राशिफल राशिफल

बारह चंद्र-राशियाँ, इस आधार पर पढ़ी गईं कि ग्रह आज सचमुच कहाँ खड़े हैं — किसी बने-बनाए साँचे से नहीं। नीचे की हर पंक्ति बताती है कि वह किस गोचर से आई और किस एक शास्त्रीय तालिका पर परखी गई। जन्म-विवरण की ज़रूरत नहीं।

निःशुल्क · खाता आवश्यक नहीं · निरयन लाहिड़ी, उच्च-परिशुद्धि गणना · एक उद्धृत स्रोत

अवधि

फल 29 July 2026 के लिए · ग्रह-स्थितियाँ इस अवधि के मध्य-बिंदु (UTC) की ली गई हैं

अपनी चंद्र-राशि (जन्म राशि) चुनिए

ये चंद्र-राशियाँ हैं, सूर्य-राशियाँ नहीं। हर कार्ड पर दी गई तारीख़ें वे हैं जब सूर्य उस राशि में रहता है — यह केवल मोटा सहारा है, यदि आपकी कुंडली कभी बनी ही न हो। आपकी जन्म राशि वह है जहाँ आपके जन्म के समय चंद्रमा था, और ज़्यादातर लोगों के लिए वह बिलकुल दूसरी राशि होती है। पक्का नहीं है? कुंडली बनाकर अपनी चंद्र-राशि जान लीजिए — इसमें बस तिथि, समय और स्थान लगता है, और यह निःशुल्क है।

मेष

Aries स्वामी: मंगल

29 July 2026 · Moon sign reading

शनि मेष से बारहवें भाव में — साढ़े साती, पहले ढाई वर्ष; स्थिर, अनहड़बड़ी परिश्रम ही शास्त्रीय परामर्श है।

मेष से गिनते हुए — आपकी जन्म राशि, अर्थात् वह राशि जिसमें जन्म के समय चन्द्र था — 2026-07-29 को ग्रह वास्तव में यहाँ खड़े हैं। शनि आपकी राशि से बारहवें भाव में बैठा है, जो मेष को साढ़े साती में ले आता है: व्यय, थकान, और जिन चीज़ों को आप पकड़े थे उनका चुपचाप ढीला पड़ना। यह पृष्ठभूमि है; शेष सब इससे तेज़ चलता है। आपके पक्ष में चल रहे हैं: चन्द्र दसवें भाव में (व्यवसाय, प्रतिष्ठा और सार्वजनिक पहचान) और शुक्र पाँचवें भाव में (सन्तान, विद्या, सृजन और निर्णय-शक्ति) — इनमें से हर भाव वह है जिसे बृहत् संहिता उस ग्रह के लिए शुभ गिनती है। सँभालकर चलने योग्य: सूर्य चौथे भाव में (घर, माता, भूमि और मन की शान्ति), मंगल दूसरे भाव में (धन, परिवार और आपकी वाणी) और शनि बारहवें भाव में (व्यय, छोड़ना, विश्राम और परदेस में बिताया समय)। ये शास्त्रीय अर्थ में सावधानियाँ हैं — साथ लेकर चलने का दबाव, न कि घोषित घटनाएँ। चन्द्र, जो एक दिन का स्वर तय करता है, मकर राशि में है — मेष से दसवें भाव — उन पाँच स्थानों में से एक जिन्हें श्लोक उसके लिए शुभ कहता है, इसलिए दिन चलने लायक लगना चाहिए। ऊपर सब कुछ जाँचा जा सकता है: यह इससे आया है कि 2026-07-29 से 2026-07-29 के बीच ग्रह कहाँ बैठे हैं, आपकी राशि से गिने गए, एक उद्धृत तालिका के विरुद्ध पढ़े गए — और किसी और चीज़ से नहीं।

क्या चल रहा है, और यह कहाँ से आया

! सँभलकर

Sāde Sātī साढ़े साती

शनि मेष से बारहवें भाव में गोचर कर रहा है — साढ़े साती, पहले ढाई वर्ष। शास्त्रीय संकेत है व्यय, थकान, और जिन चीज़ों को आप पकड़े थे उनका चुपचाप ढीला पड़ना। यह वर्षों में नापा जाने वाला लम्बा, धीमा गोचर है, इस दिन पर कोई फ़ैसला नहीं।

! सँभलकर

कार्य और प्रतिष्ठा

सूर्य कर्क राशि में है, जो मेष से चौथे भाव है — घर, माता, भूमि और मन की शान्ति का भाव। बृहत् संहिता 104.4 चौथे भाव को सूर्य के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह कहता है कि अधिकार को ज़बरदस्ती न चलाएँ और अपनी ऊर्जा न जलाएँ।

↑ अनुकूल

मनःस्थिति और आसपास के लोग

चन्द्र मकर राशि में है, जो मेष से दसवें भाव है — व्यवसाय, प्रतिष्ठा और सार्वजनिक पहचान का भाव। बृहत् संहिता 104.4 दसवें भाव को चन्द्र के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह मन को सम रखता है और लोगों से निपटना आसान बनाता है।

! सँभलकर

ऊर्जा और पहल

मंगल वृषभ राशि में है, जो मेष से दूसरे भाव है — धन, परिवार और आपकी वाणी का भाव। बृहत् संहिता 104.4 दूसरे भाव को मंगल के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह गरम चलता है — टकराव, जल्दबाज़ी और क्रोध ही शास्त्रीय चेतावनी हैं।

· सामान्य

वाणी, अध्ययन और काग़ज़ी काम

बुध मिथुन राशि में है, जो मेष से तीसरे भाव है — साहस, प्रयास, छोटी यात्राएँ और भाई-बहन का भाव। बृहत् संहिता 104.4 तीसरे भाव को बुध के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह चतुर नहीं, साधारण परिणाम देता है — भेजने से पहले दो बार पढ़ें।

· सामान्य

वृद्धि, धन और मार्गदर्शन

गुरु कर्क राशि में है, जो मेष से चौथे भाव है — घर, माता, भूमि और मन की शान्ति का भाव। बृहत् संहिता 104.4 चौथे भाव को गुरु के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह वृद्धि को सामान्य से धीमा कर देता है — रुकी नहीं, बस अनहड़बड़ी।

↑ अनुकूल

सम्बन्ध और सुख-सुविधा

शुक्र सिंह राशि में है, जो मेष से पाँचवें भाव है — सन्तान, विद्या, सृजन और निर्णय-शक्ति का भाव। बृहत् संहिता 104.4 पाँचवें भाव को शुक्र के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह स्नेह, सुविधा और सही जगह लगे धन को सहज बनाता है।

! सँभलकर

काम, कर्तव्य और धैर्य

शनि मीन राशि में है, जो मेष से बारहवें भाव है, और वक्री गति में — व्यय, छोड़ना, विश्राम और परदेस में बिताया समय का भाव। बृहत् संहिता 104.4 बारहवें भाव को शनि के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह विलम्ब, अतिरिक्त कर्तव्य और धीमी प्रगति के संकेत देता है।

वृषभ

Taurus स्वामी: शुक्र

29 July 2026 · Moon sign reading

मंगल वृषभ से पहले भाव में — ऊर्जा गरम है, और शास्त्रीय चेतावनी जल्दबाज़ी से है।

वृषभ से गिनते हुए — आपकी जन्म राशि, अर्थात् वह राशि जिसमें जन्म के समय चन्द्र था — 2026-07-29 को ग्रह वास्तव में यहाँ खड़े हैं। आपके पक्ष में चल रहे हैं: सूर्य तीसरे भाव में (साहस, प्रयास, छोटी यात्राएँ और भाई-बहन), बुध दूसरे भाव में (धन, परिवार और आपकी वाणी), शुक्र चौथे भाव में (घर, माता, भूमि और मन की शान्ति) और शनि ग्यारहवें भाव में (लाभ, आय और वे लोग जो आपकी सहायता करते हैं) — इनमें से हर भाव वह है जिसे बृहत् संहिता उस ग्रह के लिए शुभ गिनती है। सँभालकर चलने योग्य: मंगल पहले भाव में (स्वयं आप — सेहत, मनःस्थिति और आप दूसरों को कैसे दिखते हैं)। ये शास्त्रीय अर्थ में सावधानियाँ हैं — साथ लेकर चलने का दबाव, न कि घोषित घटनाएँ। चन्द्र, जो एक दिन का स्वर तय करता है, मकर राशि में है — वृषभ से नौवें भाव — उसके शुभ स्थानों में नहीं, इसलिए मन को स्थिर होने दें, फिर उस पर चलें। ऊपर सब कुछ जाँचा जा सकता है: यह इससे आया है कि 2026-07-29 से 2026-07-29 के बीच ग्रह कहाँ बैठे हैं, आपकी राशि से गिने गए, एक उद्धृत तालिका के विरुद्ध पढ़े गए — और किसी और चीज़ से नहीं।

क्या चल रहा है, और यह कहाँ से आया

↑ अनुकूल

कार्य और प्रतिष्ठा

सूर्य कर्क राशि में है, जो वृषभ से तीसरे भाव है — साहस, प्रयास, छोटी यात्राएँ और भाई-बहन का भाव। बृहत् संहिता 104.4 तीसरे भाव को सूर्य के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह पहचान दिलाता है और किसी बात को आगे बढ़ाने का आत्मविश्वास देता है।

· सामान्य

मनःस्थिति और आसपास के लोग

चन्द्र मकर राशि में है, जो वृषभ से नौवें भाव है — भाग्य, गुरुजन, यात्रा और आस्था का भाव। बृहत् संहिता 104.4 नौवें भाव को चन्द्र के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह मन को समाचार नहीं, मौसम बना देता है — उस पर चलने से पहले उसे बैठ जाने दें।

! सँभलकर

ऊर्जा और पहल

मंगल वृषभ राशि में है, जो वृषभ से पहले भाव है — स्वयं आप — सेहत, मनःस्थिति और आप दूसरों को कैसे दिखते हैं का भाव। बृहत् संहिता 104.4 पहले भाव को मंगल के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह गरम चलता है — टकराव, जल्दबाज़ी और क्रोध ही शास्त्रीय चेतावनी हैं।

↑ अनुकूल

वाणी, अध्ययन और काग़ज़ी काम

बुध मिथुन राशि में है, जो वृषभ से दूसरे भाव है — धन, परिवार और आपकी वाणी का भाव। बृहत् संहिता 104.4 दूसरे भाव को बुध के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह बातचीत, अध्ययन, लेखन और काग़ज़ी काम के लिए अनुकूल है।

· सामान्य

वृद्धि, धन और मार्गदर्शन

गुरु कर्क राशि में है, जो वृषभ से तीसरे भाव है — साहस, प्रयास, छोटी यात्राएँ और भाई-बहन का भाव। बृहत् संहिता 104.4 तीसरे भाव को गुरु के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह वृद्धि को सामान्य से धीमा कर देता है — रुकी नहीं, बस अनहड़बड़ी।

↑ अनुकूल

सम्बन्ध और सुख-सुविधा

शुक्र सिंह राशि में है, जो वृषभ से चौथे भाव है — घर, माता, भूमि और मन की शान्ति का भाव। बृहत् संहिता 104.4 चौथे भाव को शुक्र के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह स्नेह, सुविधा और सही जगह लगे धन को सहज बनाता है।

↑ अनुकूल

काम, कर्तव्य और धैर्य

शनि मीन राशि में है, जो वृषभ से ग्यारहवें भाव है, और वक्री गति में — लाभ, आय और वे लोग जो आपकी सहायता करते हैं का भाव। बृहत् संहिता 104.4 ग्यारहवें भाव को शनि के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह धैर्यपूर्ण, अनुशासित, बिना चमक वाले काम को फल देता है।

मिथुन

Gemini स्वामी: बुध

29 July 2026 · Moon sign reading

गुरु मिथुन से दूसरे भाव में — शास्त्रों का सबसे सहायक गोचर — वृद्धि, अच्छी सलाह, खुलते द्वार।

मिथुन से गिनते हुए — आपकी जन्म राशि, अर्थात् वह राशि जिसमें जन्म के समय चन्द्र था — 2026-07-29 को ग्रह वास्तव में यहाँ खड़े हैं। आपके पक्ष में चल रहे हैं: गुरु दूसरे भाव में (धन, परिवार और आपकी वाणी) और शुक्र तीसरे भाव में (साहस, प्रयास, छोटी यात्राएँ और भाई-बहन) — इनमें से हर भाव वह है जिसे बृहत् संहिता उस ग्रह के लिए शुभ गिनती है। सँभालकर चलने योग्य: सूर्य दूसरे भाव में (धन, परिवार और आपकी वाणी), मंगल बारहवें भाव में (व्यय, छोड़ना, विश्राम और परदेस में बिताया समय) और शनि दसवें भाव में (व्यवसाय, प्रतिष्ठा और सार्वजनिक पहचान)। ये शास्त्रीय अर्थ में सावधानियाँ हैं — साथ लेकर चलने का दबाव, न कि घोषित घटनाएँ। चन्द्र, जो एक दिन का स्वर तय करता है, मकर राशि में है — मिथुन से आठवें भाव — उसके शुभ स्थानों में नहीं, इसलिए मन को स्थिर होने दें, फिर उस पर चलें। ऊपर सब कुछ जाँचा जा सकता है: यह इससे आया है कि 2026-07-29 से 2026-07-29 के बीच ग्रह कहाँ बैठे हैं, आपकी राशि से गिने गए, एक उद्धृत तालिका के विरुद्ध पढ़े गए — और किसी और चीज़ से नहीं।

क्या चल रहा है, और यह कहाँ से आया

! सँभलकर

कार्य और प्रतिष्ठा

सूर्य कर्क राशि में है, जो मिथुन से दूसरे भाव है — धन, परिवार और आपकी वाणी का भाव। बृहत् संहिता 104.4 दूसरे भाव को सूर्य के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह कहता है कि अधिकार को ज़बरदस्ती न चलाएँ और अपनी ऊर्जा न जलाएँ।

· सामान्य

मनःस्थिति और आसपास के लोग

चन्द्र मकर राशि में है, जो मिथुन से आठवें भाव है — उथल-पुथल, साझा धन और अचानक पलटने वाली बातें का भाव। बृहत् संहिता 104.4 आठवें भाव को चन्द्र के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह मन को समाचार नहीं, मौसम बना देता है — उस पर चलने से पहले उसे बैठ जाने दें।

! सँभलकर

ऊर्जा और पहल

मंगल वृषभ राशि में है, जो मिथुन से बारहवें भाव है — व्यय, छोड़ना, विश्राम और परदेस में बिताया समय का भाव। बृहत् संहिता 104.4 बारहवें भाव को मंगल के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह गरम चलता है — टकराव, जल्दबाज़ी और क्रोध ही शास्त्रीय चेतावनी हैं।

· सामान्य

वाणी, अध्ययन और काग़ज़ी काम

बुध मिथुन राशि में है, जो मिथुन से पहले भाव है — स्वयं आप — सेहत, मनःस्थिति और आप दूसरों को कैसे दिखते हैं का भाव। बृहत् संहिता 104.4 पहले भाव को बुध के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह चतुर नहीं, साधारण परिणाम देता है — भेजने से पहले दो बार पढ़ें।

↑ अनुकूल

वृद्धि, धन और मार्गदर्शन

गुरु कर्क राशि में है, जो मिथुन से दूसरे भाव है — धन, परिवार और आपकी वाणी का भाव। बृहत् संहिता 104.4 दूसरे भाव को गुरु के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह सहारे, वृद्धि और अच्छी सलाह का शास्त्रीय चिह्न है।

↑ अनुकूल

सम्बन्ध और सुख-सुविधा

शुक्र सिंह राशि में है, जो मिथुन से तीसरे भाव है — साहस, प्रयास, छोटी यात्राएँ और भाई-बहन का भाव। बृहत् संहिता 104.4 तीसरे भाव को शुक्र के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह स्नेह, सुविधा और सही जगह लगे धन को सहज बनाता है।

! सँभलकर

काम, कर्तव्य और धैर्य

शनि मीन राशि में है, जो मिथुन से दसवें भाव है, और वक्री गति में — व्यवसाय, प्रतिष्ठा और सार्वजनिक पहचान का भाव। बृहत् संहिता 104.4 दसवें भाव को शनि के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह विलम्ब, अतिरिक्त कर्तव्य और धीमी प्रगति के संकेत देता है।

कर्क

Cancer स्वामी: चन्द्र

29 July 2026 · Moon sign reading

शनि कर्क से नौवें भाव में — धैर्य ही पूरा निर्देश है; विलम्ब और अतिरिक्त कर्तव्य के संकेत हैं।

कर्क से गिनते हुए — आपकी जन्म राशि, अर्थात् वह राशि जिसमें जन्म के समय चन्द्र था — 2026-07-29 को ग्रह वास्तव में यहाँ खड़े हैं। आपके पक्ष में चल रहे हैं: चन्द्र सातवें भाव में (साझेदार — विवाह में भी और व्यापार में भी), मंगल ग्यारहवें भाव में (लाभ, आय और वे लोग जो आपकी सहायता करते हैं) और शुक्र दूसरे भाव में (धन, परिवार और आपकी वाणी) — इनमें से हर भाव वह है जिसे बृहत् संहिता उस ग्रह के लिए शुभ गिनती है। सँभालकर चलने योग्य: सूर्य पहले भाव में (स्वयं आप — सेहत, मनःस्थिति और आप दूसरों को कैसे दिखते हैं) और शनि नौवें भाव में (भाग्य, गुरुजन, यात्रा और आस्था)। ये शास्त्रीय अर्थ में सावधानियाँ हैं — साथ लेकर चलने का दबाव, न कि घोषित घटनाएँ। चन्द्र, जो एक दिन का स्वर तय करता है, मकर राशि में है — कर्क से सातवें भाव — उन पाँच स्थानों में से एक जिन्हें श्लोक उसके लिए शुभ कहता है, इसलिए दिन चलने लायक लगना चाहिए। ऊपर सब कुछ जाँचा जा सकता है: यह इससे आया है कि 2026-07-29 से 2026-07-29 के बीच ग्रह कहाँ बैठे हैं, आपकी राशि से गिने गए, एक उद्धृत तालिका के विरुद्ध पढ़े गए — और किसी और चीज़ से नहीं।

क्या चल रहा है, और यह कहाँ से आया

! सँभलकर

कार्य और प्रतिष्ठा

सूर्य कर्क राशि में है, जो कर्क से पहले भाव है — स्वयं आप — सेहत, मनःस्थिति और आप दूसरों को कैसे दिखते हैं का भाव। बृहत् संहिता 104.4 पहले भाव को सूर्य के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह कहता है कि अधिकार को ज़बरदस्ती न चलाएँ और अपनी ऊर्जा न जलाएँ।

↑ अनुकूल

मनःस्थिति और आसपास के लोग

चन्द्र मकर राशि में है, जो कर्क से सातवें भाव है — साझेदार — विवाह में भी और व्यापार में भी का भाव। बृहत् संहिता 104.4 सातवें भाव को चन्द्र के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह मन को सम रखता है और लोगों से निपटना आसान बनाता है।

↑ अनुकूल

ऊर्जा और पहल

मंगल वृषभ राशि में है, जो कर्क से ग्यारहवें भाव है — लाभ, आय और वे लोग जो आपकी सहायता करते हैं का भाव। बृहत् संहिता 104.4 ग्यारहवें भाव को मंगल के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह ऐसा वेग देता है जो सचमुच काम आता है।

· सामान्य

वाणी, अध्ययन और काग़ज़ी काम

बुध मिथुन राशि में है, जो कर्क से बारहवें भाव है — व्यय, छोड़ना, विश्राम और परदेस में बिताया समय का भाव। बृहत् संहिता 104.4 बारहवें भाव को बुध के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह चतुर नहीं, साधारण परिणाम देता है — भेजने से पहले दो बार पढ़ें।

· सामान्य

वृद्धि, धन और मार्गदर्शन

गुरु कर्क राशि में है, जो कर्क से पहले भाव है — स्वयं आप — सेहत, मनःस्थिति और आप दूसरों को कैसे दिखते हैं का भाव। बृहत् संहिता 104.4 पहले भाव को गुरु के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह वृद्धि को सामान्य से धीमा कर देता है — रुकी नहीं, बस अनहड़बड़ी।

↑ अनुकूल

सम्बन्ध और सुख-सुविधा

शुक्र सिंह राशि में है, जो कर्क से दूसरे भाव है — धन, परिवार और आपकी वाणी का भाव। बृहत् संहिता 104.4 दूसरे भाव को शुक्र के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह स्नेह, सुविधा और सही जगह लगे धन को सहज बनाता है।

! सँभलकर

काम, कर्तव्य और धैर्य

शनि मीन राशि में है, जो कर्क से नौवें भाव है, और वक्री गति में — भाग्य, गुरुजन, यात्रा और आस्था का भाव। बृहत् संहिता 104.4 नौवें भाव को शनि के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह विलम्ब, अतिरिक्त कर्तव्य और धीमी प्रगति के संकेत देता है।

सिंह

Leo स्वामी: सूर्य

29 July 2026 · Moon sign reading

शनि सिंह से आठवें भाव में — अष्टम शनि, अष्टम भाव के ढाई वर्ष; स्थिर, अनहड़बड़ी परिश्रम ही शास्त्रीय परामर्श है।

सिंह से गिनते हुए — आपकी जन्म राशि, अर्थात् वह राशि जिसमें जन्म के समय चन्द्र था — 2026-07-29 को ग्रह वास्तव में यहाँ खड़े हैं। शनि आपकी राशि से आठवें भाव में बैठा है, जो सिंह को अष्टम शनि में ले आता है: विलम्ब, व्यवधान, और वे बातें जो सहज चलने के बजाय पलट जाती हैं। यह पृष्ठभूमि है; शेष सब इससे तेज़ चलता है। आपके पक्ष में चल रहे हैं: चन्द्र छठे भाव में (काम का दबाव, ऋण, प्रतिद्वन्द्वी और रोज़ की बाधाएँ), बुध ग्यारहवें भाव में (लाभ, आय और वे लोग जो आपकी सहायता करते हैं) और शुक्र पहले भाव में (स्वयं आप — सेहत, मनःस्थिति और आप दूसरों को कैसे दिखते हैं) — इनमें से हर भाव वह है जिसे बृहत् संहिता उस ग्रह के लिए शुभ गिनती है। सँभालकर चलने योग्य: सूर्य बारहवें भाव में (व्यय, छोड़ना, विश्राम और परदेस में बिताया समय), मंगल दसवें भाव में (व्यवसाय, प्रतिष्ठा और सार्वजनिक पहचान) और शनि आठवें भाव में (उथल-पुथल, साझा धन और अचानक पलटने वाली बातें)। ये शास्त्रीय अर्थ में सावधानियाँ हैं — साथ लेकर चलने का दबाव, न कि घोषित घटनाएँ। चन्द्र, जो एक दिन का स्वर तय करता है, मकर राशि में है — सिंह से छठे भाव — उन पाँच स्थानों में से एक जिन्हें श्लोक उसके लिए शुभ कहता है, इसलिए दिन चलने लायक लगना चाहिए। ऊपर सब कुछ जाँचा जा सकता है: यह इससे आया है कि 2026-07-29 से 2026-07-29 के बीच ग्रह कहाँ बैठे हैं, आपकी राशि से गिने गए, एक उद्धृत तालिका के विरुद्ध पढ़े गए — और किसी और चीज़ से नहीं।

क्या चल रहा है, और यह कहाँ से आया

! सँभलकर

Aṣṭama Śani अष्टम शनि

शनि सिंह से आठवें भाव में गोचर कर रहा है — अष्टम शनि, अष्टम भाव के ढाई वर्ष। शास्त्रीय संकेत है विलम्ब, व्यवधान, और वे बातें जो सहज चलने के बजाय पलट जाती हैं। यह वर्षों में नापा जाने वाला लम्बा, धीमा गोचर है, इस दिन पर कोई फ़ैसला नहीं।

! सँभलकर

कार्य और प्रतिष्ठा

सूर्य कर्क राशि में है, जो सिंह से बारहवें भाव है — व्यय, छोड़ना, विश्राम और परदेस में बिताया समय का भाव। बृहत् संहिता 104.4 बारहवें भाव को सूर्य के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह कहता है कि अधिकार को ज़बरदस्ती न चलाएँ और अपनी ऊर्जा न जलाएँ।

↑ अनुकूल

मनःस्थिति और आसपास के लोग

चन्द्र मकर राशि में है, जो सिंह से छठे भाव है — काम का दबाव, ऋण, प्रतिद्वन्द्वी और रोज़ की बाधाएँ का भाव। बृहत् संहिता 104.4 छठे भाव को चन्द्र के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह मन को सम रखता है और लोगों से निपटना आसान बनाता है।

! सँभलकर

ऊर्जा और पहल

मंगल वृषभ राशि में है, जो सिंह से दसवें भाव है — व्यवसाय, प्रतिष्ठा और सार्वजनिक पहचान का भाव। बृहत् संहिता 104.4 दसवें भाव को मंगल के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह गरम चलता है — टकराव, जल्दबाज़ी और क्रोध ही शास्त्रीय चेतावनी हैं।

↑ अनुकूल

वाणी, अध्ययन और काग़ज़ी काम

बुध मिथुन राशि में है, जो सिंह से ग्यारहवें भाव है — लाभ, आय और वे लोग जो आपकी सहायता करते हैं का भाव। बृहत् संहिता 104.4 ग्यारहवें भाव को बुध के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह बातचीत, अध्ययन, लेखन और काग़ज़ी काम के लिए अनुकूल है।

· सामान्य

वृद्धि, धन और मार्गदर्शन

गुरु कर्क राशि में है, जो सिंह से बारहवें भाव है — व्यय, छोड़ना, विश्राम और परदेस में बिताया समय का भाव। बृहत् संहिता 104.4 बारहवें भाव को गुरु के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह वृद्धि को सामान्य से धीमा कर देता है — रुकी नहीं, बस अनहड़बड़ी।

↑ अनुकूल

सम्बन्ध और सुख-सुविधा

शुक्र सिंह राशि में है, जो सिंह से पहले भाव है — स्वयं आप — सेहत, मनःस्थिति और आप दूसरों को कैसे दिखते हैं का भाव। बृहत् संहिता 104.4 पहले भाव को शुक्र के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह स्नेह, सुविधा और सही जगह लगे धन को सहज बनाता है।

! सँभलकर

काम, कर्तव्य और धैर्य

शनि मीन राशि में है, जो सिंह से आठवें भाव है, और वक्री गति में — उथल-पुथल, साझा धन और अचानक पलटने वाली बातें का भाव। बृहत् संहिता 104.4 आठवें भाव को शनि के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह विलम्ब, अतिरिक्त कर्तव्य और धीमी प्रगति के संकेत देता है।

कन्या

Virgo स्वामी: बुध

29 July 2026 · Moon sign reading

गुरु कन्या से ग्यारहवें भाव में — शास्त्रों का सबसे सहायक गोचर — वृद्धि, अच्छी सलाह, खुलते द्वार।

कन्या से गिनते हुए — आपकी जन्म राशि, अर्थात् वह राशि जिसमें जन्म के समय चन्द्र था — 2026-07-29 को ग्रह वास्तव में यहाँ खड़े हैं। आपके पक्ष में चल रहे हैं: सूर्य ग्यारहवें भाव में (लाभ, आय और वे लोग जो आपकी सहायता करते हैं), बुध दसवें भाव में (व्यवसाय, प्रतिष्ठा और सार्वजनिक पहचान), गुरु ग्यारहवें भाव में (लाभ, आय और वे लोग जो आपकी सहायता करते हैं) और शुक्र बारहवें भाव में (व्यय, छोड़ना, विश्राम और परदेस में बिताया समय) — इनमें से हर भाव वह है जिसे बृहत् संहिता उस ग्रह के लिए शुभ गिनती है। सँभालकर चलने योग्य: मंगल नौवें भाव में (भाग्य, गुरुजन, यात्रा और आस्था) और शनि सातवें भाव में (साझेदार — विवाह में भी और व्यापार में भी)। ये शास्त्रीय अर्थ में सावधानियाँ हैं — साथ लेकर चलने का दबाव, न कि घोषित घटनाएँ। चन्द्र, जो एक दिन का स्वर तय करता है, मकर राशि में है — कन्या से पाँचवें भाव — उसके शुभ स्थानों में नहीं, इसलिए मन को स्थिर होने दें, फिर उस पर चलें। ऊपर सब कुछ जाँचा जा सकता है: यह इससे आया है कि 2026-07-29 से 2026-07-29 के बीच ग्रह कहाँ बैठे हैं, आपकी राशि से गिने गए, एक उद्धृत तालिका के विरुद्ध पढ़े गए — और किसी और चीज़ से नहीं।

क्या चल रहा है, और यह कहाँ से आया

↑ अनुकूल

कार्य और प्रतिष्ठा

सूर्य कर्क राशि में है, जो कन्या से ग्यारहवें भाव है — लाभ, आय और वे लोग जो आपकी सहायता करते हैं का भाव। बृहत् संहिता 104.4 ग्यारहवें भाव को सूर्य के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह पहचान दिलाता है और किसी बात को आगे बढ़ाने का आत्मविश्वास देता है।

· सामान्य

मनःस्थिति और आसपास के लोग

चन्द्र मकर राशि में है, जो कन्या से पाँचवें भाव है — सन्तान, विद्या, सृजन और निर्णय-शक्ति का भाव। बृहत् संहिता 104.4 पाँचवें भाव को चन्द्र के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह मन को समाचार नहीं, मौसम बना देता है — उस पर चलने से पहले उसे बैठ जाने दें।

! सँभलकर

ऊर्जा और पहल

मंगल वृषभ राशि में है, जो कन्या से नौवें भाव है — भाग्य, गुरुजन, यात्रा और आस्था का भाव। बृहत् संहिता 104.4 नौवें भाव को मंगल के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह गरम चलता है — टकराव, जल्दबाज़ी और क्रोध ही शास्त्रीय चेतावनी हैं।

↑ अनुकूल

वाणी, अध्ययन और काग़ज़ी काम

बुध मिथुन राशि में है, जो कन्या से दसवें भाव है — व्यवसाय, प्रतिष्ठा और सार्वजनिक पहचान का भाव। बृहत् संहिता 104.4 दसवें भाव को बुध के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह बातचीत, अध्ययन, लेखन और काग़ज़ी काम के लिए अनुकूल है।

↑ अनुकूल

वृद्धि, धन और मार्गदर्शन

गुरु कर्क राशि में है, जो कन्या से ग्यारहवें भाव है — लाभ, आय और वे लोग जो आपकी सहायता करते हैं का भाव। बृहत् संहिता 104.4 ग्यारहवें भाव को गुरु के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह सहारे, वृद्धि और अच्छी सलाह का शास्त्रीय चिह्न है।

↑ अनुकूल

सम्बन्ध और सुख-सुविधा

शुक्र सिंह राशि में है, जो कन्या से बारहवें भाव है — व्यय, छोड़ना, विश्राम और परदेस में बिताया समय का भाव। बृहत् संहिता 104.4 बारहवें भाव को शुक्र के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह स्नेह, सुविधा और सही जगह लगे धन को सहज बनाता है।

! सँभलकर

काम, कर्तव्य और धैर्य

शनि मीन राशि में है, जो कन्या से सातवें भाव है, और वक्री गति में — साझेदार — विवाह में भी और व्यापार में भी का भाव। बृहत् संहिता 104.4 सातवें भाव को शनि के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह विलम्ब, अतिरिक्त कर्तव्य और धीमी प्रगति के संकेत देता है।

तुला

Libra स्वामी: शुक्र

29 July 2026 · Moon sign reading

मंगल तुला से आठवें भाव में — ऊर्जा गरम है, और शास्त्रीय चेतावनी जल्दबाज़ी से है।

तुला से गिनते हुए — आपकी जन्म राशि, अर्थात् वह राशि जिसमें जन्म के समय चन्द्र था — 2026-07-29 को ग्रह वास्तव में यहाँ खड़े हैं। आपके पक्ष में चल रहे हैं: सूर्य दसवें भाव में (व्यवसाय, प्रतिष्ठा और सार्वजनिक पहचान), शुक्र ग्यारहवें भाव में (लाभ, आय और वे लोग जो आपकी सहायता करते हैं) और शनि छठे भाव में (काम का दबाव, ऋण, प्रतिद्वन्द्वी और रोज़ की बाधाएँ) — इनमें से हर भाव वह है जिसे बृहत् संहिता उस ग्रह के लिए शुभ गिनती है। सँभालकर चलने योग्य: मंगल आठवें भाव में (उथल-पुथल, साझा धन और अचानक पलटने वाली बातें)। ये शास्त्रीय अर्थ में सावधानियाँ हैं — साथ लेकर चलने का दबाव, न कि घोषित घटनाएँ। चन्द्र, जो एक दिन का स्वर तय करता है, मकर राशि में है — तुला से चौथे भाव — उसके शुभ स्थानों में नहीं, इसलिए मन को स्थिर होने दें, फिर उस पर चलें। ऊपर सब कुछ जाँचा जा सकता है: यह इससे आया है कि 2026-07-29 से 2026-07-29 के बीच ग्रह कहाँ बैठे हैं, आपकी राशि से गिने गए, एक उद्धृत तालिका के विरुद्ध पढ़े गए — और किसी और चीज़ से नहीं।

क्या चल रहा है, और यह कहाँ से आया

↑ अनुकूल

कार्य और प्रतिष्ठा

सूर्य कर्क राशि में है, जो तुला से दसवें भाव है — व्यवसाय, प्रतिष्ठा और सार्वजनिक पहचान का भाव। बृहत् संहिता 104.4 दसवें भाव को सूर्य के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह पहचान दिलाता है और किसी बात को आगे बढ़ाने का आत्मविश्वास देता है।

· सामान्य

मनःस्थिति और आसपास के लोग

चन्द्र मकर राशि में है, जो तुला से चौथे भाव है — घर, माता, भूमि और मन की शान्ति का भाव। बृहत् संहिता 104.4 चौथे भाव को चन्द्र के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह मन को समाचार नहीं, मौसम बना देता है — उस पर चलने से पहले उसे बैठ जाने दें।

! सँभलकर

ऊर्जा और पहल

मंगल वृषभ राशि में है, जो तुला से आठवें भाव है — उथल-पुथल, साझा धन और अचानक पलटने वाली बातें का भाव। बृहत् संहिता 104.4 आठवें भाव को मंगल के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह गरम चलता है — टकराव, जल्दबाज़ी और क्रोध ही शास्त्रीय चेतावनी हैं।

· सामान्य

वाणी, अध्ययन और काग़ज़ी काम

बुध मिथुन राशि में है, जो तुला से नौवें भाव है — भाग्य, गुरुजन, यात्रा और आस्था का भाव। बृहत् संहिता 104.4 नौवें भाव को बुध के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह चतुर नहीं, साधारण परिणाम देता है — भेजने से पहले दो बार पढ़ें।

· सामान्य

वृद्धि, धन और मार्गदर्शन

गुरु कर्क राशि में है, जो तुला से दसवें भाव है — व्यवसाय, प्रतिष्ठा और सार्वजनिक पहचान का भाव। बृहत् संहिता 104.4 दसवें भाव को गुरु के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह वृद्धि को सामान्य से धीमा कर देता है — रुकी नहीं, बस अनहड़बड़ी।

↑ अनुकूल

सम्बन्ध और सुख-सुविधा

शुक्र सिंह राशि में है, जो तुला से ग्यारहवें भाव है — लाभ, आय और वे लोग जो आपकी सहायता करते हैं का भाव। बृहत् संहिता 104.4 ग्यारहवें भाव को शुक्र के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह स्नेह, सुविधा और सही जगह लगे धन को सहज बनाता है।

↑ अनुकूल

काम, कर्तव्य और धैर्य

शनि मीन राशि में है, जो तुला से छठे भाव है, और वक्री गति में — काम का दबाव, ऋण, प्रतिद्वन्द्वी और रोज़ की बाधाएँ का भाव। बृहत् संहिता 104.4 छठे भाव को शनि के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह धैर्यपूर्ण, अनुशासित, बिना चमक वाले काम को फल देता है।

वृश्चिक

Scorpio स्वामी: मंगल

29 July 2026 · Moon sign reading

गुरु वृश्चिक से नौवें भाव में — शास्त्रों का सबसे सहायक गोचर — वृद्धि, अच्छी सलाह, खुलते द्वार।

वृश्चिक से गिनते हुए — आपकी जन्म राशि, अर्थात् वह राशि जिसमें जन्म के समय चन्द्र था — 2026-07-29 को ग्रह वास्तव में यहाँ खड़े हैं। आपके पक्ष में चल रहे हैं: चन्द्र तीसरे भाव में (साहस, प्रयास, छोटी यात्राएँ और भाई-बहन), बुध आठवें भाव में (उथल-पुथल, साझा धन और अचानक पलटने वाली बातें) और गुरु नौवें भाव में (भाग्य, गुरुजन, यात्रा और आस्था) — इनमें से हर भाव वह है जिसे बृहत् संहिता उस ग्रह के लिए शुभ गिनती है। सँभालकर चलने योग्य: सूर्य नौवें भाव में (भाग्य, गुरुजन, यात्रा और आस्था), मंगल सातवें भाव में (साझेदार — विवाह में भी और व्यापार में भी), शुक्र दसवें भाव में (व्यवसाय, प्रतिष्ठा और सार्वजनिक पहचान) और शनि पाँचवें भाव में (सन्तान, विद्या, सृजन और निर्णय-शक्ति)। ये शास्त्रीय अर्थ में सावधानियाँ हैं — साथ लेकर चलने का दबाव, न कि घोषित घटनाएँ। चन्द्र, जो एक दिन का स्वर तय करता है, मकर राशि में है — वृश्चिक से तीसरे भाव — उन पाँच स्थानों में से एक जिन्हें श्लोक उसके लिए शुभ कहता है, इसलिए दिन चलने लायक लगना चाहिए। ऊपर सब कुछ जाँचा जा सकता है: यह इससे आया है कि 2026-07-29 से 2026-07-29 के बीच ग्रह कहाँ बैठे हैं, आपकी राशि से गिने गए, एक उद्धृत तालिका के विरुद्ध पढ़े गए — और किसी और चीज़ से नहीं।

क्या चल रहा है, और यह कहाँ से आया

! सँभलकर

कार्य और प्रतिष्ठा

सूर्य कर्क राशि में है, जो वृश्चिक से नौवें भाव है — भाग्य, गुरुजन, यात्रा और आस्था का भाव। बृहत् संहिता 104.4 नौवें भाव को सूर्य के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह कहता है कि अधिकार को ज़बरदस्ती न चलाएँ और अपनी ऊर्जा न जलाएँ।

↑ अनुकूल

मनःस्थिति और आसपास के लोग

चन्द्र मकर राशि में है, जो वृश्चिक से तीसरे भाव है — साहस, प्रयास, छोटी यात्राएँ और भाई-बहन का भाव। बृहत् संहिता 104.4 तीसरे भाव को चन्द्र के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह मन को सम रखता है और लोगों से निपटना आसान बनाता है।

! सँभलकर

ऊर्जा और पहल

मंगल वृषभ राशि में है, जो वृश्चिक से सातवें भाव है — साझेदार — विवाह में भी और व्यापार में भी का भाव। बृहत् संहिता 104.4 सातवें भाव को मंगल के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह गरम चलता है — टकराव, जल्दबाज़ी और क्रोध ही शास्त्रीय चेतावनी हैं।

↑ अनुकूल

वाणी, अध्ययन और काग़ज़ी काम

बुध मिथुन राशि में है, जो वृश्चिक से आठवें भाव है — उथल-पुथल, साझा धन और अचानक पलटने वाली बातें का भाव। बृहत् संहिता 104.4 आठवें भाव को बुध के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह बातचीत, अध्ययन, लेखन और काग़ज़ी काम के लिए अनुकूल है।

↑ अनुकूल

वृद्धि, धन और मार्गदर्शन

गुरु कर्क राशि में है, जो वृश्चिक से नौवें भाव है — भाग्य, गुरुजन, यात्रा और आस्था का भाव। बृहत् संहिता 104.4 नौवें भाव को गुरु के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह सहारे, वृद्धि और अच्छी सलाह का शास्त्रीय चिह्न है।

! सँभलकर

सम्बन्ध और सुख-सुविधा

शुक्र सिंह राशि में है, जो वृश्चिक से दसवें भाव है — व्यवसाय, प्रतिष्ठा और सार्वजनिक पहचान का भाव। बृहत् संहिता 104.4 दसवें भाव को उन तीन स्थानों में गिनती है जिन्हें वह शुक्र के लिए प्रतिकूल कहती है, इसलिए यह स्नेह और व्यय में खटास डालता है — इसे भारी नहीं, हल्के में लें।

! सँभलकर

काम, कर्तव्य और धैर्य

शनि मीन राशि में है, जो वृश्चिक से पाँचवें भाव है, और वक्री गति में — सन्तान, विद्या, सृजन और निर्णय-शक्ति का भाव। बृहत् संहिता 104.4 पाँचवें भाव को शनि के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह विलम्ब, अतिरिक्त कर्तव्य और धीमी प्रगति के संकेत देता है।

धनु

Sagittarius स्वामी: गुरु

29 July 2026 · Moon sign reading

शनि धनु से चौथे भाव में — अर्धाष्टम शनि, चौथे भाव के ढाई वर्ष; स्थिर, अनहड़बड़ी परिश्रम ही शास्त्रीय परामर्श है।

धनु से गिनते हुए — आपकी जन्म राशि, अर्थात् वह राशि जिसमें जन्म के समय चन्द्र था — 2026-07-29 को ग्रह वास्तव में यहाँ खड़े हैं। शनि आपकी राशि से चौथे भाव में बैठा है, जो धनु को अर्धाष्टम शनि में ले आता है: घर, सम्पत्ति और मन की शान्ति पर खिंचाव। यह पृष्ठभूमि है; शेष सब इससे तेज़ चलता है। आपके पक्ष में चल रहे हैं: मंगल छठे भाव में (काम का दबाव, ऋण, प्रतिद्वन्द्वी और रोज़ की बाधाएँ) और शुक्र नौवें भाव में (भाग्य, गुरुजन, यात्रा और आस्था) — इनमें से हर भाव वह है जिसे बृहत् संहिता उस ग्रह के लिए शुभ गिनती है। सँभालकर चलने योग्य: सूर्य आठवें भाव में (उथल-पुथल, साझा धन और अचानक पलटने वाली बातें) और शनि चौथे भाव में (घर, माता, भूमि और मन की शान्ति)। ये शास्त्रीय अर्थ में सावधानियाँ हैं — साथ लेकर चलने का दबाव, न कि घोषित घटनाएँ। चन्द्र, जो एक दिन का स्वर तय करता है, मकर राशि में है — धनु से दूसरे भाव — उसके शुभ स्थानों में नहीं, इसलिए मन को स्थिर होने दें, फिर उस पर चलें। ऊपर सब कुछ जाँचा जा सकता है: यह इससे आया है कि 2026-07-29 से 2026-07-29 के बीच ग्रह कहाँ बैठे हैं, आपकी राशि से गिने गए, एक उद्धृत तालिका के विरुद्ध पढ़े गए — और किसी और चीज़ से नहीं।

क्या चल रहा है, और यह कहाँ से आया

! सँभलकर

Ardhāṣṭama Śani अर्धाष्टम शनि

शनि धनु से चौथे भाव में गोचर कर रहा है — अर्धाष्टम शनि, चौथे भाव के ढाई वर्ष। शास्त्रीय संकेत है घर, सम्पत्ति और मन की शान्ति पर खिंचाव। यह वर्षों में नापा जाने वाला लम्बा, धीमा गोचर है, इस दिन पर कोई फ़ैसला नहीं।

! सँभलकर

कार्य और प्रतिष्ठा

सूर्य कर्क राशि में है, जो धनु से आठवें भाव है — उथल-पुथल, साझा धन और अचानक पलटने वाली बातें का भाव। बृहत् संहिता 104.4 आठवें भाव को सूर्य के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह कहता है कि अधिकार को ज़बरदस्ती न चलाएँ और अपनी ऊर्जा न जलाएँ।

· सामान्य

मनःस्थिति और आसपास के लोग

चन्द्र मकर राशि में है, जो धनु से दूसरे भाव है — धन, परिवार और आपकी वाणी का भाव। बृहत् संहिता 104.4 दूसरे भाव को चन्द्र के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह मन को समाचार नहीं, मौसम बना देता है — उस पर चलने से पहले उसे बैठ जाने दें।

↑ अनुकूल

ऊर्जा और पहल

मंगल वृषभ राशि में है, जो धनु से छठे भाव है — काम का दबाव, ऋण, प्रतिद्वन्द्वी और रोज़ की बाधाएँ का भाव। बृहत् संहिता 104.4 छठे भाव को मंगल के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह ऐसा वेग देता है जो सचमुच काम आता है।

· सामान्य

वाणी, अध्ययन और काग़ज़ी काम

बुध मिथुन राशि में है, जो धनु से सातवें भाव है — साझेदार — विवाह में भी और व्यापार में भी का भाव। बृहत् संहिता 104.4 सातवें भाव को बुध के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह चतुर नहीं, साधारण परिणाम देता है — भेजने से पहले दो बार पढ़ें।

· सामान्य

वृद्धि, धन और मार्गदर्शन

गुरु कर्क राशि में है, जो धनु से आठवें भाव है — उथल-पुथल, साझा धन और अचानक पलटने वाली बातें का भाव। बृहत् संहिता 104.4 आठवें भाव को गुरु के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह वृद्धि को सामान्य से धीमा कर देता है — रुकी नहीं, बस अनहड़बड़ी।

↑ अनुकूल

सम्बन्ध और सुख-सुविधा

शुक्र सिंह राशि में है, जो धनु से नौवें भाव है — भाग्य, गुरुजन, यात्रा और आस्था का भाव। बृहत् संहिता 104.4 नौवें भाव को शुक्र के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह स्नेह, सुविधा और सही जगह लगे धन को सहज बनाता है।

! सँभलकर

काम, कर्तव्य और धैर्य

शनि मीन राशि में है, जो धनु से चौथे भाव है, और वक्री गति में — घर, माता, भूमि और मन की शान्ति का भाव। बृहत् संहिता 104.4 चौथे भाव को शनि के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह विलम्ब, अतिरिक्त कर्तव्य और धीमी प्रगति के संकेत देता है।

मकर

Capricorn स्वामी: शनि

29 July 2026 · Moon sign reading

गुरु मकर से सातवें भाव में — शास्त्रों का सबसे सहायक गोचर — वृद्धि, अच्छी सलाह, खुलते द्वार।

मकर से गिनते हुए — आपकी जन्म राशि, अर्थात् वह राशि जिसमें जन्म के समय चन्द्र था — 2026-07-29 को ग्रह वास्तव में यहाँ खड़े हैं। आपके पक्ष में चल रहे हैं: चन्द्र पहले भाव में (स्वयं आप — सेहत, मनःस्थिति और आप दूसरों को कैसे दिखते हैं), बुध छठे भाव में (काम का दबाव, ऋण, प्रतिद्वन्द्वी और रोज़ की बाधाएँ), गुरु सातवें भाव में (साझेदार — विवाह में भी और व्यापार में भी), शुक्र आठवें भाव में (उथल-पुथल, साझा धन और अचानक पलटने वाली बातें) और शनि तीसरे भाव में (साहस, प्रयास, छोटी यात्राएँ और भाई-बहन) — इनमें से हर भाव वह है जिसे बृहत् संहिता उस ग्रह के लिए शुभ गिनती है। सँभालकर चलने योग्य: सूर्य सातवें भाव में (साझेदार — विवाह में भी और व्यापार में भी) और मंगल पाँचवें भाव में (सन्तान, विद्या, सृजन और निर्णय-शक्ति)। ये शास्त्रीय अर्थ में सावधानियाँ हैं — साथ लेकर चलने का दबाव, न कि घोषित घटनाएँ। चन्द्र, जो एक दिन का स्वर तय करता है, मकर राशि में है — मकर से पहले भाव — उन पाँच स्थानों में से एक जिन्हें श्लोक उसके लिए शुभ कहता है, इसलिए दिन चलने लायक लगना चाहिए। ऊपर सब कुछ जाँचा जा सकता है: यह इससे आया है कि 2026-07-29 से 2026-07-29 के बीच ग्रह कहाँ बैठे हैं, आपकी राशि से गिने गए, एक उद्धृत तालिका के विरुद्ध पढ़े गए — और किसी और चीज़ से नहीं।

क्या चल रहा है, और यह कहाँ से आया

! सँभलकर

कार्य और प्रतिष्ठा

सूर्य कर्क राशि में है, जो मकर से सातवें भाव है — साझेदार — विवाह में भी और व्यापार में भी का भाव। बृहत् संहिता 104.4 सातवें भाव को सूर्य के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह कहता है कि अधिकार को ज़बरदस्ती न चलाएँ और अपनी ऊर्जा न जलाएँ।

↑ अनुकूल

मनःस्थिति और आसपास के लोग

चन्द्र मकर राशि में है, जो मकर से पहले भाव है — स्वयं आप — सेहत, मनःस्थिति और आप दूसरों को कैसे दिखते हैं का भाव। बृहत् संहिता 104.4 पहले भाव को चन्द्र के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह मन को सम रखता है और लोगों से निपटना आसान बनाता है।

! सँभलकर

ऊर्जा और पहल

मंगल वृषभ राशि में है, जो मकर से पाँचवें भाव है — सन्तान, विद्या, सृजन और निर्णय-शक्ति का भाव। बृहत् संहिता 104.4 पाँचवें भाव को मंगल के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह गरम चलता है — टकराव, जल्दबाज़ी और क्रोध ही शास्त्रीय चेतावनी हैं।

↑ अनुकूल

वाणी, अध्ययन और काग़ज़ी काम

बुध मिथुन राशि में है, जो मकर से छठे भाव है — काम का दबाव, ऋण, प्रतिद्वन्द्वी और रोज़ की बाधाएँ का भाव। बृहत् संहिता 104.4 छठे भाव को बुध के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह बातचीत, अध्ययन, लेखन और काग़ज़ी काम के लिए अनुकूल है।

↑ अनुकूल

वृद्धि, धन और मार्गदर्शन

गुरु कर्क राशि में है, जो मकर से सातवें भाव है — साझेदार — विवाह में भी और व्यापार में भी का भाव। बृहत् संहिता 104.4 सातवें भाव को गुरु के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह सहारे, वृद्धि और अच्छी सलाह का शास्त्रीय चिह्न है।

↑ अनुकूल

सम्बन्ध और सुख-सुविधा

शुक्र सिंह राशि में है, जो मकर से आठवें भाव है — उथल-पुथल, साझा धन और अचानक पलटने वाली बातें का भाव। बृहत् संहिता 104.4 आठवें भाव को शुक्र के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह स्नेह, सुविधा और सही जगह लगे धन को सहज बनाता है।

↑ अनुकूल

काम, कर्तव्य और धैर्य

शनि मीन राशि में है, जो मकर से तीसरे भाव है, और वक्री गति में — साहस, प्रयास, छोटी यात्राएँ और भाई-बहन का भाव। बृहत् संहिता 104.4 तीसरे भाव को शनि के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह धैर्यपूर्ण, अनुशासित, बिना चमक वाले काम को फल देता है।

कुम्भ

Aquarius स्वामी: शनि

29 July 2026 · Moon sign reading

शनि कुम्भ से दूसरे भाव में — साढ़े साती, अन्तिम ढाई वर्ष; स्थिर, अनहड़बड़ी परिश्रम ही शास्त्रीय परामर्श है।

कुम्भ से गिनते हुए — आपकी जन्म राशि, अर्थात् वह राशि जिसमें जन्म के समय चन्द्र था — 2026-07-29 को ग्रह वास्तव में यहाँ खड़े हैं। शनि आपकी राशि से दूसरे भाव में बैठा है, जो कुम्भ को साढ़े साती में ले आता है: धन, गृहस्थी और वाणी पर दबाव, जो गोचर समाप्त होते-होते घटता जाता है। यह पृष्ठभूमि है; शेष सब इससे तेज़ चलता है। आपके पक्ष में चल रहे हैं: सूर्य छठे भाव में (काम का दबाव, ऋण, प्रतिद्वन्द्वी और रोज़ की बाधाएँ) — इनमें से हर भाव वह है जिसे बृहत् संहिता उस ग्रह के लिए शुभ गिनती है। सँभालकर चलने योग्य: मंगल चौथे भाव में (घर, माता, भूमि और मन की शान्ति), शुक्र सातवें भाव में (साझेदार — विवाह में भी और व्यापार में भी) और शनि दूसरे भाव में (धन, परिवार और आपकी वाणी)। ये शास्त्रीय अर्थ में सावधानियाँ हैं — साथ लेकर चलने का दबाव, न कि घोषित घटनाएँ। चन्द्र, जो एक दिन का स्वर तय करता है, मकर राशि में है — कुम्भ से बारहवें भाव — उसके शुभ स्थानों में नहीं, इसलिए मन को स्थिर होने दें, फिर उस पर चलें। ऊपर सब कुछ जाँचा जा सकता है: यह इससे आया है कि 2026-07-29 से 2026-07-29 के बीच ग्रह कहाँ बैठे हैं, आपकी राशि से गिने गए, एक उद्धृत तालिका के विरुद्ध पढ़े गए — और किसी और चीज़ से नहीं।

क्या चल रहा है, और यह कहाँ से आया

! सँभलकर

Sāde Sātī साढ़े साती

शनि कुम्भ से दूसरे भाव में गोचर कर रहा है — साढ़े साती, अन्तिम ढाई वर्ष। शास्त्रीय संकेत है धन, गृहस्थी और वाणी पर दबाव, जो गोचर समाप्त होते-होते घटता जाता है। यह वर्षों में नापा जाने वाला लम्बा, धीमा गोचर है, इस दिन पर कोई फ़ैसला नहीं।

↑ अनुकूल

कार्य और प्रतिष्ठा

सूर्य कर्क राशि में है, जो कुम्भ से छठे भाव है — काम का दबाव, ऋण, प्रतिद्वन्द्वी और रोज़ की बाधाएँ का भाव। बृहत् संहिता 104.4 छठे भाव को सूर्य के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह पहचान दिलाता है और किसी बात को आगे बढ़ाने का आत्मविश्वास देता है।

· सामान्य

मनःस्थिति और आसपास के लोग

चन्द्र मकर राशि में है, जो कुम्भ से बारहवें भाव है — व्यय, छोड़ना, विश्राम और परदेस में बिताया समय का भाव। बृहत् संहिता 104.4 बारहवें भाव को चन्द्र के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह मन को समाचार नहीं, मौसम बना देता है — उस पर चलने से पहले उसे बैठ जाने दें।

! सँभलकर

ऊर्जा और पहल

मंगल वृषभ राशि में है, जो कुम्भ से चौथे भाव है — घर, माता, भूमि और मन की शान्ति का भाव। बृहत् संहिता 104.4 चौथे भाव को मंगल के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह गरम चलता है — टकराव, जल्दबाज़ी और क्रोध ही शास्त्रीय चेतावनी हैं।

· सामान्य

वाणी, अध्ययन और काग़ज़ी काम

बुध मिथुन राशि में है, जो कुम्भ से पाँचवें भाव है — सन्तान, विद्या, सृजन और निर्णय-शक्ति का भाव। बृहत् संहिता 104.4 पाँचवें भाव को बुध के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह चतुर नहीं, साधारण परिणाम देता है — भेजने से पहले दो बार पढ़ें।

· सामान्य

वृद्धि, धन और मार्गदर्शन

गुरु कर्क राशि में है, जो कुम्भ से छठे भाव है — काम का दबाव, ऋण, प्रतिद्वन्द्वी और रोज़ की बाधाएँ का भाव। बृहत् संहिता 104.4 छठे भाव को गुरु के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह वृद्धि को सामान्य से धीमा कर देता है — रुकी नहीं, बस अनहड़बड़ी।

! सँभलकर

सम्बन्ध और सुख-सुविधा

शुक्र सिंह राशि में है, जो कुम्भ से सातवें भाव है — साझेदार — विवाह में भी और व्यापार में भी का भाव। बृहत् संहिता 104.4 सातवें भाव को उन तीन स्थानों में गिनती है जिन्हें वह शुक्र के लिए प्रतिकूल कहती है, इसलिए यह स्नेह और व्यय में खटास डालता है — इसे भारी नहीं, हल्के में लें।

! सँभलकर

काम, कर्तव्य और धैर्य

शनि मीन राशि में है, जो कुम्भ से दूसरे भाव है, और वक्री गति में — धन, परिवार और आपकी वाणी का भाव। बृहत् संहिता 104.4 दूसरे भाव को शनि के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह विलम्ब, अतिरिक्त कर्तव्य और धीमी प्रगति के संकेत देता है।

मीन

Pisces स्वामी: गुरु

29 July 2026 · Moon sign reading

शनि मीन से पहले भाव में — साढ़े साती, बीच के ढाई वर्ष, जब शनि सीधे राशि पर खड़ा है; स्थिर, अनहड़बड़ी परिश्रम ही शास्त्रीय परामर्श है।

मीन से गिनते हुए — आपकी जन्म राशि, अर्थात् वह राशि जिसमें जन्म के समय चन्द्र था — 2026-07-29 को ग्रह वास्तव में यहाँ खड़े हैं। शनि आपकी राशि से पहले भाव में बैठा है, जो मीन को साढ़े साती में ले आता है: चक्र का सबसे कठिन खंड — धीमी प्रगति, भारी कर्तव्य, और सरल होने का प्रबल खिंचाव। यह पृष्ठभूमि है; शेष सब इससे तेज़ चलता है। आपके पक्ष में चल रहे हैं: चन्द्र ग्यारहवें भाव में (लाभ, आय और वे लोग जो आपकी सहायता करते हैं), मंगल तीसरे भाव में (साहस, प्रयास, छोटी यात्राएँ और भाई-बहन), बुध चौथे भाव में (घर, माता, भूमि और मन की शान्ति) और गुरु पाँचवें भाव में (सन्तान, विद्या, सृजन और निर्णय-शक्ति) — इनमें से हर भाव वह है जिसे बृहत् संहिता उस ग्रह के लिए शुभ गिनती है। सँभालकर चलने योग्य: सूर्य पाँचवें भाव में (सन्तान, विद्या, सृजन और निर्णय-शक्ति), शुक्र छठे भाव में (काम का दबाव, ऋण, प्रतिद्वन्द्वी और रोज़ की बाधाएँ) और शनि पहले भाव में (स्वयं आप — सेहत, मनःस्थिति और आप दूसरों को कैसे दिखते हैं)। ये शास्त्रीय अर्थ में सावधानियाँ हैं — साथ लेकर चलने का दबाव, न कि घोषित घटनाएँ। चन्द्र, जो एक दिन का स्वर तय करता है, मकर राशि में है — मीन से ग्यारहवें भाव — उन पाँच स्थानों में से एक जिन्हें श्लोक उसके लिए शुभ कहता है, इसलिए दिन चलने लायक लगना चाहिए। ऊपर सब कुछ जाँचा जा सकता है: यह इससे आया है कि 2026-07-29 से 2026-07-29 के बीच ग्रह कहाँ बैठे हैं, आपकी राशि से गिने गए, एक उद्धृत तालिका के विरुद्ध पढ़े गए — और किसी और चीज़ से नहीं।

क्या चल रहा है, और यह कहाँ से आया

! सँभलकर

Sāde Sātī साढ़े साती

शनि मीन से पहले भाव में गोचर कर रहा है — साढ़े साती, बीच के ढाई वर्ष, जब शनि सीधे राशि पर खड़ा है। शास्त्रीय संकेत है चक्र का सबसे कठिन खंड — धीमी प्रगति, भारी कर्तव्य, और सरल होने का प्रबल खिंचाव। यह वर्षों में नापा जाने वाला लम्बा, धीमा गोचर है, इस दिन पर कोई फ़ैसला नहीं।

! सँभलकर

कार्य और प्रतिष्ठा

सूर्य कर्क राशि में है, जो मीन से पाँचवें भाव है — सन्तान, विद्या, सृजन और निर्णय-शक्ति का भाव। बृहत् संहिता 104.4 पाँचवें भाव को सूर्य के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह कहता है कि अधिकार को ज़बरदस्ती न चलाएँ और अपनी ऊर्जा न जलाएँ।

↑ अनुकूल

मनःस्थिति और आसपास के लोग

चन्द्र मकर राशि में है, जो मीन से ग्यारहवें भाव है — लाभ, आय और वे लोग जो आपकी सहायता करते हैं का भाव। बृहत् संहिता 104.4 ग्यारहवें भाव को चन्द्र के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह मन को सम रखता है और लोगों से निपटना आसान बनाता है।

↑ अनुकूल

ऊर्जा और पहल

मंगल वृषभ राशि में है, जो मीन से तीसरे भाव है — साहस, प्रयास, छोटी यात्राएँ और भाई-बहन का भाव। बृहत् संहिता 104.4 तीसरे भाव को मंगल के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह ऐसा वेग देता है जो सचमुच काम आता है।

↑ अनुकूल

वाणी, अध्ययन और काग़ज़ी काम

बुध मिथुन राशि में है, जो मीन से चौथे भाव है — घर, माता, भूमि और मन की शान्ति का भाव। बृहत् संहिता 104.4 चौथे भाव को बुध के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह बातचीत, अध्ययन, लेखन और काग़ज़ी काम के लिए अनुकूल है।

↑ अनुकूल

वृद्धि, धन और मार्गदर्शन

गुरु कर्क राशि में है, जो मीन से पाँचवें भाव है — सन्तान, विद्या, सृजन और निर्णय-शक्ति का भाव। बृहत् संहिता 104.4 पाँचवें भाव को गुरु के शुभ गोचर-स्थानों में गिनती है, इसलिए यह सहारे, वृद्धि और अच्छी सलाह का शास्त्रीय चिह्न है।

! सँभलकर

सम्बन्ध और सुख-सुविधा

शुक्र सिंह राशि में है, जो मीन से छठे भाव है — काम का दबाव, ऋण, प्रतिद्वन्द्वी और रोज़ की बाधाएँ का भाव। बृहत् संहिता 104.4 छठे भाव को उन तीन स्थानों में गिनती है जिन्हें वह शुक्र के लिए प्रतिकूल कहती है, इसलिए यह स्नेह और व्यय में खटास डालता है — इसे भारी नहीं, हल्के में लें।

! सँभलकर

काम, कर्तव्य और धैर्य

शनि मीन राशि में है, जो मीन से पहले भाव है, और वक्री गति में — स्वयं आप — सेहत, मनःस्थिति और आप दूसरों को कैसे दिखते हैं का भाव। बृहत् संहिता 104.4 पहले भाव को शनि के शुभ गोचर-स्थानों में नहीं गिनती, इसलिए यह विलम्ब, अतिरिक्त कर्तव्य और धीमी प्रगति के संकेत देता है।

ग्रह वास्तव में कहाँ हैं

Sidereal positions at Wed, 29 Jul 2026 12:00:00 GMT, the midpoint of this window. Everything above is counted from these and nothing else.

  • Sun सूर्य · Karka 12.17°
  • Moon चन्द्र · Makara 10.95°
  • Mars मंगल · Vṛṣabha 27.14°
  • Mercury बुध · Mithuna 23.6°
  • Jupiter गुरु · Karka 12.18°
  • Venus शुक्र · Siṃha 27.22°
  • Saturn शनि · Mīna 20.51° ℞
  • Rahu राहु · Kumbha 5.62° ℞ (not read)
  • Ketu केतु · Siṃha 5.62° ℞ (not read)

यह किस पर बना है

The classical rule, quoted in full
“When the Sun passes through the 6th, 3rd and 10th signs from the sign occupied by the Moon at the time of birth of a person, the effects will be benefic; when the Moon passes though the 3rd, 6th. 10th, 7th, and 1st signs from the Moon, the effects will also be benefic; when Jupiter passes through the 7th, 9th, 2nd and 5th signs or when Mars and Saturn pass through the 6th and 3rd signs or when Mercury passes through the 6th, 2nd, 4th, 10th and 8th signs from the Moon, the effects will be benefic. But when Venus passes through the 7th, 6th and 10th signs from the Moon, the effects will be malefic. All the planets (graha) produce benefic effects when they pass through the 11th house from the Moon.” Varāhamihira, Bṛhat Saṁhitā, ch. 104 (graha-gocara), verse 4 — N. Chidambaram Iyer, English translation, 1884 (the text hosted on wisdomlib). Quoted verbatim, including its OCR artefacts ("passes though", "3rd, 6th. 10th"), so the quotation can be checked against the source rather than against a tidied paraphrase.

The verse gives Venus its adverse houses (6, 7, 10) rather than its favourable ones; the other nine are therefore its favourable set, which is how the published tables render it.

The 11th appears in every row because the verse grants it to all grahas.

The same table is printed in B. V. Raman, Hindu Predictive Astrology, ch. 34 (Gocharaphala), agreeing cell for cell — except that Raman also gives Mars the 10th. The Bṛhat Saṁhitā does not, so Horā follows the verse and omits it. The variant is named here rather than quietly absorbed.

होरा क्या छोड़ देता है: Rāhu and Ketu carry no favourable-house row in Bṛhat Saṁhitā 104.4 and none could be verified against a second published source, so both are omitted from the reading entirely rather than guessed. Their positions are still reported as astronomy under `transits`.

वेध लागू नहीं किया गया: Vedha — the obstruction rule, by which a favourable transit is cancelled when another graha occupies the obstructing house — is NOT implemented. The vedha tables are a separate body of doctrine from the verse quoted above, and applying them from memory would be exactly the invention this platform refuses. Every favourable reading here should therefore be read as unobstructed by assumption, not by test. A cast chart does not depend on this omission.

The favourable-house table, cell by cell
Benefic transit houses counted from the Janma Rāśi
Sun 3, 6, 10, 11
Moon 1, 3, 6, 7, 10, 11
Mars 3, 6, 11
Mercury 2, 4, 6, 8, 10, 11
Jupiter 2, 5, 7, 9, 11
Venus 1, 2, 3, 4, 5, 8, 9, 11, 12
Saturn 3, 6, 11
Rāhu, Ketu— no verified row; omitted from the reading.

The Moon is scored, because a single day is short enough for one lunar transit to hold.

Saturn’s long cycles — Sāde Sātī and the rest

साढ़े साती: Saturn transiting the 12th, 1st and 2nd from the Janma Rāśi — about seven and a half years in all.

अर्धाष्टम शनि: Saturn in the 4th from the Janma Rāśi (Ardhāṣṭama Śani, also called Kaṇṭaka Śani).

अष्टम शनि: Saturn in the 8th from the Janma Rāśi (Aṣṭama Śani).

Standard gochara doctrine (Phaladīpikā; BPHS transit principles). The same three cycles, under the same names, are reported for a real natal Moon by src/ganita/gochara.js; the favourable-house table above is not part of that module.

Where Horā is making a judgement call, not quoting a text

DISCLOSED ENGINE CONVENTION, not classical doctrine: a graha in one of its benefic houses is shown "good"; Venus in the 6th, 7th or 10th is shown "care" because the verse names those adverse; otherwise a natural malefic (Sun, Mars, Saturn) is shown "care" and a benefic "mixed", since the verse is simply silent there. The order of the areas, and which transit is picked to lead the headline, are also this engine’s editorial choices.

the ephemeris, sidereal, Lāhirī (Citrapakṣa) ayanāṁśa. A rāśi reading has no birthplace, so the window is reckoned in UTC.

Plain-English rendering of the standard bhāva significations carried in src/phala/data/significations.js (BHAVA), per BPHS / Phaladīpikā.

स्रोत

A rāśi horoscope is a broad indication, not a personal one. It is the same reading for roughly a twelfth of the world at once, because it uses only one thing about you — your Moon sign — and nothing else. It cannot know your ascendant, the houses those transiting grahas rule for you, which daśā (planetary period) you are running, or where the same grahas sat at your birth, and those are precisely what turn a general transit into a personal event. Read it as the weather, not the forecast for your own roof. Cast a birth chart if you want the reading that is actually about you. Nothing here is medical, financial or legal advice.

यह आज का मौसम है। आपकी कुंडली पूर्वानुमान है।

A rāśi reading uses one fact about you. A birth chart uses your ascendant, your daśā, and where these same grahas stood the day you were born.

Cast your chart — free