दशा गणक दशा
आप कौन-सी ग्रह-दशा जी रहे हैं, पाँच स्तर गहराई तक — और शास्त्र उसके विषय में क्या कहते हैं। तीन स्वतंत्र दशा पद्धतियाँ, ताकि आप देख सकें कि वे कहाँ सहमत होती हैं।
अपनी दशा निकालेंनिःशुल्क · खाता आवश्यक नहीं · उच्च-परिशुद्धि खगोलीय गणना से
आपको क्या मिलता है
विंशोत्तरी, पाँच स्तर
महादशा, अन्तर्दशा, प्रत्यन्तर, सूक्ष्म और प्राण — आपके चन्द्र के नक्षत्र-स्थान से ठीक-ठीक गणित।
चर दशा
जैमिनि की राशि-दशा, लग्न की सम-विषम गणना से सव्य/अपसव्य क्रम और उच्च-नीच स्वामी के समायोजन सहित।
योगिनी दशा
छत्तीस वर्ष के चक्र में आठ योगिनियाँ, रुद्रयामल तन्त्र के आधार पर।
वर्षफल
मुन्था और वर्षेश सहित आपकी सौर-वर्ष कुंडली, ताजिक परम्परा के अनुसार।
दशा-फल, स्रोत सहित
आपकी कुंडली में हर दशेश क्या वचन देता है — उसके भाव-स्वामित्व, अवस्था और बल से पढ़ा गया, श्लोक के साथ।
होरा इसकी गणना कैसे करता है
ग्रह-स्थितियाँ उच्च-परिशुद्धि खगोलीय गणना से आती हैं — निरयन, लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश के साथ — और भाव पूर्ण-राशि पद्धति से लिए जाते हैं, जैसा बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में है। सूर्योदय और सूर्यास्त आपके ठीक निर्देशांकों के लिए गिने जाते हैं, मान नहीं लिए जाते — इसीलिए समय आपके अक्षांश और ऋतु के साथ सही-सही खिसकते हैं।
फल कोई भाषा-मॉडल नहीं लिखता। हर वाक्य शास्त्र से उतारा गया एक नियम है और अपने स्रोत के साथ आता है, ताकि आप जाकर जाँच सकें। जहाँ परंपराएँ भिन्न हैं, वहाँ होरा किस परंपरा को मान रहा है, यह फल में ही लिखा रहता है।
पूरी गणना-विधि →तीन चरण
- चार बातें भरिए। नाम, जन्म की तिथि, समय और स्थान। निर्देशांक और उस समय लागू सही UTC अंतर होरा स्वयं निकाल लेता है।
- होरा कुंडली बनाता है। स्थितियाँ, वर्ग, बल, दशाएँ और योग — गिने हुए, कहीं से देखे हुए नहीं।
- स्रोत के साथ पढ़िए। हर निष्कर्ष के साथ उसका विश्वास-स्तर और वह श्लोक भी है जिस पर वह टिका है।
प्रश्न
किस दशा पद्धति पर भरोसा करूँ?
पाराशर परम्परा में विंशोत्तरी ही मुख्य है और उसे पहले पढ़ना चाहिए। होरा चर और योगिनी को साथ दिखाता है ताकि आप देख सकें कि स्वतंत्र पद्धतियाँ कहाँ एक ही काल की ओर संकेत करती हैं — सहमति स्वयं एक सूचना है।
यह कितना आगे तक गणना कर सकता है?
विंशोत्तरी अभी जन्म से एक पूर्ण 120-वर्षीय चक्र तक चलती है। यदि आप उस सीमा से आगे जी चुके हैं, तो होरा यह कह देगा, चुपचाप चक्र दोहराएगा नहीं।
क्या दशा के लिए जन्म-समय मायने रखता है?
दशा का शेष चन्द्र की स्थिति से आता है, जो प्रति घंटे लगभग आधा अंश चलता है — इसलिए कुछ घंटों की भूल आपकी दशा-तिथियाँ महीनों खिसका देती है। यहाँ समय की शुद्धता लोगों की अपेक्षा से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
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