Vedic Horā वैदिक होरा Indian Institute of Vedic Science & Technology VedicHora.org चिकित्सा-ज्योतिष प्रतिवेदन

चिकित्सा ज्योतिष

आयुर्वेद-ज्योतिष की शास्त्रीय तालिकाएँ — कालपुरुष के अंग, ग्रहों के त्रिदोष एवं सप्तधातु, षष्ठ-सप्तम पापग्रहों से जैव-pH, तथा मणि-चिकित्सा। यहाँ प्रत्येक पंक्ति उसी शास्त्र-सन्दर्भ के साथ दिखती है जिससे वह ली गई है।

दो रास्ते, एक ही तालिका। जन्म-विवरण दीजिए तो इसी साइट का ग्रहगणित कुंडली बनाकर लग्न, दुःस्थान-स्थित ग्रह तथा चालू महादशा भर देता है; अथवा नीचे मैट्रिक्स स्वयं भरिए। भरने के बाद हर खाना आपके सुधार के लिए खुला रहता है, और गणना दोनों दशाओं में उन्हीं शास्त्रीय तालिकाओं से होती है।

यह चिकित्सा नहीं है। यहाँ कोई रोग-निदान नहीं होता और न कोई उपचार बदला जाना चाहिए — किसी भी लक्षण के लिए योग्य चिकित्सक से मिलें।

जन्म-विवरण से

निर्देशांक एवं समय-क्षेत्र
स्थान चुनते ही भर जाते हैं। अंतर वही है जो जन्म के समय लागू था, आज का नहीं — ज्ञात हो तो सुधार लीजिए।

जन्म-विवरण केवल इसी गणना के लिए भेजा जाता है और कहीं संग्रहीत नहीं होता।

मैट्रिक्स

लग्न बदलने पर भाव-राशि संगति घूमती है, अतः अंगों का भाव भी बदलता है।

भाव 6 — स्थित ग्रह
भाव 8 — स्थित ग्रह
भाव 12 — स्थित ग्रह
भाव 7 — नैसर्गिक पापग्रह (जैव-pH नियम हेतु)

सप्तम भाव त्रिदोष गणना में कोई अंक नहीं देता — वह केवल जैव-pH नियम में गिना जाता है।

आपके ब्राउज़र का प्रिंट-पटल खुलेगा — गंतव्य में “PDF के रूप में सहेजें” चुनिए। रंग बने रहें, इसके लिए “पृष्ठभूमि ग्राफ़िक्स” चालू रखिए।

यह पाठ किस पर आधारित है

लग्न
दुःस्थान-स्थित ग्रह
सप्तम भाव के पापग्रह
चालू महादशा

कालपुरुष — अंग एवं भाव

आकृति का प्रत्येक खंड एक राशि है; लग्न के अनुसार वह जिस भाव में पड़ती है, वही उसका भाव है। रंग अकेला संकेत नहीं है — प्रत्येक खंड पर संख्या तथा सूची में शब्दों में स्थिति भी लिखी है।

निर्मल — कोई पापग्रह नहीं एक ग्रह दो या अधिक

सन्दर्भ: Bṛhat Parāśara Horā Śāstra, ch. 11

गणना

त्रिदोष मापक

कोई पीड़ा चुनी नहीं गई।

सूत्र: दुःस्थान में रखा प्रत्येक ग्रह अपने प्रत्येक दोष को 1 अंक देता है (बुध तीनों को); महादशा स्वामी 2 अंक देता है। योग को प्रतिशत में बदला जाता है।

सन्दर्भ: Prashna Marga, ch. 11

अंग-संवेदनशीलता

कोई नियम लागू नहीं हुआ।

सप्तधातु

कोई नियम लागू नहीं हुआ।

जैव-pH

कोई नियम लागू नहीं हुआ।

आहार-विधि

  • 80% क्षारीय / 20% अम्लीय वैदिक प्राकृतिक आहार।
  • प्रतिदिन न्यूनतम 100 ग्राम ताज़ा कच्चा फल तथा 300 ग्राम कच्ची अथवा भाप में पकी पत्तेदार सब्ज़ियाँ।
  • प्रसंस्कृत तथा अत्यधिक अम्लीय आहार से बचें।

सन्दर्भ: Prashna Marga, ch. 11, st. 3–4

मणि-चिकित्सा

कोई नियम लागू नहीं हुआ।

शास्त्रीय तालिकाएँ

गणक जो कुछ दिखा सकता है, वह पूरा यहाँ है। गणक केवल इन्हीं पंक्तियों को चुनता और गिनता है।

ग्रह → त्रिदोष

सूर्य
पित्त (अग्नि)
चंद्र
वात एवं कफ (वायु एवं जल)
मंगल
पित्त (अग्नि)
बुध
वात, पित्त एवं कफ (त्रिदोषिक — सम)
गुरु
कफ (जल/पृथ्वी)
शुक्र
वात एवं कफ (वायु एवं जल)
शनि
वात (वायु/आकाश)
राहु
वात
केतु
पित्त

सन्दर्भ: Prashna Marga, ch. 11

ग्रह → सप्तधातु

सूर्य
अस्थि धातु — हड्डियाँ एवं अस्थि-संरचना
चंद्र
रक्त धातु — रक्त एवं शारीरिक द्रव
मंगल
मज्जा धातु — अस्थि-मज्जा एवं स्नायु-ऊतक
बुध
त्वचा / रस धातु — त्वचा एवं रस
गुरु
मेदस् धातु — वसा एवं मेद-ऊतक
शुक्र
शुक्र धातु — प्रजनन-ऊतक
शनि
सिरा / मांस धातु — शिराएँ, स्नायु एवं मांसपेशियाँ

राहु एवं केतु की कोई धातु-पंक्ति नहीं है, अतः उन्हें दी भी नहीं गई।

सन्दर्भ: Suśruta Saṁhitā, Sūtrasthāna

जैव-pH नियम

षष्ठ अथवा सप्तम भाव में स्थित नैसर्गिक पापग्रहों — राहु, केतु, शनि, मंगल — की गणना करें।

0
उत्तम pH संतुलन — अम्लता का जोखिम कम
1
मध्यम अम्लता एवं जठर-तनाव
2+ अथवा षष्ठ में राहु
उच्च अम्लपित्त, व्रण का जोखिम एवं जैव-pH असंतुलन

सन्दर्भ: Prashna Marga, ch. 11, st. 3–4

मणि-तालिका

अम्लपित्त एवं जठर-कष्ट — षष्ठ भाव में राहु अथवा केतु
गोमेद (Gomeda) — चाँदी अथवा पंचधातु, मध्यमा, शनिवार
स्नायु-विकार, संधिवात एवं शिरा-रोग — शनि पीड़ित
नीलम (Nīlam) — चाँदी अथवा पंचधातु, मध्यमा, शनिवार
त्वचा एवं पाचन-तंत्र की पीड़ा — बुध पीड़ित
पन्ना (Panna) — स्वर्ण, कनिष्ठिका, बुधवार
रक्त, अस्थि-मज्जा एवं शोथ-सम्बन्धी विकार — मंगल पीड़ित
मूँगा (Mūṅgā) — स्वर्ण अथवा ताम्र, अनामिका, मंगलवार
हृदय एवं कार्डियक तनाव — चतुर्थ भाव की पीड़ा अथवा निर्बल सूर्य
माणिक्य (Māṇikya) — स्वर्ण, अनामिका, रविवार / मोती (Motī) — चाँदी, कनिष्ठिका, सोमवार
चयापचय, यकृत एवं मेद असंतुलन — गुरु पीड़ित
पुखराज (Pukhrāj) — स्वर्ण, तर्जनी, गुरुवार

सन्दर्भ: Prashna Marga; Ayurvedic Maṇi therapy

यह पृष्ठ किस पर खड़ा है

यहाँ की प्रत्येक पंक्ति src/site/medical-rules.js की स्थिर तालिका से आती है और अपने शास्त्र-सन्दर्भ के साथ दिखाई जाती है। गणक केवल चुनता और गिनता है — कोई वाक्य रचता नहीं। जहाँ कोई नियम लागू नहीं होता, वहाँ पृष्ठ यही लिखता है, अनुमान नहीं लगाता।

यह चिकित्सा नहीं है। यह प्रतिवेदन कोई रोग-निदान नहीं करता और न किसी उपचार का आधार है — किसी भी लक्षण के लिए योग्य चिकित्सक से मिलिए।

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