बुधवार, 29 जुलाई 2026 · आषाढ़ मास, शुक्ल पक्ष
बुधवार, पूर्णिमा, उत्तराषाढा नक्षत्र
उज्जैन के सूर्योदय पर प्रकाशित, 05:56 IST।
सूर्योदय के समय दिन पूर्णिमा लिए है, उत्तराषाढा नक्षत्र, प्रीति योग और विष्टि करण के साथ।
उज्जैन में सूर्य 05:56 पर उदय हुआ और 19:11 पर अस्त होगा — दिनमान 13 घं 15 मि।
चन्द्रमा उत्तराषाढा में है, 100% प्रकाशित, शुक्ल पक्ष में।
इस दिन पर क्या अंकित है
- पूर्णिमा (पूर्ण चन्द्र) 20:06 बजे
यहाँ केवल वे दिन अंकित हैं जो खगोलीय रूप से गणनीय और शास्त्रीय रूप से नामित दोनों हैं: पूर्णिमा और अमावस्या स्वयं युति/वियुति के क्षण से, एकादशी और प्रदोष सूर्योदय पर प्रचलित तिथि से, और संक्रान्ति सूर्य के नई राशि में प्रवेश से। कोई पर्व-सूची लागू नहीं की गई। कौन-सा पर्व किस तिथि पर पड़ता है, यह क्षेत्रीय और सम्प्रदाय-विशेष निर्णय है — प्रायः किसी विशेष मन्दिर की गणना — और वह खगोलगणित से नहीं निकलता, अतः यह स्तम्भ उसका अनुमान नहीं लगाता।
सूर्योदय पर पाँचों अङ्ग
- तिथि
- पूर्णिमा
- वार
- बुधवार
- नक्षत्र
- उत्तराषाढा
- योग
- प्रीति
- करण
- विष्टि
वह पूरी पञ्चाङ्ग-परिपाटी जिसके अन्तर्गत यह दिन पढ़ा गया
पाँचों अङ्ग (तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण) प्रत्येक दिन के सूर्योदय पर गिने गये हैं — यही शास्त्रीय परिपाटी है, क्योंकि वैदिक दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है और दिन का नाम उसके सूर्योदय पर प्रचलित अङ्ग से पड़ता है (मध्यरात्रि या स्थानीय दोपहर से नहीं)। स्थितियाँ निरयण हैं (लाहिरी / चित्रपक्ष अयनांश), उच्च-परिशुद्धि ऐफ़ेमेरिस से; सूर्योदय और सूर्यास्त इन्हीं निर्देशांकों के लिए उदय-गोचर विधि से गणित हैं, अतः नीचे का हर समय देशान्तर, अक्षांश और ऋतु के साथ सही-सही बदलता है। राहु-काल, यमघण्ट और गुलिक शास्त्रीय दिनमान-अष्टमांश सारणियाँ हैं, उस दिन के वास्तविक दिनमान पर लागू; अभिजित् 15 समान दिन-मुहूर्तों में 8वाँ है। तिथि 12° का चन्द्र-सूर्य अन्तर है, दिन नहीं, इसलिए एक सूर्योदय से अगले तक कोई तिथि छूट सकती है (क्षय) या दोहरा सकती है (अधिक) — यह अपेक्षित है, त्रुटि नहीं। दो परिणाम जानने योग्य हैं। तिथि के क्षय होने पर वह किसी भी सूर्योदय पर प्रचलित नहीं होती, अतः कोई एकादशी या प्रदोष यहाँ किसी मास से अनुपस्थित हो सकता है यद्यपि तिथि घटित हुई; व्रत तब किस समीप के दिन जाता है, यह क्षेत्रीय नियम तय करता है (स्मार्त और वैष्णव गणनाएँ भिन्न हैं) — इसीलिए यह पञ्चाङ्ग उसे आपके लिए खिसकाता नहीं। तिथि के अधिक होने पर वह दो क्रमिक सूर्योदयों पर प्रचलित रहती है, अतः दोनों दिन अंकित होते हैं और प्रत्येक पर जोड़े का पहला या दूसरा लिखा जाता है — चुपचाप एक चुन नहीं लिया जाता। पूर्णिमा और अमावस्या इस सबका अपवाद हैं: वे सूर्योदय की तिथि से नहीं, स्वयं युति/वियुति के क्षण से ली गई हैं (चन्द्र ठीक सूर्य के सम्मुख, या ठीक सूर्य के साथ), जो उनके साथ छपा है। प्रति चान्द्रमास ठीक एक पूर्णिमा और एक अमावस्या होती है, अतः सूर्योदय-नियम उन्हें अधिक वाले मास में दो बार छापता और क्षय वाले में पूरी तरह खो देता। ध्यान रहे कि छपा पञ्चाङ्ग व्रत का जो दिन बताये वह तब भी पिछला दिन हो सकता है जहाँ तिथि उस रात भर व्याप्त रहती है — यहाँ दिया क्षण खगोलगणित है, जिस पर कोई भी परिपाटी लागू की जा सकती है। अंकित दिन केवल वे हैं जो खगोलीय रूप से गणनीय और शास्त्रीय रूप से नामित हैं: पूर्णिमा, अमावस्या, एकादशी, प्रदोष (त्रयोदशी) और संक्रान्ति (सूर्य का राशि बदलना, प्रवेश-क्षण वाले स्थानीय नागरिक दिन पर दिखाया गया; इसे मनाने की क्षेत्रीय पुण्य-काल परिपाटियाँ भिन्न हैं)। कोई पर्व-सूची लागू नहीं है: कौन-सा पर्व किस तिथि पर पड़ता है, यह क्षेत्रीय और सम्प्रदाय-विशेष निर्णय है जो खगोलगणित से नहीं निकाला जा सकता, अतः यह पञ्चाङ्ग उसका अनुमान नहीं लगाता।
शास्त्रीय तालिकाएँ इस दिन को क्या मानती हैं
तिथि
पूर्णिमा तिथियों के पूर्णा कुल की है — किसी भी पक्ष की 5, 10, 15 तिथियाँ।
स्रोत: बृहत् संहिता, तिथि-कर्मगुण अध्याय, श्लोक 2 — अनुवाद: एन. चिदम्बरम् अय्यर, 1884।
नक्षत्र
उत्तराषाढा ध्रुव (स्थिर) नक्षत्रों में है।
“राज्याभिषेक, प्रायश्चित्त-कर्म, वृक्षारोपण, नगर-निर्माण, लोक-हित के कार्य, बीज-वपन और स्थायी फल वाले काम।”
स्रोत: वराहमिहिर की बृहत् संहिता, नक्षत्र-कर्मगुण अध्याय (श्लोक 6–11) — अनुवाद: एन. चिदम्बरम् अय्यर, 1884।
दिन की अवधियाँ
- राहु-काल छोड़ा जाता है 12:33-14:13
- यमघण्ट छोड़ा जाता है 07:35-09:15
- गुलिक छोड़ा जाता है 10:54-12:33
- अभिजित् छोड़ा जाता है 12:07-13:00
यह दिन बुधवार है, और बुधवार को अभिजित् नहीं लिया जाता — यही उसका एक शास्त्रीय अपवाद है। होरा इसे इसी दिन के वार से निकालता है, तिथियों की किसी सूची से नहीं।
राहु-काल 12:33-14:13, यमघण्ट 07:35-09:15, गुलिक 10:54-12:33 तक। हर एक उज्जैन में इसी दिन के वास्तविक दिनमान का आठवाँ भाग है, कोई नियत घड़ी नहीं।
अभिजित् — दिन के पन्द्रह समान मुहूर्तों में आठवाँ — 12:07-13:00 तक रहता है।
ग्रह कहाँ हैं
| ग्रह | राशि | अंश | गति |
|---|---|---|---|
| सूर्य | कर्क | 11°42′ | मार्गी |
| चन्द्र | मकर | 5°05′ | मार्गी |
| मंगल | वृषभ | 26°49′ | मार्गी |
| बुध | मिथुन | 23°20′ | मार्गी |
| गुरु | कर्क | 12°04′ | मार्गी |
| शुक्र | सिंह | 26°42′ | मार्गी |
| शनि | मीन | 20°30′ | वक्री |
| राहु | कुम्भ | 5°38′ | वक्री |
| केतु | सिंह | 5°38′ | वक्री |
सूर्योदय के समय शनि वक्री है। राहु और केतु सदा वक्री माने जाते हैं, इसलिए उन्हें यहाँ नहीं गिना गया।
वक्र-परिवर्तन और राशि-प्रवेश
जिन ग्रहों पर दृष्टि रखी गई, उनमें से किसी ने इस दिन न दिशा बदली, न राशि।
वक्र-मार्ग परिवर्तन ग्रह की गति की दिशा बदलना है, और राशि-प्रवेश निरयण (लाहिरी) राशि-सीमा पार करना। दोनों 12:00 UTC के क्रमिक प्रेक्षणों से पढ़े गए हैं, अतः दिन गणित है और उससे सूक्ष्म कोई समय नहीं बताया गया। वक्र-परिवर्तन मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि के लिए देखा गया; राशि-प्रवेश मंगल, गुरु, शनि और राहु के लिए।
तालिकाएँ इस दिन को किसके लिए नामित करती हैं, और क्या छोड़ती हैं
नामित 4
- विवाह
- नए घर में प्रवेश
- यज्ञोपवीत
- भूमि-पूजन
अनामित 6
- नामकरण
- अन्नप्राशन
- विद्यारम्भ
- व्यापार या दुकान का आरम्भ
- वाहन-क्रय
- यात्रा
अनिर्णीत 1
- कर्णवेध
ये चार निर्णय एक क्रम हैं, कोई अंक नहीं। यहाँ न कोई उत्तीर्णांक है, न कोई योग: शास्त्र दिन के सामने कर्मों को क्रम देते हैं, दिन को अंक नहीं देते। “अनामित” का अर्थ है कि होरा जिन तालिकाओं को उद्धृत कर सकता है वे इस दिन को उस कर्म के लिए न नामित करती हैं न वर्जित — यह न अनुमति है, न निषेध।
जो नियम लगे, और हर एक कहाँ से आया
-
उत्तराषाढा नामित सूची में है — पारस्कर गृह्य सूत्र विवाह के लिए इन नक्षत्रों का नाम लेता है।
किन कर्मों पर: विवाह
-
होरा की अपनी कर्म-तालिका इस कर्म के लिए बुधवार को अनुकूल वार गिनती है — बताया गया, लागू नहीं।
किन कर्मों पर: विवाह · नए घर में प्रवेश · विद्यारम्भ · व्यापार या दुकान का आरम्भ · यात्रा
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उत्तराषाढा ध्रुव (स्थिर) वर्ग में है, और अध्याय ध्रुव नक्षत्रों को “नगर-निर्माण … और स्थायी फल वाले काम” देता है।
किन कर्मों पर: नए घर में प्रवेश
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सूर्योदय का करण विष्टि (भद्रा) है, और वही श्लोक “भद्रा करण में” मुण्डन निषिद्ध करता है।
किन कर्मों पर: पहला मुण्डन
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इस पृष्ठ द्वारा उद्धृत करने योग्य कोई नियम इस दिन को नहीं हटाता, और कोई उत्तराषाढा को इस कर्म के लिए नामित भी नहीं करता।
किन कर्मों पर: नामकरण · अन्नप्राशन · विद्यारम्भ · व्यापार या दुकान का आरम्भ · वाहन-क्रय · यात्रा
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इस कर्म की शास्त्रीय शर्त दिन नहीं, चुने हुए क्षण की कुण्डली है — अतः मास की तालिका इसे किसी ओर रख नहीं सकती, केवल तिथि और नक्षत्र-वर्ग पर हटा सकती है। श्लोक नीचे बारह कर्मों के साथ पूरा छपा है।
किन कर्मों पर: कर्णवेध
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उत्तराषाढा ध्रुव (स्थिर) वर्ग में है, और अध्याय ध्रुव नक्षत्रों को “स्थायी फल वाले काम”, और मृदु नक्षत्रों को “कोई भी शुभ कर्म” देता है।
किन कर्मों पर: यज्ञोपवीत
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होरा की अपनी कर्म-तालिका उत्तराषाढा को इस कर्म के लिए नामित करती है; यहाँ उद्धृत श्लोक नहीं करता। किसी को रद्द नहीं किया गया।
किन कर्मों पर: व्यापार या दुकान का आरम्भ
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उत्तराषाढा ध्रुव (स्थिर) वर्ग में है, और अध्याय ध्रुव नक्षत्रों को “नगर-निर्माण, लोक-हित के कार्य, बीज-वपन और स्थायी फल वाले काम” देता है।
किन कर्मों पर: भूमि-पूजन
बारहों कर्म, हर एक के पीछे का श्लोक पूरा छपा हुआ, और जहाँ परिपाटियाँ भिन्न हैं वे भेद — सब मुहूर्त पृष्ठ पर हैं। ऊपर कोई नियम जहाँ “नीचे” श्लोकों की बात करता है, वहाँ उसी पृष्ठ का अर्थ है।
अपनी कुण्डली के सामने दिन चुनना
शास्त्रीय मुहूर्त का आधा भाग इस दिन के चन्द्र और *आपके अपने* जन्म-नक्षत्र का सम्बन्ध है — तारा बल और चन्द्र बल — जिसे पंचांग छाप नहीं सकता, क्योंकि वह आपका जन्म नहीं जानता। वह स्तर मुहूर्त-खोज में है, आपकी अपनी कुण्डली के सामने।
यह स्तम्भ किससे गणित हुआ
इस स्तम्भ की हर पंक्ति गणित है, लिखी हुई नहीं। पाँचों अङ्ग उज्जैन में इस दिन के वास्तविक सूर्योदय पर पढ़े गए हैं — वैदिक दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, और दिन का नाम उसके सूर्योदय पर प्रचलित अङ्ग से पड़ता है। स्थितियाँ निरयण हैं (लाहिरी / चित्रपक्ष अयनांश), उच्च-परिशुद्धि ऐफ़ेमेरिस से; सूर्योदय और सूर्यास्त उज्जैन के ठीक निर्देशांकों के लिए उदय-गोचर विधि से गणित हैं — इसीलिए इस स्तम्भ के प्रकाशन का समय वर्ष भर बदलता रहता है। तिथि और नक्षत्र का शास्त्रीय स्वभाव, तथा बारह कर्म, केवल उन्हीं तालिकाओं को लगाते हैं जिन्हें यह मंच स्रोत सहित ज्यों का त्यों छापता है। इस पृष्ठ का कोई भाग किसी भाषा-मॉडल ने नहीं लिखा, और उस पर कुछ भी किसी तीसरे पक्ष से नहीं लाया गया।
यह स्तम्भ आकाश की स्थिति बताता है और यह कि शास्त्रीय तालिकाएँ उसके लिए क्या नाम लेती हैं। यह किसी के विषय में कोई भविष्यवाणी नहीं करता, और यह चिकित्सा, क़ानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है।