स्थान गतश्च पुत्र मरणं पुत्रोऽवनेर्यच्छति ॥ १॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  2. 22.2 संस्कृत

    संस्कृत

    उग्र ग्रहैः सित चतुरस्र संस्थितैर्मध्य स्थिते भृगु तनये अथ वा उग्रयोः । सौम्य ग्रहैरसहित संनिरीक्षिते जाया वधो दहन निपात पाशजः ॥ २॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  3. 22.3 संस्कृत

    संस्कृत

    लग्नाद् व्ययारि गतयोः शशि तिग्मरश्म्योः पत्न्या सहैक नयनस्य वदन्ति जन्म । द्यूनस्थयोर्नवम पञ्चम संस्थयोर्वा शुक्रार्कयोर्विकलदारम् उशन्ति जातम् ॥ ३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  4. 22.4 संस्कृत

    संस्कृत

    कोणोदये भृगु तनये अस्त चक्र संधौ वन्ध्या पतिर्यदि न सुतऋक्षम् इष्टयुक्तम् । पाप ग्रहैर्व्यय मद लग्नराशि संस्थैः क्षीणे शशिन्यसुत कलत्र जन्मधीस्थे ॥ ४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  5. 22.5 संस्कृत

    संस्कृत

    असित कुजयोर्वर्गे अस्तस्थे सिते तदवेक्षिते परयुवतिगस्तौ चेत् सेन्दु स्त्रिया सह पुंश्चलः । भृगुज शशिनोरस्ते अभार्यो नरो विसुतोऽपि वा परिणत तनू नृ स्त्र्योर्दृष्टौ शुभैः प्रमदा पती ॥ ५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  6. 22.6 संस्कृत

    संस्कृत

    वंश च्छेत्ता ख मद सुखगैश्चन्द्रदैत्येज्य पापैः शिल्पी त्र्यंशे शशि सुतयुते केन्द्र संस्थार्कि दृष्टे । दास्यां जातो दिति सुत गुरौ रिःफगे सौर भागे नीचोऽर्केन्द्र्वोर्मदन गतयोर्दृष्टयोः सूर्यजेन ॥ ६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  7. 22.7 संस्कृत

    संस्कृत

    पापालोकितयोः सितावनिजयोरस्तस्थयोर्वाध्यरुक् चन्द्रे कर्कट वृश्चिकांशक गते पापैर्युते गुह्यरुक् । श्वि त्री रिःफधनस्थयोरशुभयोश्चन्द्रोदये अस्ते रवौ चन्द्रे खे अवनिजे अस्तगे च विकलो यद्यर्कजो वेशिगः ॥ ७॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  8. 22.8 संस्कृत

    संस्कृत

    अन्तः शशिन्यशुभयोर्मृगगे पतङ्गे श्वास क्षय प्लिहक विद्रधि गुल्म भाजः । शोषी परस्पर गृहांश गयोर्रवीन्द्वोः क्षेत्रे अथ वा युगपद् एकगयोः कृशो वा ॥ ८॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  9. 22.9 संस्कृत

    संस्कृत

    चेन्द्रे अश्वि मध्य झष कर्कि मृगाज भागे कुष्ठी स मन्दरुधिरे तदवेक्षिते वा । यातैस्त्रिकोणम् अलि कर्कि वृषैर्मृगे च कुष्ठी च पाप सहितैरवलोकितैर्वा ॥ ९॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  10. 22.10 संस्कृत

    संस्कृत

    निधनारि धन व्यय स्थितारवि चन्द्रारयमा यथा तथा । बलवद् ग्रहदोष कारणैर्मनुजानां जनयन्त्यनेत्रताम् ॥ १०॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  11. 22.11 संस्कृत

    संस्कृत

    नवमाय तृतीयधी युता न च सौम्यैरशुभा निरीक्षिताः । नियमाच्छ्रवणोपघातदारद वैकृत्य कराश्च सप्तमे ॥ ११॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  12. 22.12 संस्कृत

    संस्कृत

    उदयत्युडुपे सुरास्यगे स पिशाचोऽशुभयोस्त्रिकोणयोः । स उपप्लव मण्डले रवावुदयस्थे नयनापवर्जितः ॥ १२॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  13. 22.13 संस्कृत

    संस्कृत

    संस्पृष्टः पवनेन मन्दगयुते द्यूने विलग्ने गुरौ स उन्मादोऽवनिजे स्थिते अस्त भवने जीवे विलग्नाश्रिते । तद्वत् सूर्य सुतोदये अवनि सुते धर्मात्मजद्यूनगे जातो वास सहस्ररश्मि तनये क्षीणे व्यये शीतगौ ॥ १३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  14. 22.14 संस्कृत

    संस्कृत

    राश्यंशपोष्ण कर शीत करामरेज्यैर्नीचाधिपांश गतैररि भागगैर्वा । एभ्योऽल्प मध्य बहुभिः क्रमशः प्रसूता ज्ञेयाः स्युरभ्युपगम क्रय गर्भदासाः ॥ १४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  15. 22.15 संस्कृत

    संस्कृत

    विकृतदशनः पापैर्दृष्टे वृषाज हयोदये खलतिरशुभ क्षेत्रे लग्ने हये वृष भे अपि वा । नवम सुतगे पापैर्दृष्टे रवावदृढेक्षणो दिन कर सुते नैक व्याधिः कुजे विकलः पुमान् ॥ १५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  16. 22.16 संस्कृत

    संस्कृत

    व्यय सुतधनधर्मगैरसौम्यैर्भवन स मान निबन्धनं विकल्प्यम् । भुज गनि गड पाशभृद् दृकाणैर्बलवद् असौम्य निरीक्षितैश्च तद्वत् ॥ १६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  17. 22.17 संस्कृत

    संस्कृत

    पुरुष वचनोऽपस्मारार्तः क्षयी च निशा पतौ सरवि तनये वक्रालोकं गते परिवेषगे । रवि यम कुजैः सौम्यादृष्टैर्नभः स्थलम् आश्रितैर्भृतक मनुजः पूर्वोद्दिष्टैर्वराधम मध्यमाः ॥ १७॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

23 Prakīrṇaka — miscellany (16)

  1. 23.1 संस्कृत

    संस्कृत

    यद् यत् फलं नर भवे क्षमम् अङ्गनानां तत् तद्वदेत् पतिषु वा सकलं विधेयम् । तासां तु भर्तृ मरणं निधने वपुस्तु लग्नेन्दुगं सुभगतास्तमये पतिश्च ॥ १॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  2. 23.2 संस्कृत

    संस्कृत

    युग्मेषु लग्न शशिनोः प्रकृति स्थिता स्त्री सच्छील भूषणयुता शुभदृष्टयोश्च । ओजस्थयोश्च मनुजाक्ऱ्ति शीलयुक्ता पापा च पापयुतेक्षितयोर्गुणोना ॥ २॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  3. 23.3 संस्कृत

    संस्कृत

    कन्याइवदुष्टा व्रजतीहदास्यं साध्वी स माया कुचरित्रयुक्ता । भूम्यात्मजऋक्षे क्रमशोऽंशकेषु वक्रार्कि जीवेन्दुज भार्गवानम् ॥ ३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  4. 23.4 संस्कृत

    संस्कृत

    दुष्टा पुनर्भूः स गुणा कलाज्ञा ख्याता गुणैश्चासुर पूजितऋक्षे । स्यात् कापटी क्लीब समा सती च बौधे गुणाढ्या प्रविकीर्णकामा ॥ ४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  5. 23.5 संस्कृत

    संस्कृत

    स्व च्छन्दा पति घातिनी बहु गुणा शिल्पिन्यसाध्वीन्दु भे । न्राचारा कुलटार्क भे नृप वधूः पुंश्चेष्टितागम्यगा । जैवेनैकगुणाल्परत्यतिगुणा विज्ञानयुक्ता सती । दासी नीचरतार्कि भे पति रतादुष्टा प्रजा स्वांशकैः ॥ ५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  6. 23.6 संस्कृत

    संस्कृत

    शशि लग्न समायुक्तैः फलं त्रिंशांशकैरिदम् । बलाबल विकल्पेन तयोरुक्तं विचिन्तयेत् ॥ ६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  7. 23.7 संस्कृत

    संस्कृत

    दृक् संस्थावसित सितौ परस्परांशे शौक्रे वा यदि घटराशि संभवोऽंशः । स्त्रीभिः स्त्री मदन विषानल प्रदीप्तं संशान्तिं नयति नराकृति स्थिताभिः ॥ ७॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  8. 23.8 संस्कृत

    संस्कृत

    शून्ये कापुरुषो बले अस्त भवने सौम्य ग्रहावीक्षिते क्लीवोऽस्ते बुध मन्दयोश्चर गृहे नित्यं प्रवासान्वितः । उत्सृष्टारविणा कुजेन विधवा वाल्ये अस्तराशि स्थिते कन्याइवाशुभ वीक्षिते अर्क तनये द्यूने जरां गच्छति ॥ ८॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  9. 23.9 संस्कृत

    संस्कृत

    आग्नेयैर्विधवास्तराशि सहितैर्मिश्रैः पुनर्भूर्भवेत् क्रूरे हीन बले अस्तगे स्व पतिना सौम्येक्षिते प्रोज्झिता । अन्योन्यांशगयोः सितावनिजयोरन्य प्रसक्ताङ्गना द्यूने वा यदि शीतरश्मि सहितौ भर्तुस्तदानुज्ञया ॥ ९॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  10. 23.10 संस्कृत

    संस्कृत

    सौरारऋक्षे लग्नगे सेन्दु शुक्रे मत्रा सार्द्धं बन्धकी पापदृष्टे । कौजे अस्तांशे सौरिणा व्याधि योनिश्चारु श्रोणी वल्लभा सद् ग्रहांशे ॥ १०॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  11. 23.11 संस्कृत

    संस्कृत

    वृद्धो मूर्खः सूर्यजऋक्षे अंशके वा स्त्री लोलः स्यात् क्रोधनश्चावनेये । शौक्रे कान्तोऽतीव सौभाग्ययुक्तो विद्वान् भर्ता नैपुण ज्ञश्च बौधे ॥ ११॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  12. 23.12 संस्कृत

    संस्कृत

    मदन वश गतो मृदुश्च चान्द्रे त्रि दश गुरौ गुणवान् जितेन्द्रियश्च । अतिमृदु रति कर्म कृच्च सौर्ये भवति गृहे अस्तमय स्थिते अंशके वा ॥ १२॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  13. 23.13 संस्कृत

    संस्कृत

    ईर्ष्यान्विता सुख परा शशि शुक्र लग्ने ज्ञेन्द्वोः कलासु निपुणा सुखिता गुणाढ्या । शुक्र ज्ञयोस्तु रुचिरा सुभगा कलाज्ञा त्रिष्वप्यनेक वसु सौख्य गुणा शुभेषु ॥ १३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  14. 23.14 संस्कृत

    संस्कृत

    क्रूरे अष्टमे विधवता निधनेश्वरोऽंशे यस्य स्थितो वयसि तस्य समे प्रदिष्टा । सत् स्वर्थगेषु मरणं स्वयम् एव तस्याः कन्यालिगो हरिषु चाल्प सुतत्वम् इन्दौ ॥ १४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  15. 23.15 संस्कृत

    संस्कृत

    सौरे मध्य बले बलेनरहितैः शीतांशु शुक्रेन्दुजैः शेषैर्वीर्य समन्वितैः परुषिणी यद्योजराश्युद्गमः । जीवार स्फुजि दैन्दवेषु बलिषु प्राग् लग्नराशौ समे विख्याता भुवि नैक शास्त्र निपुणा स्त्री ब्रह्म वादिन्यपि ॥ १५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  16. 23.16 संस्कृत

    संस्कृत

    पापे अस्ते नवम गत ग्रहस्य तुल्यां प्रव्रज्यां युवतिरुपैत्यसंशयेन । उद्वाहे वरण विधौ प्रदान काले चिन्तायाम् अपि सकलं विधेयम् एतत् ॥ १६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

24 Bhāva — the houses (15)

  1. 24.1 संस्कृत

    संस्कृत

    मृत्युर्मृत्यु गृहेक्षणेन बलिभिस्तद्धातु कोपोद्भवस्तत् संयुक्त भ गात्रजो बहु भवो वीर्यान्वितैर्भूरिभिः । अग्न्यंब्वायुधजो ज्वरामय कृतस्तृट् क्षुत् कृतश्चाष्टमे सूर्याद्यैर्निधने चरादिषु पर स्वाध्व प्रदेशेष्विति ॥ १॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  2. 24.2 संस्कृत

    संस्कृत

    शैलाग्राभिहतस्य सूर्य कुजयोर्मृत्युः ख बन्धुस्थयोः कूपे मन्द शशाङ्क भूमि तनयैर्बन्ध्वस्त कर्म स्थितैः । कन्यायां स्व जनाद् धिमोष्ण करयोः पाप ग्रहैर्दृष्टयोः स्यातां यद्युभयोदये अर्क शशिनौ तोये तदा मज्जितः ॥ २॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  3. 24.3 संस्कृत

    संस्कृत

    मन्दे कर्कटगे जलोदर कृतो मृत्युर्मृगाङ्के मृगे शस्त्राग्नि प्रभवः शशिन्यशुभयोर्मध्ये कुज ऋक्षे स्थिते । कन्यायां रुधिरोत्थ शोष जनितस्तद्वत् स्थिते शीतगौ सौरऋक्षे यदि तद्वद् एव हिमगौ रज्ज्वग्नि पातैः कृतः ॥ ३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  4. 24.4 संस्कृत

    संस्कृत

    बन्धाद् धी नवमस्तयोरशुभयोः सौम्य ग्रहाद् दृष्टयोर्द्रेष्काणैश्च स पाश सर्प निगडैश्छिद्र स्थितैर्बन्धतः । कन्यायाम् अशुभान्विते अस्तमयगे चन्द्रे सिते मेषगे सूर्ये लग्न गते च विद्धि मरणं स्त्री हेतुकं मन्दिरे ॥ ४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  5. 24.5 संस्कृत

    संस्कृत

    शूलोद्भिन्न तनुः सुखे अवनि सुते सूर्ये अपि वा खे यमे स प्रक्षीण हिमांशुभिश्च युगपत् पापैस्त्रिकोणाद्यगैः । बन्धुस्थे चरवौ वियत्यवनिजे क्षीणेन्दु संवीक्षिते काष्ठेनाभिहतः प्रयाति मरणं सूर्यात्मजेनेक्षिते ॥ ५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  6. 24.6 संस्कृत

    संस्कृत

    रन्ध्रास्पदाङ्ग हिबुकैर्लगुडाहताङ्गः प्रक्षीण चन्द्ररुधिरार्कि दिनेशयुक्तैः । तैरेव कर्म नवमोदय पुत्र संस्थैर्धूमाग्नि बन्धन शरीर निकुट्टनान्तः ॥ ६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  7. 24.7 संस्कृत

    संस्कृत

    बन्ध्वस्त कर्म सहितैः कुज सूर्य मन्दैर्निर्याणम् आयुध शिखि क्षिति पाल कोपात् । सौरेन्दु भूमि तनयैः स्व सुखास्पदस्थैर्ज्ञेयः क्षत कृमि कृतश्च शरीर घातः ॥ ७॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  8. 24.8 संस्कृत

    संस्कृत

    खस्थे अर्के अवनिजे रसातल गते यान प्रपातद् वधो यन्त्रोत्पीडनजः कुजे अस्तमयगे सौरेन्दुनाभ्युद्गमे । विण् मध्ये रुधिरार्कि शीत किरणैर्जूकाज सौरऋक्षगैर्याते वा गलितेन्दु सूर्यरुधिरैर्व्योमास्त बन्ध्वाह्वयान् ॥ ८॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  9. 24.9 संस्कृत

    संस्कृत

    वीर्यान्वित वक्र वीक्षिते क्षीणेन्दौ निधन स्थिते अर्कजे । गुह्योद्भवरोग पीडया मृत्युः स्यात् कृमि शस्त्रदाहजः ॥ ९॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  10. 24.10 संस्कृत

    संस्कृत

    अस्ते रवौ सरुधिरे निधने अर्क पुत्रे क्षीणे रसातल गते हिमगौ खगान्तः । लग्नात्मजाष्टम तपःस्विन भौम मन्द चन्द्रैस्तु शैल शिखराशनि कुड्य पातैः ॥ १०॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  11. 24.11 संस्कृत

    संस्कृत

    द्वाविंशः कथितस्तु कारणं द्रेष्काणो निधनस्य सूरिभिः । तस्याधिपतिर्भवोऽपि वा निर्याणं स्व गुणैः प्रयच्छति ॥ ११॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  12. 24.12 संस्कृत

    संस्कृत

    होरा नवांशकपयुक्त स मान भूमौ योगेक्षणादिभिरतः परिकल्प्यम् एतत् । मोहस्तु मृत्यु समये अनुदितांश तुल्यः स्वेशेक्षिते द्वि गुणितस्त्रिगुणः शुभैश्च ॥ १२॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  13. 24.13 संस्कृत

    संस्कृत

    दहन जल विमिश्रैर्भस्म संक्लेद शोषैर्निधन भवन संस्थैर्व्याल वर्गैर्विडन्तः । इति शव परिणामश्चिन्तनीयो यथोक्तः पृथुवि रचित शास्त्राद् गत्यनूकादि चिन्त्यम् ॥ १३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  14. 24.14 संस्कृत

    संस्कृत

    गुरुरुडु पति शुक्रौ सूर्य भौमौ यम ज्ञौ विबुध पितृ तिरश्चो नारकीयांश्च कुर्युः । दिन कर शशि वीर्याधिष्ठितात् त्र्यंश नाथात् प्रवर सम निकृष्टास्तुङ्ग ह्रसाद् अनूके ॥ १४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  15. 24.15 संस्कृत

    संस्कृत

    गतिरपि रिपु रन्ध्र त्र्यंशपोऽस्तस्थितो वा गुरुरथरिपु केन्द्र च्छिद्रगः स्वोच्च संस्थः । उदयति भवने अन्त्ये सौम्य भागे च मोक्षो भवति यदि बलेन प्रोज्झितास्तत्र शेषाः ॥ १५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

25 Karmādhyāya — deeds (17)

  1. 25.1 संस्कृत

    संस्कृत

    आधान जन्मापरिबोध काले सम्पृच्छतो जन्म वदेद् विलग्नात् । पूर्वापरार्धे भवनस्य विन्द्याद् भानावुदग् दक्षिणगे प्रसूतिम् ॥ १॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  2. 25.2 संस्कृत

    संस्कृत

    लग्न त्रिकोणेषु गुरुस्त्रि भागैर्विकल्प्य वर्षाणि वयोऽनुमानात् । ग्रीष्मोऽर्क लग्ने कथितास्तु शेषैरन्यायनर्तावृतुरर्क चारात् ॥ २॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  3. 25.3 संस्कृत

    संस्कृत

    चन्र ज्ञ जीवाः परिवर्तनीयाः शुक्रार मन्दैरयने विलोमे । द्रेष्काण भागे प्रथमे तु पूर्वो मासोऽनुपाताच्च तिथिर्विकल्प्यः ॥ ३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  4. 25.4 संस्कृत

    संस्कृत

    अत्रापि होरा पटवो द्विजेन्द्राः सूर्यांश तुल्यां तिथिम् उद्दिशन्ति । रात्रि द्यु संज्ञेषु विलोम जन्म भागैश्च वेलाः क्रमशो विकल्प्याः ॥ ४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  5. 25.5 संस्कृत

    संस्कृत

    के चिच्छशाङ्काध्युषितान् नवांशच्छुक्लान्त संज्ञं कथयन्ति मासम् । लग्न त्रिकोणोत्तम वीर्ययुक्तं सम्प्रोच्यते अङ्गाल भनादिभिर्वा ॥ ५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  6. 25.6 संस्कृत

    संस्कृत

    यावान् गतः शीत करो विलग्नाच्चन्द्राद् वदेत् तावति जन्मराशिः । मीनोदये मीनयुगं प्रदिष्टं भक्ष्याहृताकाररुतैश्च चिन्त्यम् ॥ ६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  7. 25.7 संस्कृत

    संस्कृत

    होरा नवांश प्रतिमं विलग्नं लग्नाद् रविर्यावति च दृकाणे । तस्माद् वदेत् तावति वा विलग्नं प्रष्टुः प्रसूताविति शास्त्रम् आह ॥ ७॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  8. 25.8 संस्कृत

    संस्कृत

    जन्मादिशेल् लग्नगे वीर्यगे वा छायाङ्गुल घ्नेर्कहते अवशिष्टम् । आसीन सुप्तोत्थित तिष्ठताभं जाया सुखाज्ञोदयगं प्रदिष्टम् ॥ ८॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  9. 25.9 संस्कृत

    संस्कृत

    गो सिंहौ जितुमाष्टमौ क्रिय तुले कन्या मृगौ च क्रमात् संवर्ग्यो दशकाष्ट सप्त विषयैः शेषाः स्व संख्या गुणाः । जीवारास्फुजि दैन्दवाः प्रथमवच्छेषा ग्रहाः सौम्यवद् राशीनं नियतो विधिर्ग्रहयुतैः कार्या च तद्वर्गणा ॥ ९॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  10. 25.10 संस्कृत

    संस्कृत

    सप्ताहतं त्रि घन भाजित शेषम् ऋक्षं दत्त्वाथ वा नव विशोध्य न वाथ वास्मात् । एवं कलत्र सहजात्मज शत्रु भेभ्यः प्रष्टुर्वदेद् उदयराशि वशेन तेषाम् ॥ १०॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  11. 25.11 संस्कृत

    संस्कृत

    वर्षऋतु मास तिथयो द्यु निशं ह्यूडूनि वेलोदये ऋक्ष नव भाग विकल्पनाः स्युः । भूयो दशादि गुणिताः स्व विकल्प भक्ता वर्षादयो नवकदान विशोधनाभ्याम् ॥ ११॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  12. 25.12 संस्कृत

    संस्कृत

    विज्ञेयादशकेष्वब्दाऋतु मासास्तथैव च । अष्टकेष्वपि मासाद् अर्धास्तिथयश्च तथा स्मृताः ॥ १२॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  13. 25.13 संस्कृत

    संस्कृत

    दिवारात्रि प्रसूतिं च नक्षत्रानयनं तथा । सप्तकष्वपि वर्गेषु नित्यम् एवोपलक्षयेत् ॥ १३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  14. 25.14 संस्कृत

    संस्कृत

    वेलाम् अथ विलग्नं च होराम् अंशकम् एव च । पञ्चकेषु विजानीयान् नष्ट जातक सिद्धये ॥ १४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  15. 25.15 संस्कृत

    संस्कृत

    संस्कार नाम मात्राद्वि गुणा छायाङ्गुलैः समायुक्ताः । शेषं त्रि नवक भक्तान् नक्षत्रं तद्धनिष्ट्ःआदि ॥ १५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  16. 25.16 संस्कृत

    संस्कृत

    द्वि त्रि चतुर्दशदश तिथि सप्त त्रि गुणा नवाष्ट चेन्द्राद्याः । पञ्चदशघ्नास्तद्दिङ् मुखान्विता भधनिष्ठादि ॥ १६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  17. 25.17 संस्कृत

    संस्कृत

    इति नष्ट जातकम् इदं बहु प्रकारं मया विनिर्दिष्टम् । ग्राह्यम् अतः सच्छिष्यैः परीक्ष्ययन्ताद् यथा भवति ॥ १७॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

26 Naṣṭa-jātaka (continued) (36)

  1. 26.1 संस्कृत

    संस्कृत

    कट्यां सित वस्त्र वेष्टितः कृष्णः शक्तेवाभिरक्षितुम् । रौद्रः परशुं समुद्यतं धत्ते रक्त विलोचनः पुमान् ॥ १॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  2. 26.2 संस्कृत

    संस्कृत

    रक्तम् अम्बरा भूषण भक्ष्य चिन्ता कुम्भाकृतिर्वाजि मुखी तृषार्ता । एकेन पादेन च मेष मध्ये द्रेष्काणरूपं यवनोपदिष्टम् ॥ २॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  3. 26.3 संस्कृत

    संस्कृत

    क्रूरः कलाज्ञः कपिलः क्रियार्थी भग्न व्रतोऽभ्युद्य तदण्ड हस्तः । रक्तानि वस्त्राणि बिभर्ति चण्डो मेषे तृतीयः कथितस्त्रि भागः ॥ ३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  4. 26.4 संस्कृत

    संस्कृत

    कुञ्चित लून कचा घटदेहादग्ध पटा तृषिताशन चित्ता । आभरणान्यभिवाञ्छति नारी रूपम् इदं वृष भे प्रथमस्य ॥ ४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  5. 26.5 संस्कृत

    संस्कृत

    क्षेत्रधान्य गृहधेनु कलाज्ञो लाङ्गले स शकटे कुशलश्च । स्कन्धम् उद्वहति गो पति तुल्यं क्षुत् परोऽज वदनो मल वासा ॥ ५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  6. 26.6 संस्कृत

    संस्कृत

    द्विप सम कायः पाण्डुरदंष्ट्रः शरभ समाङ्घ्रिः पिङ्गल मूर्तिः । अवि मृग लोभ व्याकुल चित्तो वृषभ वनस्य प्रान्त गतोऽयम् ॥ ६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  7. 26.7 संस्कृत

    संस्कृत

    सूच्याश्रयं समभिवाञ्छति कर्म नारी रूपान्विताभरण कार्य कृतादरा च । हीन प्रजोच्छ्रित भुजऋतु मती त्रि भागम् आद्यं तृतीय भवनस्य वदन्ति तज्ज्ञाः ॥ ७॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  8. 26.8 संस्कृत

    संस्कृत

    उद्यान संस्थः कवची धनुष्माञ् छूरोऽस्त्रधारी गरुडानानाश्च । क्रीडात्मजालंकरणार्थ चिन्तां करोति मध्ये मिथुनस्यराशेः ॥ ८॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  9. 26.9 संस्कृत

    संस्कृत

    भूषितो वरुणवद् बहु रत्नो बद्ध तूण कवचः सधनुष्कः । नृत्त वादित कलासु च विद्वान् काव्य कृन् मिथुनराश्यवसाने ॥ ९॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  10. 26.10 संस्कृत

    संस्कृत

    पत्र मूल फल भृद् द्विप कायः कानने मलयगः शरभाङ्घ्रिः । क्रोड तुल्य वदनो हय कण्ठः कर्कटे प्रथमरूपम् उशन्ति ॥ १०॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  11. 26.11 संस्कृत

    संस्कृत

    पद्मार्चिता मूर्धनि भोगि युक्ता स्त्री कर्क शारण्य गता विरौति । शाखां पलाशस्य समाश्रिता च मध्ये स्थिता कर्कटकस्यराशेः ॥ ११॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  12. 26.12 संस्कृत

    संस्कृत

    भार्याभरणार्थम् अर्णवं नौस्थो गच्छति सर्प वेष्टितः । हैमैश्च युतो विभूषणैश्चिपिटास्याङ्त्य गतश्च कर्कटे ॥ १२॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  13. 26.13 संस्कृत

    संस्कृत

    शाल्मलेरुपरि गृध्र जम्बुकौ श्वा नरश्च मलिनाम्बरान्वितः । रौति मातृ पित्र्विपर्योजितः सिंहरूपम् इदम् आद्यम् उच्यते ॥ १३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  14. 26.14 संस्कृत

    संस्कृत

    हयाकृतिः पाण्डुर माल्य शेखरो बिभर्ति कृष्णाजिन कम्बलं नरः । दुरासदः सिंहेवात्त कार्मुको नताग्र नासो मृगराज मध्यमः ॥ १४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  15. 26.15 संस्कृत

    संस्कृत

    ऋक्षाननो वानर तुल्य चेष्टो बिभर्ति दण्डं फलम् आमिषं च । कूर्ची मनुष्यः कुटिलैश्च केशैर्मृगेश्वरस्यान्त्य गतस्त्रि भागः ॥ १५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  16. 26.16 संस्कृत

    संस्कृत

    पुष्प प्रपूर्णेन घटेन कन्या मल प्रदिग्धाम्बर संवृताङ्गी । वस्त्रार्थ संयोगम् अभीष्टमाना गुरोः कुलं वाञ्छति कन्याकाद्यः ॥ १६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  17. 26.17 संस्कृत

    संस्कृत

    पुरुषः प्रगृहीत लेखनिः श्यामो वस्त्र शिरा व्यायय कृत् । विपुलं च बिभर्ति कार्मुकं रोम व्याप्त तनुश्च मध्यमः ॥ १७॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  18. 26.18 संस्कृत

    संस्कृत

    गौरी सुधौताग्रदुकूल गुप्ता समुच्छ्रिता कुम्भ कटच्छुहस्ता । देवालयं स्त्री प्रयता प्रवृत्ता वदन्ति कन्यान्त्य गतस्त्रि भागः ॥ १८॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  19. 26.19 संस्कृत

    संस्कृत

    वीथ्यन्तरापण गतः पुरुषस्तुलावान् उन्मान मान कुशलः प्रतिमान हस्तः । भाण्डं विचिन्तयति तस्य च मूल्यम् एतद् रूपं वदन्ति यवनाः प्रथमं तुलायाः ॥ १९॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  20. 26.20 संस्कृत

    संस्कृत

    कलशं परिगृह्य विनिष्पतितुं समभीप्सति गृध्र मुखः पुरुषः । क्षुधितस्तृषितश्च कलत्र सुतान् मनसेति तुलाधर मध्य गतः ॥ २०॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  21. 26.21 संस्कृत

    संस्कृत

    विभीषयंस्तिष्ठति रत्न चित्रितो वने मृगान् काञ्चन तूण वर्म भृत् । फलामिषं वानररूपभृन् नरस्तुला वसाने यवनैरुदाहृतः ॥ २१॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  22. 26.22 संस्कृत

    संस्कृत

    वस्त्रैर्विहीनाभरणैश्च नारी महा समुद्रात् समुपैति कूलम् । स्थान च्युता सर्प निबद्ध पादा मनोरमा वृश्चिकराशि पूर्वः ॥ २२॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  23. 26.23 संस्कृत

    संस्कृत

    स्थान सुखान्यभिवाञ्छति नारी भऋतु कृते भुजगावृतदेहा । कच्छप कुम्भ स मान शरीरा वृश्चिक मध्यमरूपम् उशन्ति ॥ २३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  24. 26.24 संस्कृत

    संस्कृत

    पृथुल चिपिट कूर्म तुल्य वक्रः श्व मृग वराह सृगाल भीषकारी । अवति च मलयाकर प्रदेशं मृग पतिरन्त्य गतस्य वृश्चिकस्य ॥ २४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  25. 26.25 संस्कृत

    संस्कृत

    मनुष्य वक्रोऽश्व स मान कायो धनुर्विगृह्यायतम् आश्रमस्थः । क्रतूपयोज्यानि तपस्विनश्चररक्षाद्यो धनुषस्त्रि भागः ॥ २५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  26. 26.26 संस्कृत

    संस्कृत

    मनोरमा चम्पक हेम वर्णा भद्रासने तिष्ठति मध्यरूपा । समुद्ररत्नानि विघट्टयन्ती मध्य त्रि भागो धनुषः प्रदिष्टः ॥ २६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  27. 26.27 संस्कृत

    संस्कृत

    कूर्ची नरो हाटक चम्पकाभो वरासने दण्डधरो निषण्णः । कौशेयकान्युद्वहते अजिनं च तृतीयरूपं नवमस्यराशेः ॥ २७॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  28. 26.28 संस्कृत

    संस्कृत

    रोम चितो मकरोपमदंष्ट्रः सूकरकायस मान शरीरः । योक्त्रक जालक बन्धनधारी रौद्र मुखो मकर प्रथमस्तु ॥ २८॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  29. 26.29 संस्कृत

    संस्कृत

    कलास्वभिज्ञाब्जदलायताक्षी श्यामा विचित्राणि च मार्गमाणा । विभूषणालंकृत लोह कर्णा योषा प्रदिष्टा मकरस्य मध्ह्ये ॥ २९॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  30. 26.30 संस्कृत

    संस्कृत

    किन्नरोपम तनुः स कम्बलस्तूण चाप कवचैः समन्वितः । कुम्भम् उद्वहति रत्न चित्रितं स्कन्धगं मकरराशि पश्चिमः ॥ ३०॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  31. 26.31 संस्कृत

    संस्कृत

    रथोद्धता स्नेह मद्य जल भोजनागम व्याकुली कृत मनाः स कम्बलः । कोश कार वसनोऽजिनान्वितो गृध्र तुल्य वदनो घटादिगः ॥ ३१॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  32. 26.32 संस्कृत

    संस्कृत

    दग्धे शकटे स शाल्मले लोहान्याहरते अङ्गना वने । मलिनेन पटेन संव्ऱ्ता भाण्डैर्मूर्ध्नि गतैश्च मध्यमः ॥ ३२॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  33. 26.33 संस्कृत

    संस्कृत

    श्यामः सरोम श्रवणः किरीटी त्वक् पत्र निर्यास फलैर्बिभर्ति । भाण्डानि लोह व्यतिमिश्रितानि सञ्चारयन्त्यन्त गतो घटस्य ॥ ३३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  34. 26.34 संस्कृत

    संस्कृत

    स्रुग् भाण्ड मुक्तामणि शङ्ख मिस्रैर्व्याक्षिप्त हस्तः स विभूषणश्च । भार्या विभूषार्थम् अपां निधानं नावा प्लवत्यादि गतो झषस्य ॥ ३४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  35. 26.35 संस्कृत

    संस्कृत

    अत्युच्छ्रितध्वज पताकम् उपैति पोतं कूलं प्रयाति जलधेः परिवारयुक्ता । वर्णेन चम्पक मुखी प्रमदा त्रि भागो मीनस्य चैष कथितो मुनिभिर्द्वितीयः ॥ ३५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  36. 26.36 संस्कृत

    संस्कृत

    श्वभ्रान्तिके सर्प निवेष्टिताङ्गा वस्त्रैर्विहीनः पुरुषस्त्वटव्याम् । चौरानल व्याकुलितान्तरात्मा विक्रोशते अन्त्योपगतो झषस्य ॥ ३६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

27 Upasaṁhāra — conclusion (10)

  1. 27.1 संस्कृत

    संस्कृत

    राशि प्रभेदो ग्रहयोनि भेदो वियोनि जन्माथ निषेक कालः । जन्माथ सद्यो मरणं तथायुर्दशा विपाकोऽष्टक वर्ग संज्ञः ॥ १॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  2. 27.2 संस्कृत

    संस्कृत

    कर्माजीवो राजयोगाः खयोगाश्चान्द्रा योगाद् विग्रहाद्याश्च योगाः । प्रव्रजाथो राशि शीलानि द्ऱ्ष्टिर्भावस्तस्माद् आश्रयोऽथ प्रकीर्णः ॥ २॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  3. 27.3 संस्कृत

    संस्कृत

    नेष्टा योगा जातकं कामिनीनां निर्याणं स्यान् नेष्ट जन्मदृकाणः । अध्यायानां विंशतिः पञ्च युक्ता जन्मन्येतद् यात्रिकं चाभिधास्ये ॥ ३॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  4. 27.4 संस्कृत

    संस्कृत

    प्रश्नास्तिथिर्भं दिवसः क्षणश्च चन्द्रो विलग्नं त्वथ लग्न भेदः । शुद्धिर्ग्रहाणाम् अथ चाप वादो विमिश्रकाख्यं तनु वेपनं च ॥ ४॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  5. 27.5 संस्कृत

    संस्कृत

    अतः परं गुह्यक पूजनं स्यात् स्वप्नं ततः स्नान विधिः प्रदिष्टः । यज्ञो ग्रहाणाम् अथ निर्गमश्च क्रमाच्च दिष्टः शकुनोपदेशः ॥ ५॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  6. 27.6 संस्कृत

    संस्कृत

    विवाह कालः करणं ग्रहाणां प्रोक्तं पृथक् तद्विपुलाथ शाखा । स्कन्धैस्त्रिभिर्ज्योतिष संग्रहोऽयं मया कृतो दैव विदां हिताय ॥ ६॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  7. 27.7 संस्कृत

    संस्कृत

    पृथु विरचितम् अन्यैः शास्त्रम् एतत् समस्तं तदनु लघु मयेदं तत् प्रदेशार्थम् एव । कृतम् इह हि समर्थं धी विषाणामत्वे ममयदि हयद् उक्तं सज् जनैः क्षम्यतां तत् ॥ ७॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  8. 27.8 संस्कृत

    संस्कृत

    ग्रन्थस्यया प्रचरतोऽस्य विनाशम् एति केख्व्यात् बहु श्रित मुखाधिगम क्रमेण । यद् वा मया कुकृतम् अल्पम् इहाकृतं वा कार्यं तदत्र विदुषा परिहृत्यरागम् ॥ ८॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  9. 27.9 संस्कृत

    संस्कृत

    आदित्यदास तनयस्तदवाप्त बोधः कापित्थके सवितृ लब्ध वर प्रसादः । आवन्तिको मुनि मतान्यवलोक्य सम्यग् घोरां वराहमिहिरो रुचिरां चकार ॥ ९॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

  10. 27.10 संस्कृत

    संस्कृत

    दिन कर मुनि गुरु चरण प्रणिपात कृत प्रसाद मतिनेदम् । शास्त्रम् उपसंगृहीतं नमोऽस्तु पूर्व प्रनेतृभ्यः ॥ १०॥

    इस श्लोक के अंग्रेज़ी तथा हिन्दी अर्थ जोड़े जा रहे हैं।

सभी ग्रंथ

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